अमिताभ बच्चन ने शेयर की 44 साल पुरानी तस्वीर: डॉन का टिकट खरीदने सड़क पर लगी थी 1 मील लंबी लाइन
हिंदी सिनेमा की बीते दौर की बात की जाए तो पुरानी यादों का पूरा पिटारा ही खुल जाता है। आज एक बार फिर अमिताभ बच्चन ने ऐसा ही एक पिटारा खोला अपने इंस्टाग्राम पर। अमिताभ बच्चन ने शेयर की एक तस्वीर। ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर। तस्वीर में ढेर सारे लोग एक लंबी लाइन लगा कर खड़े हैं। ऐसी लाईन जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही।
अमिताभ बच्चन ने ये तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि ये लाईन उनकी फिल्म डॉन की टिकट खरीदने के लिए है। यानि कि ये तस्वीर 44 साल पुरानी है। अमिताभ बच्चन ने बताया कि लोग बताते हैं कि उस वक्त उनकी फिल्म का टिकट खरीदने के लिए एक एक मील लंबी लाइन लग जाती थी।

वहीं ये फिल्म 50 से ज़्यादा हफ्तों तक सिनेमाघरों में लगी हुई थी। तस्वीर साल 1978 की है। अमिताभ बच्चन के इंस्टाग्राम पर आज के कई सितारों ने इस तस्वीर पर कमेंट किया और बस हैरान रह गए। ये एक अलग ही तरह का स्टारडम था जो शायद ही आज किसी अभिनेता के हिस्से आए। वहीं ये तसवीर, डॉन की रिलीज़ के पहले की है। यानि कि डॉन की एडवांस बुकिंग।

900 प्रतिशत का कमाया था मुनाफा
अमिताभ बच्चन की आईकॉनिक फिल्म डॉन 12 मई 1978 को रिलीज़ हुई थी और ये अमिताभ बच्चन के करियर की सबसे सफल फिल्मों में से एक है। डॉन ना सिर्फ हिंदी सिनेमा के इतिहास की एक यादगार फिल्म है बल्कि इस फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़े भी जादुई थे। गौरतलब है कि डॉन ने 70 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर लगभग 900 प्रतिशत का मुनाफा कमाया था।

लाखों का बजट और करोड़ों की कमाई
फिल्म केवल 70 लाख के बजट पर बनी थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर कुल 7 करोड़ की कमाई की थी। इसके बावजूद, डॉन 1978 की तीसरी सबसे ज़्यादा कमाने वाली फिल्म थी। हालांकि सलीम जावेद ने डॉन की स्क्रिप्ट काफी पहले लिखी थी लेकिन ये फिल्म कोई खरीदना नहीं चाहता था। फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी, अपनी पिछली फिल्म के कारण 12 लाख रूपये कर्ज़ में थे। कर्ज़ से निकलने के लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन - ज़ीनत अमान और मनोज कुमार को लेकर फिल्म बनाना चाहते थे। सलीम जावेद की ये फिल्म कोई नहीं खरीद रहा था और इसलिए नरीमन ने इसे कम पैसों में तुरंत खरीद ली और डॉन बनना शुरू हुई।

मिस्टर डॉन बन गया डॉन
सलीम जावेद ने इस फिल्म को नरीमन ईरानी को बेचने से पहले, देव आनंद, विनोद मेहरा और जीतेंद्र को इस फिल्म के लिए अप्रोच किया था। सलीम जावेद ने एक डॉन की कहानी पर पूरी फिल्म लिखी थी और फिल्म का कोई नाम नहीं था। बस फिल्म के मुख्य किरदार को सब डॉन बुलाते थे। मनोज कुमार ने सुझाव दिया था कि फिल्म का नाम मिस्टर डॉन रखा जाए लेकिन किसी को ये नाम पसंद नहीं आया। बाद में फिल्म का नाम ही डॉन पड़ गया।

हीरो थे लेकिन कम थी फीस
अगर रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान, हेलेन, प्राण किसी को भी पैसे नहीं दिए गए थे। सबको पैसे फिल्म के रिलीज़ होने और फिल्म के हिट होने के बाद दिए गए। वहीं फिल्म के लिए प्राण को अमिताभ बच्चन से ज़्यादा फीस मिली थी। प्राण उस समय अमिताभ बच्चन से बड़े सुपरस्टार थे और उन्हें फिल्म में लेने के लिए प्रोड्यूसर्स की लाईन लगी रहती थी।

बाद में जोड़ा गया था खईके पान बनारस वाला
अब बात करते हैं फिल्म के सबसे आईकॉनिक गाने - खईके पान बनारस वाला की। ये गाना, पूरी फिल्म बनने के बाद अलग से जोड़ा गया था और बाद में शूट हुआ था। इस गाने का लुक, संजीव कुमार की फिल्म नया दिन नई रात के एक किरदार से लिया गया था। इस फिल्म में संजीव कुमार ने 9 किरदार निभाए थे जिनमें से एक किरदार यूं ही बालों में तेल लगाकर हमेशा पान चबाता रहता था।

फिल्म के दौरान हुई थी प्रोड्यूसर की मौत
इस फिल्म की शूटिंग के दौरान, एक दिन सेट पर बिजली गिरी जिससे एक लाईट नीचे गिर पड़ी और इस दुर्घटना में फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी का निधन हो गया। उनकी मौत के बाद फिल्म के लिए कहीं से पैसे नहीं मांगे गए और जो भी था, उसी में फिल्म को पूरा किया गया। फिल्म के लिए जब अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला तो उन्होंने ये अवार्ड लेने के लिए नरीमन ईरानी की पत्नी को स्टेज पर बुलाया और उनके साथ ये अवार्ड कुबूल किया था।


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