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REVIEW..कोशिश तो बहुत की..लेकिन हर जगह मार खा गई 'हसीना'

By: Madhuri
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Haseena Parkar Movie Review: Shraddha Kapoor to show Life of Queen of Mumbai | FilmiBeat
Rating:
1.5/5

कास्ट- श्रद्धा कपूर, सिद्धांत कपूर, अंकुर भाटिया
डायरेक्टर - अपूर्व लाखिया
प्रोड्यूसर - नाहिद खान
लेखक - सुरेश नायर
शानदार पॉइंट - कुछ भी नहीं
निगेटिव पॉइंट - डायरेक्शन, परफॉर्मेंस, स्क्रीनप्ले
शानदार मोमेंट - फिल्म के एक सीन में जज अचानक चीख पड़ता है और बोलता है कि 'हम इनपर नोवेल नहीं लिख रहे हैं।" और आप भी हां बोलते हुए अपना सर हिलाएंगे।

प्लॉट

प्लॉट

फिल्म का ओपनिंग सीन हसीना (श्रद्धा कपूर) के साथ शुरू होता है जिसमें हसीना को मुंबई सेशन कोर्ट से भाई दाउद इब्राहिम (सिद्धांत कपूर) के साथ जबरन वसूली में शामिल होने के लिए समन मिलता है। बिल्कुल भरे-भरे गालों के साथ हसीना बोलती है 'मैं हूं हसीना पारकर'।
फिल्म अतीत और वर्तमान दोनों को दिखाती है और हम दाउद कैसे धीरे-धीरे गैंगस्टर बनता है और इसका प्रभाव उसके परिवार खासकर बहन पर पड़ता है।

हसीना के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में हेड कांउस्टेबल हैं। उनकी अपने विद्रोही बेटे से बिल्कुल भी बनती जो धीरे धीरे क्राइम किंग बन जाता है। इन सब के बीच हसीना अपने पति इस्माइल(अंकुर भाटिया) के साथ काफी खुश है जिसका शाकाहारी रेस्तरां भी है।

प्लॉट

प्लॉट

दुश्मन पठान गैंग से सब्बीर द्वारा मारे जाने के बाद दाऊद भी बदला लेता है और जब पुलिस उसे और अंडरवर्ल्ड पर शिकंजा कसना चाहती है तो वो देश छोड़कर चला जाता है।जल्दही हसीना के पति इस्मेल को भी दिन दहाड़े गोलियों से छलनी कर दिया जाता है।

पति की मौत और भाई की अनुपस्थिति में हसीना पूरा बिजनस संभालती है और 'आपा' बन जाती है। फिल्म का बाकी प्लॉट यही दिखाता है कि क्या हसीना वाकई शातिर है या फिर समय उसे ऐसा बनने पर मजबूर कर देता है।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

अपूर्व लाखिया का कोर्टरूम ड्रामे को फिल्म में ठीक से पेश नहीं किया गया है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि मुंबई की सबसे कंट्रोवर्सियल महिला को फिल्म में इस तरह से दिखाया गया है कि आपको उससे हमर्ददी हो। कि उसे दाउद इब्राहिम की बहन होने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। फिल्म का कमजोर स्क्रीनप्ले और डायलोग भी इसे कमजोर फिल्म बनाता है।

 परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

श्रद्धा कपूर ने भले फिल्म में पूरी ईमानदारी दिखाई हो लेकिन फिल्म में उन्हें कास्ट ही नहीं करना चाहिए था। खासकर बड़ी और परिपक्व हसीना के लिए। ऐसा लगता है मानो वो अपने मुंह में रसगुल्ला लेकर डायलोग बोल रही हो।
शादी की रात भी उन्होंने प्ले कॉय सीन में काफी अजीबोगरीब एक्सप्रेशन दिए हैं। एक सीन में चॉल की नल के पास वो लड़ाई कर रही होती और बिल नहीं जमा करने पर गुंडो की क्लास लगाती हैं तो अगले सीन में उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें कुछ पता नहीं है।
ट्रांसफॉर्मेशन के नाम पर कुछ भी नहीं है और तो और मेकर्स उनके बैठने वाली जगह का लो एंगल शॉट दिखा देते हैं। सिद्धांत कपूर भी दाउद इब्राहिम के रोल में स्क्रीन पर अधिक नहीं दिखे और ऐसा लगता है जैसे दाउद के किरदार का मजाक उड़ाया गया हो। अंकुर भाटिया भी इंप्रेस नहीं कर पाते हैं।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फहसत खान की सिनेमेटोग्राफी भी एवरेज है। फिल्म का नैरेशन भी काफी धीमा है। फिल्म के कोर्ट सीन देखकर भी आपको हंसी आएगी।

म्यूजिक

म्यूजिक

हसीना में म्यूजिक भी कुछ खास कमाल का नहीं है। फिल्म का सैड सॉन्ग तेरे बिना काफी अच्छा है।

Verdict

Verdict

फिल्म के एक सीन में श्रद्धा कपूर कहती हैं कि आपा याद रह गया ना..नाम याद रखने की जरुरत नहीं। बदकिस्मती से इस फिल्म में याद रखने लायक कुछ भी नहीं है। फिल्म को नहीं देखने में
आपको कोई नुकसान नहीं है।

English summary
Haseena Parkar movie review story plot and rating.
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