समीक्षा : पहचानें अंदर के शैतान को

कलाकार: कल्की कोचिन, नील भोपालन, शिव पंडित, राजीव खंडेलवाल और अन्य
निर्देशक : बिजोय नांबियार
संगीतकारः प्रशांत पिल्ले, अमर मोहिले, रंजीत बारोट और अनुपम राय
रेटिंग : 3
नवोदित निर्देशक बिजोय नांबियार ने जिस तरह से परदे पर इस थ्रीलर फिल्म की कहानी को प्रस्तुत किया है। वह शैतान को मौजूदा दौर की फिल्मों में से न सिर्फ अलग करता है, बल्कि बेहतरीन भी साबित कर देता है। हाल की फिल्मों को देखें तो थ्रीलर फिल्मों का एक दौर इन दिनों शुरू हो चुका है और दर्शकों ने लगभग सभी फिल्मों को पसंद भी किया है। लेकिन शैतान उन सबसे अलग है।
शैतान के प्रोमो देख कर भले ही आप यह सोचें कि यह कोई हॉरर फिल्म है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। फिल्म की कहानी पांच दोस्तों की कहानी है। जो अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहते हैं। उन्हें कल की चिंता नहीं है। लेकिन अचानक एक रात कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो बेहद अलग होता है। गौरतलब है कि लगभग हर फिल्मों में थ्रीलर फिल्मों में काली जहरीली रात होती ही है। जो उनकी पूरी जिंदगी बदल देती है।
किस तरह से उनके भीतर का शैतान उन्हें एक गलती करने के बाद दूसरी गलती करने पर मजबूर कर देता है। इसी तरह के कई अंर्तरात्मा के द्वंद्व की कहानी शैतान है। फिल्म की कहानी अमीर युवाओं की जिंदगी के हर पहलुओं को बेहतरीन तरीके से दर्शाती है। फिल्म कहीं भी आपको बोर नहीं करती हैं। इंटरवल के बाद दर्शकों को जोड़े रखने के सारे तत्व फिल्म में मौजूद हैं।


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