For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

थ्री इडियट्स मेरी कहानी है: माधवन

By Neha Nautiyal
|

रचना श्रीवास्तव

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए, डैलस, अमरीका से

फ़िल्म थ्री इडियट्स के 'एक इडियट' माधवन इन दिनों विदेश यात्रा पर है. फ़ोटोग्राफ़ी के लिए नहीं बल्कि हेती में हुए विनाशकारी भूकंप से पीड़ित लोगों की मदद के लिए.

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के साथ मिलकर माधवन इन दिनों भूकंप पीड़ितों के लिए मदद जुटा रहें हैं. अपने इस अमरीकी प्रवास के दौरान माधवन ने अपनी आने वाली फ़िल्म 'तीन पत्ती' और 'थ्री इडियट्स' की सफलता के बारे में बात की. आप का निक नेम 'मैडी' है. ये कैसे पड़ा?

कॉलेज के समय से ही लोग मुझे मैडी बुलाते हैं. 'रहना है तेरे दिल में' भी मेरा नाम मैडी ही था. इसके बाद से सभी ने मुझे मैडी बुलाना शुरू कर दिया था.

आपकी पहली हिंदी फ़िल्म थी 'रहना है तेरे दिल में' इस फ़िल्म के बारे में कुछ बताइए. 'रहना है तेरी दिल में' मेरी साउथ की फ़िल्म 'मिनाले' पर आधारित थी. मैंने इसके निर्देशक को इंट्रोड्यूस किया था. साउथ में फ़िल्म बहुत हिट हुई थी तो हमने हिंदी में भी फ़िल्म बनाई. फ़िल्म को पसंद किया गया पर फ़िल्म की रिलीज़ के बहुत दिनों बाद इसको पहचान मिली.

'रामजी लंदन वाले' की कहानी आपने लिखी थी. इस कहानी का प्लॉट आपको कैसे सूझा? ये फ़िल्म भी मेरी एक साउथ की फ़िल्म 'नल दमयंती' की रीमेक है. मै काफ़ी कम उम्र से विदेशों का सफ़र करता आया हूँ तो यहाँ शुरुआत में क्या-क्या परेशानी होती है, मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था.

तो मैंने कहा कि आप बनाइए ये फ़िल्म मैं आपको बताता हूँ कि क्या-क्या परेशानी होती है. जैसे टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल एक भारतीय के लिए कितने कष्ट की बात होती है. ऐसी ही बहुत सी बातें हैं. तो इस तरह से फ़िल्म की कहानी बनी और मै इस फ़िल्म से बहुत खुश हूँ.

आपकी साउथ की फ़िल्म का रीमेक थी 'साथिया' और 'युवा' जिसका हिस्सा आप नहीं थे. क्या कहना चाहेंगे? 'युवा' की बात करें, तो जब तमिल में बनी थी तो मैं वही रोल कर रहा था जो अभिषेक ने किया था. लेकिन जब फ़िल्म हिंदी में बनती है तो थोड़ा अलग हो जाता है.

मणिरत्नम जी बहुत अच्छे और बड़े निर्देशक हैं. उनकी सोच बहुत अच्छी होती है. '13 बी' में मैने एक साथ दोनों भाषाओं में फ़िल्म की है लेकिन थोड़ा मुश्किल होता है कि एक डॉयलॉग तमिल में बोलो फिर वही हिंदी में बोलो. हाँ, कभी-कभी लगता है कि काश 'साथिया' मैने हिंदी में भी की होती.

अब बात करती हूँ 'थ्री इडियट्स' की. इस फ़िल्म में आपका पसंदीदा सीन कौन सा है? धन्यवाद. मेरा मनपसंद सीन है चतुर की स्पीच.

इस फ़िल्म का कौन सा गाना आप को पसंद है? 'आल इज़ वेल' मुझे बहुत पसंद है.

आ प बहुत अच्छे एनसीसी कैडेट थे. आप एयर फ़ोर्स में जाना चाहते थे. आपने ब्रिटिश आर्मी, नेवी और एयरफ़ोर्स की ट्रेनिंग भी की. लेकिन छह महीनों से उम्र की प्रॉब्लम हुई और आप नहीं जा पाए. अपने घर वालों की इच्छा पर आपने इंजीनियरिंग पढ़ी फिर आप अभिनय की दुनिया में आ गए. क्या आपको नहीं लगता कि 3 इडियट्स की कहानी कहीं न कहीं आपके ही जीवन की कहानी है?

अरे कहीं न कहीं नहीं, ये तो पूरी तरह मेरे जीवन पर बनी है बस मै वाइल्ड लाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र नहीं ऐक्टर बन गया. मुझको इंजीनियरिंग में कोई दिलचस्पी नहीं थी. जब राजू ने मुझे ये कहानी सुनाई तो मुझे लगा ये तो मेरी कहानी सुना रहा है.

आपका बेटा है, क्या आप उसको फ़िल्मों की दुनिया में आने को कहेंगे या थ्री इडीयट्स का फ़ार्मूला अपनाएँगे? बिलकुल थ्री इडीयट्स का ही फ़ार्मूला अपनाएँगे. जो बनना है बनो, बस अच्छा करो और अच्छे इंसान बनो.

आपकी साल में एक ही हिंदी फ़िल्म क्यों आती है जबकि आप को पसंद करने वाले यहाँ भी बहुत हैं? आपकी बात सही है. लेकिन मैं जो भी फ़िल्म करता हूँ तो चाहता हूँ की कहानी अलग हो, फ़िल्म अलग हो और जो लोग फ़िल्म देखने आते हैं वो फ़िल्म का आनंद लें.

वे याद रखें कि मैंने ऐसी ही फ़िल्में की हैं फिर वो चाहे 'रामजी लंदन वाले' हो या 'मुंबई मेरी जान' हो या फिर '13 बी' हो. इस साल गिनती बढ़ गई है. इस साल मैं दो-तीन फ़िल्में कर रहा हूँ.

वो कौन कौन सी फ़िल्में हैं? अभी 26 फ़रवरी को रिलीज़ हो रही है 'तीन पत्ती'. इसके आलावा 'तनु वेड्स मनु' और 'फ़्रीडम'.

आपने 'तीन पत्ती' में अमित जी के साथ काम किया है. कैसा रहा उनके साथ काम करने का अनुभव? अमित जी महान कलाकार तो हैं ही लेकिन वो स्वयं में एक इतिहास हैं. आप जब उनके साथ खड़े होते हैं या सेट पर होते हैं तो लगता है कि आप इतिहास के साथ खड़े हैं या चल रहे .

इस फ़िल्म में आप का किरदार क्या है?

इस फिल्म में मै एक प्रोफ़ेसर की भूमिका कर रहा हूँ. जी हाँ दो महीने में मैं छात्र से प्रोफ़ेसर बन गया. वो एक ऐसा आदमी है जो अपने काम से असंतुष्ट है. उसको लगता है कि हम लोगों की क़िस्मत बनाते हैं पर प्रोफ़ेसरों की क़िस्मत कोई नहीं बनाता.

इस फ़िल्म का सीन जो आपको पसंद है. जी हाँ एक सीन है, जिसमें मै अमित जी और बेन किंग्सले के साथ हूँ. वो मेरे लिए एक अमर सीन है और कई सालों तक वो सीन मैं अपने बच्चों को दिखाता रहूँगा.

तीन पत्ती के बारे में आप और क्या कहना चाहेंगे?

मुझे लगता है की बहुत ही अनूठी फ़िल्म है. बहुत दिनों के बाद इतनी स्टाइलिश फ़िल्म बनी है. ये एक सरप्राइज़ है मुझे लगता है कि लोग इसका आनंद भी लेंगे और प्रशंसा भी करेंगे ख़ास कर युवा वर्ग. आप लाखों करोड़ों दिलो पर राज करते हैं आप के दिल पर कौन राज करता है? मेरे लिए तो मेरा देश ही सब कुछ है. वही राज करता है मेरे दिल पर.

तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more