»   » Exclusive: हनी सिंह को पंसद करने वाले लोग शास्त्रीय संगीत को बोर कहते हैं क्यों?

Exclusive: हनी सिंह को पंसद करने वाले लोग शास्त्रीय संगीत को बोर कहते हैं क्यों?

By: शांतनु कुमार श्रीवास्तव
Subscribe to Filmibeat Hindi
उस दिन बारिश ज्यादा हुयी, आंधी आई, केबल का रिसेप्शन सही नही था इसलिए चैनल की आवाज नदारद थी। हर चैनल पर सिर्फ हिलती डुलती तस्वीरे नज़र आ रही थी, रैंप पर सुंदरियों की तेजी से आवा जाही, तो न्यूज़ एंकर का टेबल के ऊपर चढ़ कर बोलना, सब अजीब सा लग रहा था, मजा नही आ रहा था. अरे भई,बिना संगीत या कहिये बैकग्राउंड मुजिक नहीं था।

टीवी कुछ देर के लिए बंद कर मैंने लैपटॉप ऑन किया, फिर भी, एक ख्याल रह ही गया। कितनी कमाल की चीज है यह संगीत,जो किसी भी चीज से जुड़कर उसके मायने बदल देती है.नही मानते,चलये दूसरा example देता हूँ,आई पी एल में बिना संगीत के नाचती चीयरलीडर्स के बारे में सोचें?अच्छा लगेगा ??

शांतनु कुमार श्रीवास्तव के लिखे लेख को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

नही ना.हाँ यह अलग बात है कि बहुत सारे लोग सिर्फ चीयरलीडर्स देखकर भी खुश हो जाते हैं. अगर यह संगीत न होता तो ढेर सारे ऍफ़ एम् स्टेशंस और म्यूजिक पर आधारित केबल चैनल्स न होते.अरे अपने बॉलीवुड का क्या होता जहाँ गाने और संगीत के बिना फिल्मों के बारे में सोचा ही नही जा सकता.अजी छोडिए, बिना गानों की कितनी फिल्में आती है.आती भी हैं तो उनमे अलग से आइटम सोंग डाल ही दिया जाता है.अच्छे संगीत के बिना तो हमारी फिल्मों की सफलता ही अधूरी मानी जाती है।


कितनी ही फिल्में सिर्फ अच्छे संगीत की वजह से चली हैं. यह संगीत न होता तो बसंती शायद 'कुत्तों' से सामने कभी नही नाचती.मिथुन दा कभी खुद को 'डिस्को डांसर' न बताते,अनारकली का तो वजूद ही न होता,और तो और अपने शाहरुख़ खान इस संगीत के बिना डांस पर चांस कैसे मारते? इस संगीत ने हमें लता मंगेशकर,आशा भोसले, रफी, किशोर, मुकेश, मन्ना डी, उदित नारायण,सोनू निगम जैसे अनगिनत सितारे दिए हैं। यही नहीं आज लोग हनी सिंह के भारी संख्या में दीवाने हैं, आज तो हनी सिंह की लोकप्रियता का आलम यह है कि आज की कोई भी फिल्म बिना हनी सिंह के पूरी ही नहीं होती है।

पिछले तीन साल से संगीत का बलात्‍कार कर रहा है हनी सिंह

यही नहीं संगीत ने ही हमें अभिजीत सावंत, देबोजीत, हर्षित, विनीत जैसे रियलिटी शो और उनके विजेता भी दिए हैं, संगीत के बिना यह सिंगिंग या डांसिंग रियलिटी शो भी तो न होते ना.अब आपको लग रहा होगा की मैं संगीत के सिर्फ व्यावसायिक महत्वों पर ही बात कर रहा हूँ.ऐसा नही हैं,संगीत तो हमारे कण कण में बसा हुआ है।

ज़िन्दगी के हर पहलू में संगीत है.फिल्म 'सपने' का एक गाना याद आता है aawara bhanware जिसमे गीतकार ट्रेन के गुजरने,भवरों के गूंज,हवा के सरसराहट,माँ की लोरी,कोयल की कूक,झींगुर की आवाज,नदियों के बहने,घडी के टिक टिक, परिंदों की चहचाहट सभी में संगीत होने को बताता है।

सही ही तो है,यह ज़िन्दगी भी तो एक संगीत है जिसे लोग जीवन संगीत भी कहते हैं. आज हमने चाहे कितनी भी तकनीकी तरक्की कर ली हो,सिर्फ गाने सुनने के लिए कितने भी माध्यम हों,मसलन-सी.डी,dvds,ipods,mp3 players,पर आज भी रेडियो पर लोग अपने फर्माएश के गाने सुनने पसंद करते हैं।

आकाशवाणी का एक वो भी ज़माना था तब लोग चिट्ठियां लिखकर अपने गाने के बजने का इंतज़ार करते थे. हालात बदले तो आजकल लोग चिट्ठी लिखने के बजाय sms और कॉल करने लगे हैं.फिर भी वही पुराना फर्माएशी फॉर्मेट आज भी लोगों का पसंदीदा है। फरमाइश का यह दस्तूर यूं ही बना रहे,हम तो येही चाहते हैं. हमारे भारत में संगीत के अपने ही मायने हैं।

इसकी महत्ता इतनी बड़ी है कि मै इसे बताने के लिए खुद को उतना काबिल नही पाता.आम ज़िन्दगी और रेडियो मीडिया में काम करते हुए इसके जिन पहलुओं को मैंने महसूस किया है,वही मैंने आपसे शेयर किया.पर आपको कहीं नही लगता कि संगीत के इस बाज़ार में हमारा शास्त्रीय संगीत कहीं खोता जा रहा है।

बच्चे हिमेश रेशमिया को तो जानते हैं पर पंडित रविशंकर को नही जानते. एक बार उस्ताद आमिर खान को मेरे पड़ोस के बच्चे ने बॉलीवुड वाले आमिर खान समझ कर कहा अब आमिर क्लास्सिकल भी गायेगा. बहुत सारे लोगों को क्लास्सिकल सुनना अच्छा ही नही लगता,उनका भी दोष नहीं,सुनने की आदत अगर शुरू से होती तो ऐसा नही होता। संगीत पर भी बाज़ार हावी है पर अपने संगीत को बचाने की भी तो जिम्मेदारी अपनी ही है न? सोचियेगा ज़रूर।

English summary
People Likes Honey Singh but said Classical Music Is Boring why.They said Honey Singh gives us Freshness but Classical Music gives only Pain.
Please Wait while comments are loading...