Golam Movie Review: आइडिया पुराना, लेकिन अंदाज नया... मर्डर केस का सस्पेंस, जो अंदर से हिला देगा!
Golam Malayalam movie review: मलयालम सिनेमा अपनी कहानियों से लोगों को धीरे-धीरे अपनी ओर खींच रहा है। हर बार एक नए तरह का फ्लेवर लाकर मलयालम सिनेमा ने भारत की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पैठ बना रहा है। अगर आप भी इस सिनेमा से रूबरू होना चाहते हैं तो फिक्र ना करें हम आपके लिए लाए हैं, मलयालम सिनेमा की A,B,C,D।

जी हां, हम एक सीरीज पर काम कर रहे हैं जहां हम आपको मलयालम सिनेमा का AtoZ बताने वाले हैं। अभी तक हमने A- Aavesham, B- Bhoothkaalam, C- Cold Case, D- Drishyam, E- Eko, F- Family का रिव्यू किया है और आज हम G- Golam का रिव्यू करने जा रहे हैं।
क्या है कहानी
फिल्म 'गोलम' की कहानी कोच्चि की एक IT कंपनी वी-टेक इंटरनेशनल के इर्द-गिर्द घूमती है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर इसहाक जॉन की ऑफिस के वॉशरूम में संदिग्ध हालात में मौत हो जाती है। पहली नजर में यह एक साधारण हादसा लगता है, लेकिन मामले की जांच संभाल रहे युवा पुलिस अफसर ASP संदीप कृष्णा को शुरू से ही कुछ गड़बड़ महसूस होती है।
संदीप को लगता है कि इतनी सुरक्षित और निगरानी वाली जगह पर हुई यह मौत महज संयोग नहीं हो सकती। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे इसाक जॉन की पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी से जुड़े कई चौंकाने वाले राज सामने आते हैं। कहानी धीरे-धीरे एक साधारण मर्डर मिस्ट्री से निकलकर मेडिकल क्राइम और साजिशों की दुनिया में चली जाती है, जहां 'किसने मारा' से ज्यादा अहम सवाल बन जाता है- 'यह सब हुआ कैसे?'
कैसी है फिल्म?
निर्देशक समजद की यह फिल्म एक लिमिटेड स्पेस में सेट होने के बावजूद खुद को बांधकर नहीं रखती। फिल्म का पहला हिस्सा पुलिस के प्रोसेस और इनवेस्टिगेशन पर फोकस करता है, जबकि दूसरा हिस्सा पूरी तरह अलग दिशा में जाता है। यही मोड़ फिल्म को दिलचस्प बनाता है, हालांकि कुछ जगह कहानी प्रेडिक्टेबल भी लगती है।
फिल्म की सबसे अच्छी बात इसका रनटाइम है। करीब दो घंटे के ड्यूरेशन में 'गोलम' बिना बेवजह खिंचे अपनी कहानी कह देती है। बैकग्राउंड म्यूजिक कई सीन में माहौल बनाता है, हालांकि कुछ जगह यह जरूरत से ज्यादा तेज हो जाता है। सिनेमैटोग्राफी सधी हुई है और ऑफिस लोकेशन का सही इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, बड़े कॉन्सेप्ट और ग्लोबल साजिशों को दिखाने की कोशिश कुछ जगह कमजोर पड़ती है। फिर भी, फिल्म की स्पीड और प्रेजेंटेशन इसे बोरिंग नहीं होने देती।
कैसी है एक्टिंग?
रंजीत सजीव ASP संदीप कृष्णा के रोल में शारीरिक रूप से तो फिट बैठते हैं, लेकिन उनके एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी में वैरिएशन की कमी नजर आती है। वह एक सख्त पुलिस अफसर के रूप में ठीक लगते हैं, पर किरदार में गहराई की कमी महसूस होती है।
सिदीक अपने किरदार में कहानी को नई दिशा देते हैं और उनके सीन फिल्म के सबसे मजबूत हिस्सों में गिने जा सकते हैं। चिन्नू चांदनी नायर को इमोशनल सीन मिले हैं, जिनमें वह इंपैक्ट छोड़ती हैं।
दिलीश पोथन सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद अपने कैरेक्टर में असर छोड़ते हैं, वहीं सनी वेन का रोल भविष्य की कहानी की ओर इशारा करता है।
सपोर्टिंग कास्ट का काम औसत से अच्छा है, लेकिन उनके किरदारों से भावनात्मक जुड़ाव पूरी तरह नहीं बन पाता।
फाइनल रिव्यू
गोलम कोई बेहद यादगार थ्रिलर नहीं है, लेकिन यह एक ठीक-ठाक और देखने लायक क्राइम फिल्म जरूर है। कहानी में कुछ नए मोड़ हैं, प्रेजेंटेशन सधी हुई है और फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती। कमजोर एक्टिंग और कुछ सतही लेखन के बावजूद इसका कॉन्सेप्ट और 'कैसे किया गया' वाला एंगल दर्शकों को बांधे रखता है।
अगर आप इन्वेस्टिगेशन और क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं, तो गोलम आपको निराश नहीं करेगी। यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है और मलयालम थ्रिलर्स की मौजूदा लिस्ट में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है।
कहां देख सकते हैं फिल्म
ये फिल्म साल 2024 में रिलीज हुई थी। ये फिल्म एक एवरेज हिट थी। लेकिन जैसे ही ये फिल्म OTT पर आई तो लोग इसके दीवाने हो गए। इस फिल्म को आप OTT प्लैटफॉर्म प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं। इसके अलावा ये मलयालम फिल्म हिंदी में यूट्यूबर पर फ्री में भी मौजूद है। इसे imdb पर शानदार 7.2 की रेटिंग मिली है।


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