Iratta Movie Review: जुड़वां भाइयों का ऐसा राज जिसने हिलाया पूरा पुलिस महकमा! क्लाइमैक्स ऐसा कि सांसें थम जाएं
Iratta Malayalam Movie Review: मलयालम सिनेमा एक ऐसा सिनेमा है, जो समय के साथ अपने आपको लगातार प्रूव कर रहा है। इस सिनेमा में ऐसी फिल्में लगातार बन रही है, जो खुद को मील का पत्थर साबित कर रही हैं। हम आपके लिए लाए हैं एक खास सीरीज जिसमें हम आपको बताएंगे मलयालम सिनेमा का AtoZ.

अभी तक हमने A- Aavesham, B- Bhoothkaalam, C- Cold Case, D- Drishyam, E- Eko, F- Family, G- Golam, H- Hridyam का रिव्यू किया है। आज हम आपके लिए I- Iratta का रिव्यू करने जा रहे हैं।
क्या है कहानी
'इरट्टा' (Twin) की कहानी एक चौंकाने वाली घटना से शुरू होती है। वागामोन के एक पुलिस स्टेशन में तैनात एएसआई विनोद की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है- वह भी उसी थाने के भीतर। मामला बेहद संवेदनशील है, क्योंकि अपराध पुलिस स्टेशन में हुआ है। मीडिया और सरकार का दबाव है कि जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाई जाए।
जांच की जिम्मेदारी डीएसपी प्रमोद को सौंपी जाती है, जो विनोद का जुड़वां भाई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कई शक के घेरे बनते हैं- सहकर्मी, परिवार, दोस्त, यहां तक कि निजी रिश्ते भी सवालों में आ जाते हैं। कहानी नॉन-लीनियर अंदाज में चलती है, जहां वर्तमान जांच के साथ-साथ भाइयों के अतीत की परतें खुलती हैं। धीरे-धीरे यह साफ होता है कि मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि रिश्तों, अपराधबोध और दबे हुए सच का है।
कैसी है फिल्म?
'इरट्टा' सिर्फ एक पुलिस प्रोसीजरल ड्रामा नहीं है। यह एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर भी है, जो दर्शकों को लगातार सोचने पर मजबूर करती है। फिल्म की रफ्तार संतुलित है- न ज्यादा तेज, न बहुत धीमी। शुरुआती हिस्से में कहानी सामान्य जांच की तरह आगे बढ़ती है, लेकिन निर्देशक रोहित एम. जी. कृष्णन ने इसे इस तरह बुना है कि दर्शक अंत तक अंदाजा नहीं लगा पाते कि असली सच क्या है।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका क्लाइमैक्स है। आखिरी दस मिनट कहानी को एक नया अर्थ दे देते हैं। ट्विस्ट अचानक नहीं आता, बल्कि पूरी फिल्म में धीरे-धीरे संकेत दिए जाते हैं, जिनका असर अंत में गहरा पड़ता है। यह फिल्म सिर्फ सस्पेंस से नहीं, भावनात्मक झटके से भी असर छोड़ती है।
कैसी है एक्टिंग?
फिल्म की जान हैं जोजू जॉर्ज, जिन्होंने जुड़वां भाइयों-विनोद और प्रमोद-का डबल रोल निभाया है। दोनों किरदारों का स्वभाव और व्यक्तित्व एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है, और जोजू ने बॉडी लैंग्वेज, आवाज और भावनाओं के जरिए यह फर्क बेहद प्रभावी तरीके से दिखाया है। खासकर क्लाइमैक्स में उनका अभिनय दिल दहला देता है।
अंजलि ने मालिनी के किरदार में सादगी और दर्द दोनों को बखूबी निभाया है। आर्या सलीम बतौर एसपी मजबूत और आत्मविश्वासी नजर आती हैं। सहायक कलाकारों ने भी कहानी को मजबूती दी है, हालांकि कुछ किरदारों को और विस्तार मिल सकता था।
फाइनल रिव्यू
'इरट्टा' एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को सिर्फ रहस्य नहीं देती, बल्कि नैतिकता और जिम्मेदारी जैसे सवाल भी उठाती है। तकनीकी रूप से फिल्म मजबूत है- बैकग्राउंड म्यूजिक तनाव को बनाए रखता है और सिनेमैटोग्राफी माहौल को गहराई देती है।
अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जिनमें सस्पेंस के साथ भावनात्मक गहराई भी हो, तो 'इरट्टा' आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। यह फिल्म अंत तक बांधे रखती है और खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक दिमाग में घूमती रहती है।


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