REVIEW..खराब स्क्रीनप्ले ही बन गई फिल्म की दुश्मन..ऐसी है अर्जुन रामपाल की 'डैडी' !
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क्या है खास : अर्जुन रामपाल, प्रोडक्शन डिज़ाइन।
क्या है बकवास : फिल्म की धीमी गति सारा मज़ा किरकिरा कर देगी।
कब लें ब्रेक : इंटरवल में।
शानदार पल : फिल्म में ऐसा कुछ खास नहीं है जो अापके साथ रह जाए।
अर्जुन रामपाल डैडी में कोशिश करते दिखते हैं लेकिन दिक्कत यही है कि कई जगह उनकी कोशिश समझ आ जाती है। फिल्म की गति इतनी धीमी है कि आप चाह कर भी इससे बंधे रहने में नाकामयाब हो जाते हैं।
अर्जुन रामपाल को अपनी कोशिश के पूरे नंबर मिलने चाहिए। काफी समय बाद वो अकेले किसी फिल्म को अपने कंधों पर खींच रहे हैं। लेकिन डैडी के डायरेक्टर निशिकांत कामत उनका साथ नहीं देते हैं।


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