पंचतत्व में विलीन हुए संगीत पुरोधा मन्ना डे, दामाद ने दी मुखाग्नि
आखिरकार संगीत का एक युग समाप्त हो गया..जी हां हम बात कर रहे हैं संगीत के महान उपासक मन्ना डे की जिन्होंने बैंगलोर के एक निजी अस्पताल में गुरूवार को सुबह साढ़े तीन बजे दुनिया को अलिवदा कह दिया था, उनके अंतिम दर्शन को उमड़े उनके प्रशंसकों ने रवींद्र कलाक्षेत्र में आकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जिसके बाद शाम को ही हिंदू धार्मिक रीति के अनुसार बैंगलोर शहर के पश्चिमोत्तर उपनगरीय इलाके में स्थित शवदाहगृह में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनको मुखाग्नि उनके छोटे बेटे दामाद ज्ञानरंजन ने दी।
अंतिम संस्कार के समय मन्ना दा को भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए करीब 500 लोग मौजूद थे, जिनमें उनके मित्र, परिवारवाले एवं प्रशसंक शामिल थे।अंतिम संस्कार के दौरान बैंगलोर बंगाली संघ के कुछ सदस्यों ने रवींद्रनाथ टैगोर का लिखा एक गीत गाया।"
इससे पहले मन्ना डे की एक बेटी सुमिता ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मन्ना डे का अंतिम संस्कार कोलकाता में करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
सुमिता ने ममता सरकार पर मन्ना डे के रहते किसी मामले में परिवार की मदद न करने का आरोप भी लगाया था जिसकी वजह से नाराज मन्ना डे के परिवार वालों ने मन्ना डे का अंतिम संस्कार बैंगलोर में ही कराने का फैसला किया।
साल 2007 में दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित संगीत पुरोधा मन्ना डे के निधन पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी गहरा शोक जताया तो वहीं बॉलीवुड के दिग्गजों ने भी अपनी भाव-भीना श्रद्धांजलि मन्ना डे को समर्पित की।
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