विक्रांत रोणा एक आगामी बॉलीवुड फैंटसी एक्शन-एडवेंचर ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन अनूप भंडारी द्वारा किया गया है। फिल्म में सुदीप किच्चा , निरुप भंडारी , नीता अशोक और जैकलीन फर्नांडीज मुख्य भूमिका में आयें हैं। ये फिल्म हिंदी के साथ 14 भाषाओँ में रिलीज़ की गयी है। फिल्म 28 जुलाई को दुनियाभर में रिलीज की गयी है। कहानी कहानी एक उष्णकटिबंधीय वर्षावन के घने जंगल के बीच में एक सुदूर गाँव की है, जो लगभग आधी सदी पहले, विचित्र तरीके से हत्याओं के घटनाओं से गुजर रहा होता है और गांव वालों के अनुसार, ये हत्याएं ब्रह्मराक्षस द्वारा की जा रही होती हैं । यह कहानी लगभग कहानी 28 सालों के अंतराल की है। इसी बीच एक नए पुलिस अफसर 'विक्रम रोणा' के आता है। इस नए पुलिस के आने से ये घटनायें धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगती हैं। क्या विक्रांत इस इस बरसों से अनसुलझे रहस्यमय खेल को सुलझा पाने में कामयाब होगा, यही इस फिल्म की कहानी है। फिल्म के कास्ट और क्रू प्रोडक्शन इस फिल्म की शूटिंग 1 मार्च 2020 को शुरूकी गयी थी, इस फिल्म को अभिनेता सुदीप ने फिल्म, कोटिगोब्बा 3 और फैंटम के साथ फिल्माना शुरू किया था। जब फिल्म के दूसरे शेड्यूल की तैयारी कर रही थी तभी वह दुनियाभर में फैली महामारी से बुरी तरह प्रभावित हो गयी और फिल्म का काम बंद हो गया। 13 जून 2020 को, क्रू ने घोषणा की कि वे जुलाई में शूटिंग फिर से शुरू करेंगे और 16 जुलाई 2020 को, उन्होंने हैदराबाद के अन्नपूर्णा स्टूडियो में विशाल घने जंगल के सेट का निर्माण करके महामारी के बीच अनुशासन का पालन करते हुए, अपना काम फिर से शुरू किया। इस फिल्म का अधिकांश फिल्मांकन अन्नपूर्णा स्टूडियो और रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद में किया गया है और अन्य शूटिंग मालशेज घाट, महाबलेश्वर और केरल जैसी जगहों में की गई है। देखें फिल्म की तस्वीरें और पोस्टर बजट इस फिल्म को शुरू में 15 करोड़ के बजट पर बनाने की योजना थी, हालांकि बाद में फिल्म के पैमाने के देखते हुए इसका बजट बढ़ाकर 95 करोड़ कर दिया गया।
इस फंतासी फिल्म को अगर ढंग से बनाया गया होता तो ये बच्चों और पारिवारिक दर्शकों के लिए एक कमाल की एडवेंचर फिल्म साबित हो सकती थी लेकिन सुदीप या कहें कि किच्चा सुदीप को चमकाने के चक्कर में फिल्म का असली रस बेस्वाद हो गया है।
फिल्मीबीट हिंदी
विक्रांत रोणा एक अच्छे नोट पर शुरु होती है, इसका क्लाईमैक्स काफी दिलचस्प है.. लेकिन लगभग ढ़ाई घंटे लंबी यह कहानी बीच में काफी खिंची हुई लगती है। साथ ही कुछ व्यर्थ के किरदार और अनसुलझे दृश्य कहानी के प्रभाव को काफी कम कर देते हैं। किच्चा सुदीप के फैन हैं तो ये फिल्म बड़ी स्क्रीन पर जरूर देख सकते हैं।