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    अफगानिस्तान में जॉन अब्राहम के साथ शूटिंग कर रहे थे निर्देशक, जब तालिबान ने दी बम से उड़ाने की धमकी

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    अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को लेकर जहां पूरे विश्व में उसकी चर्चा हो रही है। फिल्म निर्देशक कबीर खान ने भी अफसोस जताया है। उन्होंने निराश होते हुए उन दिनों को याद किया जब अपनी पहली फिल्म 'काबुल एक्सप्रेस' की शूटिंग के लिए वो जॉन अब्राहम और अरशद वारसी के साथ अफगानिस्तान पहुंचे थे।

    टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए निर्देशक ने कहा, 1996 में मेरी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान, तालिबान के सत्ता में आने से पहले, मैं डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग कर रहा था। तालिबान हर दिन शहर पर गोलाबारी करता था, रॉकेट दागे जाते थे, गोलियों की आवाज आती रहती थी। यह खतरनाक था, लिहाजा उस समय हम काबुल से निकल कर वापस आ गए। दो महीने बाद तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था। फिर हम पांच साल तक वापस नहीं जा सके।

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    निर्देशक ने बताया, 9/11 के बाद ही हम वापस जा पाए और वहां पर डॉक्यूमेंट्री शूट की। हमने 25 साल के युद्ध के कारण पर्यावरण के विनाश पर एक फिल्म बनाई। इन अनुभवों की बदौलत हमने वहां बहुत सारे दोस्त बनाए।

    काबुल एक्सप्रेस के दौरान लोगों ने की मदद

    काबुल एक्सप्रेस के दौरान लोगों ने की मदद

    कबीर खान ने कहा,हमारे पास एक अच्छा नेटवर्क था और ये वही लोग हैं जिन्होंने काबुल एक्सप्रेस की शूटिंग के दौरान मेरी मदद की। आदि (निर्माता आदित्य चोपड़ा) ने मुझसे कहा था कि अफगानिस्तान में फिल्म बनाना बहुत मुश्किल है। उन्होंने पूछा, 'क्या आप वहां लोगों को जानते हैं?' और जैसी कि मैंने उम्मीद की थी.. वहां के लोगों ने मेरा पूरा समर्थन किया और मेरी पहली फिल्म में मेरी मदद की।

    उन लोगों ने मेरी मदद की, आज मैं बेबस हूं

    उन लोगों ने मेरी मदद की, आज मैं बेबस हूं

    काबुल एक्सप्रेस के शूटिंग की बात करते हुए कबीर खान ने कहा,"जब हमें शूटिंग के दौरान तालिबान से जान से मारने की धमकी मिली तो उन लोगों ने फिर से हमारी मदद की, हमें सुरक्षा दी, जिसमें सरकार और स्थानीय लोग भी शामिल थे। उन लोगों की वजह से मैं अपनी फिल्म वहीं खत्म कर पाया और ये वही लोग हैं जो आज मदद मांग रहे हैं और मैं बेबस हूं, मैं मदद कर पा रहा।"

    काबुल एक्सप्रेस

    काबुल एक्सप्रेस

    साल 2006 में आई इस फिल्म में जॉन अब्राहम और अरशद वारसी मुख्य किरदारों में थे।तालिबान का शासन खत्म होने के बाद अफगानिस्तान में शूट होने वाली ये पहली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म थी।फिल्म के लिए कबीर खान ने जॉन अब्राहम और अरशद वारसी संग एक अमेरिकी, अफगानिस्तानी और पाकिस्तानी एक्टर को कास्ट किया था।

    शूटिंग पर पहुंचने से 10 मिनट पहले ब्लास्ट

    शूटिंग पर पहुंचने से 10 मिनट पहले ब्लास्ट

    कबीर खान इस फिल्म की शूट के दौरान हो रही गतिविधियों को अपनी डायरी में लिखते थे। उन्होंने बताया था कि एक दिन शूटिंग लोकेशन पर पहुंचने से 10 मिनट पहले ब्लास्ट हुआ था, जिसके बाद सिक्योरिटी ने रास्ता बदल लिया था।

    तालिबान से मौत की धमकियां

    तालिबान से मौत की धमकियां

    कबीर खान ने फिल्म के मेकिंग वीडियो में बताया था कि उनकी फिल्म की कास्ट और क्रू को तालिबान से मौत की धमकियां मिली थी।उन्होंने बताया तालिबानी बसों और ट्रकों में ट्रेवल कर उनपर नजर रख रहे थे। कबीर संग पूरी फिल्म की कास्ट और क्रू की सिक्योरिटी को बढ़ाया गया था और 60 कमांडो शूटिंग के दौरान उनके साथ रहते थे।

    मोबाइल फोन से ज्यादा बंदूकें हैं

    मोबाइल फोन से ज्यादा बंदूकें हैं

    फिल्म काबुल एक्सप्रेस की शूटिंग का सबसे खतरनाक हिस्सा तब था जब कबीर खान ने शूटिंग शुरू करने के लिए आवाज लगाई और उनके पास से बंदूक की एक गोली सन्न से निकली। तब शूटिंग को एक घंटे के लिए रोक दिया गया था।

    अरशद वारसी ने अफगानिस्तान में शूटिंग करने को लेकर कहा था, "वहां मोबाइल फोन से ज्यादा बंदूकें हैं। लेकिन अगर मैं इस फिल्म से जुड़ा ना होता तो मुझे मलाल होता।"

    English summary
    Director Kabir Khan recalls getting death threats from Taliban while shooting Kabul Express in Afghanistan with John Abraham and Arshad Warsi.
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