विक्रांत रोणा फिल्म रिव्यू: किच्चा सुदीप के स्वैग और दिलचस्प क्लाइमैक्स पर टिकी धीमी एक्शन थ्रिलर
निर्देशक- अनूप भंडारी
कलाकार- किच्चा सुदीप, निरूप भंडारी, नीता अशोक, जैकलीन फर्नाडीज़
"घुंघरू की झंकार से खून की होली शुरु होगी, ऐसा गांव वाले बोलते हैं सर", घने जंगल के बीच बसे एक गांव में पुलिस अफसर के तौर पर आए विक्रांत रोणा (किच्चा सुदीप) को पुलिस चौकी का हवलदार आगाह करता है। कहानी 28 सालों के अंतराल पर गुजरती है। जब घने जंगल के बीच में एक दूरदराज गांव में विचित्र तरीके से हत्याएं होने लगती हैं। गांव वालों के अनुसार, ये हत्याएं ब्रह्मराक्षस द्वारा की जा रही हैं। इसी समय गांव में पुलिस अफसर विक्रांत रोणा का आगमन होता है। जैसे जैसे उसकी जांच आगे बढ़ती है, एक रहस्यमय खेल सामने आने लगता है, जहां गांव में हर कोई संभावित शिकार होता है और हर कोई संदिग्ध होता है।

निर्देशक पहली फ्रेम से ही फिल्म का मूड सेट कर देते हैं। यहां सस्पेंस है, थ्रिलर है, एक्शन और इमोशन भी है। फिल्म में कुछ दृश्य ऐसे भी आते हैं, जब डर से आप आंखें मूंद लें। खासकर कहानी को जिस तरह एक डार्क सेटअप में फिल्माया गया है, वह दिलचस्प है। फिल्म का विषय तो अच्छा है, लेकिन फिर भी फिल्म में कुछ बड़ी कमियां हैं, जिसे आप नजरअंदाज नहीं कर सकते.. जैसे कि कहानी की गति और दिशा। फर्स्ट हॉफ में कहानी इतनी धीमी चलती है कि आपका ध्यान फिल्म से छूटने लगता है। फिल्म कई दिशा में भागती दिखती है। दूसरे हॉफ में कहानी थोड़ी गति पकड़ती है और अंत के 30 मिनट में कुछ दिलचस्प होती है। यह एक बच्चों की फतांसी दुनिया से शुरू होती है और फिर एक सुपरनैचुरल-हॉरर और फिर एक थ्रिलर बन जाती है। हालांकि कई किरदारों और दृश्यों को बिना सुलझाये छोड़ दिया गया है, जो निराश करता है।
तकनीकी पक्ष में फिल्म अच्छी है। यह थ्रीडी में रिलीज की गई है और विक्रांत रोणा की दुनिया बड़े पर्दे पर काफी आकर्षित दिखती है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है, जिसे किया है विलियम डेविड ने। एक्शन सीन्स को अच्छा कोरियोग्राफ किया गया है। लेकिन एडिटिंग में फिल्म को थोड़ा और कसा जा सकता था। संस्पेंस थ्रिलर फिल्मों की लंबाई कहानी के प्रभाव को कई बार कम कर देती है। विक्रांत रोणा के साथ भी ऐसा ही होता है। जब तक फिल्म अपनी गति में आए.. काफी देर हो चुकी होती है।
अभिनय की बात करें तो विक्रांत रोणा के किरदार में किच्चा सुदीप ने अच्छा काम किया है। उनकी एक स्टाइल है, जिसे उन्होंने शुरु से अंत तक बनाकर रखा है। एक्शन हो या इमोशनल सीन्स सुदीप अपने किरदार में अच्छे जमे हैं। इनके अलावा मुख्य किरदारों में हैं निरूप भंडारी और नीता अशोक, जिन्होंने अच्छा काम किया है। निरूप के किरदार को काफी अच्छा आर्क दिया गया है, जिसके साथ उन्होंने न्याय किया है। हालांकि जैकलीन फिल्म में क्या और क्यों कर रही हैं.. यह सवाल आपके भी मन में जरूर उठेगा! फिल्म से यदि उनके किरदार को निकाल भी दिया जाए तो कहानी में कोई फर्क नहीं पड़ता। खैर, वो जितनी देर पर्दे पर रही हैं, उनकी एनर्जी अच्छी लगी है।
कुल मिलाकर, विक्रांत रोणा एक अच्छे नोट पर शुरु होती है, इसका क्लाईमैक्स काफी दिलचस्प है.. लेकिन लगभग ढ़ाई घंटे लंबी यह कहानी बीच में काफी खिंची हुई लगती है। साथ ही कुछ व्यर्थ के किरदार और अनसुलझे दृश्य कहानी के प्रभाव को काफी कम कर देते हैं। किच्चा सुदीप के फैन हैं तो ये फिल्म बड़ी स्क्रीन पर जरूर देख सकते हैं। विक्रांत रोणा को फिल्मीबीट की ओर से 2.5 स्टार।


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