Eko Movie Review: जंगल, कुत्ते और रहस्यमयी पति... ये फिल्म उलझाएगी, परेशान करेगी, एंडिंग तो दिमाग घुमा देगी
Eko Malayalam Movie Review: अगर आपको स्लोबर्न सिनेमा पसंद है तो आप यकीनन मलयालम फिल्मों के दीवाने हो जाएंगे। बीते कुछ सालों में मलयालम सिनेमा ने लोगों के बीच काफी बज बनाया है। लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि कैसे और कहां से आप इन फिल्मों के बारे में जानेंगे तो हम आपके लिए लाए हैं मलयालम फिल्मों की एक सीरीज। इस सीरीज में हम आपको बताएंगे मलयालम सिनेमा का AtoZ.

अभी तक हमने A से Avesham, B से Bhoothkaalam, C से Cold Case, D से Drishyam का रिव्यू किया है और आज हम E से Eko का रिव्यू करने जा रहे हैं। ये फिल्म पिछले साल रिलीज हुई थी और इस फिल्म को लोगों से काफी अच्छा रिसपॉन्स मिला था। इस फिल्म को IMDb पर 7.8 रेटिंग मिली थी।
क्या है कहानी
फिल्म की कहानी केरल और कर्नाटक की सीमा पर बसे घने जंगलों वाले इलाके काट्टुकुन्नु में घटती है। यहां एक पहाड़ी पर अकेले रहती हैं म्लाथी चेदत्ती (बियाना मोमिन), जो मलेशिया की रहने वाली हैं। उनके साथ रहता है उनका केयरटेकर पियोस (संदीप प्रदीप), जिसे उनके बेटों ने उनकी देखभाल के लिए रखा है।
म्लाथी के पति कुरियाचन (सौरभ सचदेवा) सालों पहले रहस्यमयी ढंग से गायब हो गए थे। वह एक डॉग ब्रीडर थे और उन पर एक क्रिमिनल केस भी दर्ज था। अब कई लोग पुलिस, पुराने दोस्त और दूसरे सीक्रेट कैरेक्टर कुरियाचन को ढूंढते हुए काट्टुकुन्नु पहुंचते हैं।
इन सभी के मन में कई सवाल हैं- क्या कुरियाचन वाकई जिंदा है? क्या वह जंगलों में कहीं छिपा हुआ है? पियोस और उन खतरनाक ट्रेन किए गए कुत्तों का इसमें क्या रोल है?
फिल्म इन सवालों के सीधे जवाब नहीं देती, बल्कि अलग-अलग लोगों के नजरिए से एक अधूरी लेकिन बेचैन करने वाली तस्वीर पेश करती है।
कैसी है फिल्म?
EKO एक स्लो-बर्न मिस्ट्री थ्रिलर है, जो कहानी से ज्यादा माहौल और डिटेल्स पर भरोसा करती है। फिल्म नॉन-लीनियर नैरेटिव में आगे बढ़ती है और दर्शक को धीरे-धीरे अपनी दुनिया में खींच लेती है। जंगल, धुंध, अकेला घर, ट्रेन्ड कुत्ते और लिमिटेड कैरेक्टर, ये सब मिलकर एक मिस्ट्री और डरावना माहौल बनाते हैं। फिल्म आपको बार-बार यह सोचने पर मजबूर करती है कि सच क्या है और अफवाह क्या।
यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो हर सवाल का सीधा जवाब नहीं, बल्कि हिंट, थ्योरी और अधूरी सच्चाइयों में इंट्रेस्ट रखते हैं। हालांकि, इसकी धीमी रफ्तार और खुला अंत हर किसी को पसंद आए, यह जरूरी नहीं।
कैसी है एक्टिंग?
संदीप प्रदीप (पियोस) फिल्म का सबसे मजबूत किरदार है। उनका कैरेक्टर शांत है, लेकिन अंदर से बेहद सीक्रेटिव। उनकी आंखों और बॉडी लैंग्वेज से बहुत कुछ कहा जाता है।
बियाना मोमिन (म्लाथी चेदत्ती) बेहद कम डायलॉग के बावजूद उनकी एक्टिंग लाजवाब है। उनका संयम, डर और मजबूती स्क्रीन पर साफ झलकती है।
सौरभ सचदेवा (कुरियाचन) उनका कैरेक्टर जानबूझकर अधूरा और सीक्रेटिव रखा गया है। हालांकि, कुछ जगहों पर उनका स्क्रीन प्रेजेंस उस मिथक को पूरी तरह मजबूत नहीं कर पाता, जिसकी कहानी में बात की जाती है।
विनीत, नरेन और सपोर्टिंग कास्ट अपने-अपने किरदारों में फिट बैठते हैं और कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं।
फाइनल रिव्यू
EKO एक ऐसी फिल्म है जो जवाब देने से ज्यादा सवाल छोड़ती है। यह फिल्म हर किसी के लिए नहीं है, लेकिन जो दर्शक स्लो-बर्न मिस्ट्री, ओपन-एंडेड कहानी और दिमाग घुमाने वाला सिनेमा पसंद करते हैं, उनके लिए यह एक शानदार एक्सपीरिएंस साबित हो सकती है। अगर आप तेज रफ्तार थ्रिलर और साफ-सुथरा क्लाइमैक्स चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको उलझा सकती है। लेकिन अगर आपको मूड, माहौल और थ्योरी बेस्ड स्टोरीटेलिंग पसंद है, तो EKO जरूर देखिए।
फिल्म का बिजनेस
ये फिल्म पिछले साल 21 नवंबर 2025 को रिलीज हुई थी। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो इस फिल्म ने 5 करोड़ के बजट में तकरीबन 50 करोड़ का बिजनेस किया था और ये फिल्म साल 2025 की चर्चित मलयाली फिल्मों में से एक थी और टॉप 10 हाइएस्ट ग्रॉसिंग मलयाली फिल्मों की लिस्ट में अपनी जगह बनाई थी। इस फिल्म ने मेकर्स को काफी मुनाफा कमा कर दिया था।
आप ये फिल्म OTT प्लैटफॉर्म Netflix पर देख सकते हैं।


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