"मैंने 20 साल पहले ही सच्चा मुसलमान बनना छोड़ दिया"
नसीरउद्दीन शाह ने हाल में भारतीय मुस्लिम और हिंदुओं पर अपनी राय रखी है।
बॉलीवुड में कोई भी स्टार्स मौजूदा समय पर या देश की परिस्थिति पर बोलने से बचते हैं क्योंकि सबको विवाद में खींचे जाने का डर होता है। लेकिन हाल में सबसे शानदार एक्टर्स में से एक नसीरूद्दीन शाह ने हिन्दुस्तान टाइम्स के लिए एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने खुलकर भारत में मुस्लिमों के हालात पर बात की है।
नसीरूद्दीन शाह हमेशा से खुलकर और बेखौफ अपनी बात रखते हैं। अपने कॉलम में भी उन्होंने यही किया है और साथ ही अपनी निजी राय भी रखी है। नसीरूद्दीन शाह ने लिखा है कि "मुझो याद नहीं है कि कैसे मुसलमानों को संदेह की नजर से देखना शुरू किया गया। नवजात मुस्लिम बच्चे के कानों में पहली आवाज या जो आज़ान की जाती है या फिर कलमे की।मेरे कानों में कौन सी आवाज गई थी मुझे याद नहीं है।"

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि "मैं अब इस्लाम को फॉलो नहीं करता। मेरा परिवार किसी धर्म से बंधा हुआ नहीं है। मेरी पत्नी हिंदू हैं और जब हमारा बेटा हुआ था तो हमने धर्म का कॉलम खाली रखने का फैसला किया था। हमारी प्रिंसिपल से इसके लिए बहस भी हो गई लेकिन हमने वो कॉलम नहीं भरा क्योंकि हमें तब नहीं पता था कि वो आगे जाकर क्या बनेगा।"
नसीरूद्दीन शाह ने साथ ही ये भी कहा कि "देशभक्ति कोई टॉनिक नहीं है जो जबरदस्ती किसी के गले में डाल दिया जाए। जिस तरह से कई मुस्लिम आईएसआईएस की तुलना करने से बचते हैं उसी तरह से हिंदु भी गौरक्षकों द्वारा किसी मुस्लिम के मारे जाने की निंदा नहीं करते हैं।"
नसीरूद्दीन शाह ने अपने कॉलम में आगे लिखा है कि "भगवा ब्रिगेड वालों ने ना सिर्फ अपने मन में ये बात बिठाई है कि सैकड़ों साल पहले लूटपाट करने आए आक्रमणकरी मुसलमान शासकों ने देश को नुकसान पहुंचाया बल्कि वो भारतीय मुसलमानों को दूसरा दर्जा देकर उन्हें सजा देने का मन बना रखा है। हम 'आक्रमणकारियों के वंशज' हैं, हालांकि हम में भी स्वदेशी खून है। कई पीढ़ियों बाद भी, हमारे पूर्वजों के अपराधों के लिए मरम्मत करने की जरूरत है।"


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