आज के संगीत में तो फूहड़ता भर गई है: रविंद्र जैन
बड़जात्या प्रोडक्शन के फेवरेट और रामानंद सागर के साथ इतिहास रचने वाले पाश्र्व गायक एवं संगीतकार रवींद्र जैन ने अपनी जिंदगी में असंभव को संभव कर दिखाया है। अगर आप कुछ करना चाहते हैं तो आपको कोई रोक नहीं सकता है, इस बात को पूरी तरह से चरितार्थ करने वाले रविंद्र जैन ने कहा कि आज का संगीत तो शार्ट-कट हो गया है। पिछले पांच-दस वर्षो से संगीत के क्षेत्र में काफी परिवर्तन आया है लेकिन हमेशा कि तरह इस परिवर्तन से फायदा भी है और नुकसान भी।

रविंद्र जैन ने कहा कि संगीत एक साधना है जिसे बड़ी मेहनत से सीखा जाता है लेकिन आजकल लोग इसमें भी शॉर्टकट अपना लिए हैं जिसकी वजह से आपको कुछ समय के लिए दौलत और शौहरत हासिल हो सकती है लेकिन यह चमक थोड़े ही देर के लिए है।
आज के संगीत में तो फूहड़ता भर गई है, आज तो लोग शार्ट-कट अपनाते हैं
जबकि संगीत तो साधक को अपने आप पर भरोसा और धैर्य रखना सीखाता है लेकिन यह बात आजकल की पीढ़ी नहीं समझती है क्योंकि उसके पास धैर्य नहीं है। हालांकि रविंद्र जैन ने क्लीयर किया कि सब लोग आज के एक जैसे हैं, यह कहना गलत होगा।
संगीत में चाहिए धैर्य और साधना : रवींद्र जैन
पचास से अधिक फिल्मों और धारावाहिक 'रामायण' के लिए संगीत एवं स्वर देने वाले रवींद्र जैन ने कहा कि आजकल फिल्मी गानों में अश्लील शब्दों का बहुत प्रयोग हो रहा है। इस पर कुछ लोगों का कहना है कि निमार्ताओं का दबाव उन पर रहता है। वे उसी तरह के गीत गाने के लिए कहते हैं। मगर ये ठीक नहीं है।
मन की आंखों से सबकुछ देखने वाले संगीतकार ने कहा कि उन्होंने 1971 में संगीत के क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन उन्होंने कभी अपने काम के साथ समझौता नहीं किया। उनका पिछली सुपरहिट फिल्म बड़जात्या की विवाह थी, जिसके सारे गाने सुपरहिट थे और देसी धुनों पर आधारित थे।
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