पिछले तीन साल से संगीत का बलात्‍कार कर रहा है हनी सिंह

पंजाबी रैपर हनी सिंह.. जिनके गानों ने रिकार्ड पर रिकार्ड बनाये हैं आज सवालों के घेरे में हैं उन पर मुकदमा किया गया है। वजह है अश्लील शब्दों का प्रयोग धड़ल्ले से अपने गानों में करना। लेकिन केस तो आज दर्ज हुआ है वो भी उस गाने पर जो कि एक साल पहले मार्केट में आया था। 'मैं हूं बलात्कारी'...सांग ने एक साल पहले ही लोकप्रियता बटोरी ली थी और धड़ल्ले से पैसे कमाये थे।

ऐसी कोई पंजाबी शादी नहीं होगी जहां हनी के गाने नहीं बजे, लोगों ने जमकर बारातों में ठुमके लगाये, लेकिन ना तो कोई हंगामा मचा और ना ही कोई बवाल हुआ। लेकिन आज करीब एक साल बाद जब दिल्ली में एक मासूम लड़की कुछ लोगों के हवस का शिकार हो गयी औऱ लोग सड़कों पर निकल आये तो समाज के ठेकेदार अचानक से जाग गये और हनी सिंह पर एक्शन ले लिया।

मालूम हो कि साल 2009 से ही हनी सिंह ने पंजाबी रैप संगीत में अश्लीलता परोसनी शुरू कर दी थी। लोगों को उसका यह प्रयोग पसंद आ रहा था तो उसने अपना यह प्रयोग धड़लल्ले से जारी रखा और वो पंजाबी रैप म्यूजिक का सरताज बन बैठा। दौलत और शौहरत की इस आंधी में वो यह भी भूल बैठा कि वो उसने बड़ी आसानी से धीरे-धीरे रैप म्यूजिक का रेप कर दिया है।

अगर आप हनी सिंह के एक-एक वीडियो पर गौर फरमायें तो उसमें अश्लीलता के सिवाय और कुछ नहीं मिलेगा। ऐसे शब्‍द हैं, जिन्‍हें हम अपनी वेबसाइट पर लिख तक नहीं सकते और न उनका वीडियो डाल सकते हैं। सन्‍नी ने कंडोम से लेकर योनि व लिंग के लिये प्रयोग किये जाने वाले अश्‍लील शब्‍दों को संगीत में पिरोया। लोग धड़ल्ले से उसकी इस संगीत माला के फैन बन गये। आज समस्‍या हनी सिंह नहीं है, समस्‍या वो 10 लाख लोग हैं, जिन्‍होंने बलात्‍कारी वीडियो को देखा और लाइक किया। समस्‍या उनके 49173 ट्विटर फॉलोवर्स हैं, जो हर रोज हनी की अश्‍लीलता पर वाह-वही लुटाते हैं।

सरकार ने बनाया रेपिस्‍ट हनी को

भले ही आज दोषी बना कर उस पर केस दर्ज किया गया है लेकिन यहां सोचने वाली बात यह है कि इन दोषियों के जन्मदाता कौन हैं? क्योंकि अगर समाज से अश्लीलता और अपराध को रोकना है तो पहले उसका खात्मा करना पड़ेगा जो कि अश्लील गायकों के जनक हैं।

मालूम हो कि हनी सिंह का के खिलाफ अश्लील गाने गाने और महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोंग करने के जुर्म में लखनऊ में FIR दर्ज करायी गयी है। जिसे दर्ज कराया है कि पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने।

अमिताभ ठाकुर का कहना है कि हनी सिंह ने अश्लीलता और भद्देपन की सभी सीमाएं लांघने वाले गाने 'मैं हूं बलात्कारी' और 'केंदे पेचायिया' गाने लिखे और गाये हैं जो कि समाज में गलत चीजों को प्रसारित करते हैं। ये गाने अत्यंत अश्लील, उत्तेजक और अभद्र होने के कारण भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं। इसलिए हनी सिंह के खिलाफ उन्होंने मुकदमा किया है।

अमिताभ ठाकुर ने अपना कर्तव्‍य समझते हुए जो किया अच्‍छा किया, कहते हैं न देर आये दुरुस्‍त आये, लेकिन हमारी राय में एक पीआईएल सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के खिलाफ भी दाखिल करनी चाहिये। सेंसर बोर्ड के खिलाफ पीआईएल होनी चाहिये, जिनके अधिकारी पिछले तीन साल से कान में तेल डालकर सो रहे थे। क्‍योंकि हनी सिंह पर आजीवन प्रतिबंध लगा देने से भी उसकी धुनें गली चौराहों पर बजना बंद नहीं होंगी। यूट्यूब पर वीडियो को डिलीट कर देने से हल नहीं निकलेगा, क्‍योंकि लाखों सीडी बजार में बिक चुकी हैं। तब सरकारी सेंसर बोर्ड कहां था, जब ये गाने बाजार में बिक रहे थे?

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