Drishyam Movie Review: एक गलती, एक लाश और पूरा सिस्टम हिल गया, क्यों 'दृश्यम' आज भी है मास्टरपीस
Drishyam Malayalam Movie Review: हिंदी फिल्मों की दुनिया से अलग अगर आप कुछ ट्राई करना चाहते हैं तो मलायालम सिनेमा को एक बार जरूर एक्सप्लोर करें। आप अगर सोच रहे हैं कि कैसे और कहां से शुरु करें तो हम आपके लिए लाए हैं एक सीरीज, जिसमें हम बताएंगे मलयालम सिनेमा की AtoZ...

अभी तक हमने A से Avesham, B से Bhoothkaalam, C से Cold Case का रिव्यू किया है और अब हम D से Drishyam का रिव्यू करने जा रहे हैं। साल 2013 में रिलीज हुई इस फिल्म को आप OTT प्लैटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर देख सकते हैं। इस फिल्म की कास्ट है- मोहनलाल, मीना, आशा शरत।
क्या है कहानी?
फिल्म की कहानी जॉर्जकुट्टी नाम के एक साधारण इंसान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पढ़ा-लिखा नहीं है लेकिन जिंदगी की समझ रखता है। वह एक छोटे गांव में केबल टीवी का बिजनेस चलाता है और अपनी पत्नी रानी और दो बेटियों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहा होता है। जॉर्जकुट्टी को फिल्मों का बेहद शौक है और वह अक्सर फिल्मों से ही जिंदगी के फैसले लेना सीखता है।
सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तभी उसकी बेटी के साथ एक गंभीर घटना घटती है। एक लड़का चोरी-छिपे उसकी बेटी की आपत्तिजनक तस्वीरें खींच लेता है और उसे ब्लैकमेल करने लगता है। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि एक हादसे में उस लड़के की मौत हो जाती है। इसके बाद जॉर्जकुट्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है- अपने परिवार को कानून और पुलिस से बचाना।
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कैसी है फिल्म?
'दृश्यम' सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत फैमिली ड्रामा भी है। फिल्म का पहला हिस्सा हल्के-फुल्के अंदाज में आगे बढ़ता है, जिसमें परिवार, रिश्ते और जॉर्जकुट्टी की सादगी दिखाई जाती है। लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म पूरी तरह से रोमांचक मोड़ ले लेती है।
दूसरे हाफ में कहानी इतनी कस जाती है कि दर्शक सीट से हिल नहीं पाता। सच और झूठ की यह लड़ाई बेहद दिलचस्प तरीके से दिखाई गई है। फिल्म हर पल नया मोड़ लेती है और आखिरी सीन तक सस्पेंस बनाए रखती है।
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कैसी है एक्टिंग?
मोहनलाल इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने जॉर्जकुट्टी के किरदार को इतनी सादगी और गहराई से निभाया है कि दर्शक उनसे तुरंत जुड़ जाता है। वह एक आम पिता, समझदार पति और हालात से लड़ने वाले इंसान के रूप में पूरी तरह फिट बैठते हैं।
मीना ने पत्नी रानी के रोल में अच्छा काम किया है। उनका किरदार एक मिडिल क्लास महिला की भावनाओं को सच्चाई से दिखाता है।
आशा शरथ एक सख्त पुलिस अधिकारी और मां के रूप में इंपैक्टफुल नजर आती हैं।
कलाभवन शाजोन ने नेगेटिव किरदार में चौंकाया है और कहानी में जरूरी तनाव पैदा किया है।
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फाइनल रिव्यू
'दृश्यम' एक ऐसी फिल्म है जो सोचने पर मजबूर करती है। यह बताती है कि जब परिवार पर संकट आता है, तो एक आम इंसान भी असाधारण बन सकता है। शानदार कहानी, मजबूत डायरेक्शन और मोहनलाल की बेहतरीन एक्टिंग इस फिल्म को खास बनाती है।
यह फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए, खासकर उन दर्शकों के लिए जो थ्रिलर के साथ-साथ इमोशनल कहानियां पसंद करते हैं।


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