दृश्यम 2 एक क्राइम थ्रिलर ड्रामा बॉलीवुड फिल्म है, जिसका निर्देशन अभिषेक पाठक द्वारा किया गया है। यह फिल्म साल 2015 में आयी फिल्म दृश्यम की दूसरी किश्त है। फिल्म में एक बार फिर अजय देवगन लीड रोल में नजर आयें हैं। अजय के अलावा फिल्म में तब्बू , श्रेया सरन और इशिता दत्ता भी नजर आयीं हैं। इसके अलावा फिल्म में इस बार अक्षय खन्ना और रजत कपूर भी दिखाई दिए। आपको बता दें यह फिल्म मलयालम फिल्म जोकि सामान नाम की थी, उसकी हिंदी रीमेक हैं। यह फिल्म 18 नवंबर 2022 को रिलीज हुई है। देखें फिल्म की तस्वीरें और पोस्टर्स बता दें के इस फिल्म की शूटिंग गोवा, मुंबई और हैदराबाद में हुई है। कहानी फिल्म की कहानी वहीँ से शुरू होती है, जहाँ से इस फिल्म के पहले पार्ट को खत्म किया गया था। विजय सलगांवकर (अजय देवगन) की बेटी के हाथों गलती से आईजी मीरा देशमुख (तब्बू) के बेटे की हत्या हो जाती है और वह अपने परिवार को पुलिस से बचाने के लिए विजय उस लड़के की लाश को दफना देता है। पुलिस हर तरह से संभव प्रयास करती है, लेकिन उन्हें वह लाश नहीं मिलती है.. और यहीं 'दृश्यम' खत्म हुई थी। दृश्यम 2 की कहानी में पहली फिल्म में हुई घटना के 7 साल हो चुके हैं और विजय सलगांवकर का परिवार भी सब कुछ भूलकर जीने की कोशिश में लगा हुआ है। विजय अब एक फिल्म थियेटर का मालिक भी बन चूका है और अपनी लिखी एक कहानी पर फिल्म भी बनाना चाहता है। उसने स्क्रीनप्ले भी लिख लिया है, लेकिन क्लाईमैक्स से वह खुश नहीं है और इस पर वह और मेहनत कर रहा होता है, ये फिल्म सिर्फ विजय का पैशन है या इसके पीछे उसकी कोई और मंशा है.. इसका खुलासा एक कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट लाता है। बहरहाल, वह एक लेखक मुराद अली (सौरभ शुक्ला) के साथ फिल्म पर काम कर ही रहा होता है कि पुलिस सात साल पुराने केस को फिर से री-ओपन करती है। एक बार फिर विजय सलगांवकर, अपनी पत्नी नंदिनी (श्रिया सरन) और बेटियों अंजू (इशिता दत्ता) और अनु (मृणाल) के साथ पुलिस स्टेशन में पकड़ कर लाया जाता है। इस बार पुलिस के पास गवाह और सबूत भी है और केस की जिम्मेदारी उठाई है नए आईजी तरूण अहलावत (अक्षय खन्ना) ने। वह मीरा (तब्बू) के साथ मिलकर विजय को पूरे परिवार सहित जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहता है। लेकिन क्या वो अपने मकसद में कामयाब हो पाते हैं? या एक बार फिर विजय अपनी सूझबूझ के साथ अपने परिवार को कानून की गिरफ्त से बचा लेगा यही इस फिल्म की कहानी में दिखाया गया है।
सीक्वल बनाने के लिए एक मजबूत स्क्रीनप्ले का होना काफी जरूरी होता है.. और यहां मेकर्स ने निराश नहीं किया है।
अमर उजाला
फिल्म का क्लाइमेक्स ही फिल्म की असल जान है और इसका पहले से पता होने के बाद भी इसका फिर से आनंद लेना कुछ कुछ वैसा ही जैसे वनीला आइसक्रीम का स्वाद पता होने के बाद भी उसे बार बार खाने के लिए मन का ललचाते रहना।