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    'कम लेकिन अच्छा काम करना चाहता हूँ'

    By Staff
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    'कम लेकिन अच्छा काम करना चाहता हूँ'

    फारुक़ शेख का नाम आते ही आपके सामने ऐसे व्यक्ति की तस्वीर उभरती है जो बेहद शरीफ़ हैं और बिल्कुल आम आदमी की छवि के करीब है.

    सत्तर के दशक में उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया जिनमें एक आम आदमी की कहानी रुपहले पर्दे पर उभर कर आई.चश्मे बददूर, नूरी, उमराव जान जैसी कई चर्चित फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाने वाले फारुक़ शेख अब अपनी नई फ़िल्म एक्सीडेंट ऑन हिल रोड के साथ एक बार फिर दर्शकों के सामने हाज़िर हैं.

    फारुक़ साहब अपनी संवाद शैली में बहुत माहिर हैं. नई फिल्म में उन्हें क्या दिलचस्प लगा ये पूछे जाने पर उनका जवाब था,“देखिए एक तो ये कि इस फिल्म के अंत में निर्देशक दर्शकों से कुछ कहना चाहता है और मेरे लिए ये बहुत ज़रुरी है."

    फारुक शेख़ की ये नई फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है. वो खुद बताते हैं कि यूएस में एक ऐसी घटना हुई थी. फारुक़ शेख और स्टंट सीन,बात कुछ हज़म होने जैसी नहीं है.

    जी हां,वैसे आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस फ़िल्म में उन्होंने कुछ खतरनाक स्टंट सीन भी किए हैं. वैसे जब इस बारे में चर्चा निकली तो उन्होंने बड़ी ही चतुराई से जवाब देते हुए इसका सारा श्रेय फिल्म की यूनिट को दे डाला. उन्होंने कहा, “देखिए मैने ऐसा कुछ नहीं किया है जो आसमान में छेद करने जैसा हो. हां ,इतना ज़रुर है कि अगर फिल्म की यूनिट के लोग अच्छे हों तो सब कुछ आसानी से हो जाता है."

    'रोल दिलचस्प हो'

    एक्सीडेंट ऑन हिल रोड एक रात की कहानी है..फिल्म में फारुक शेख़ के अलावा सेलिना जेटली और गुलाल (अनुराग कश्यप) से चर्चा में आए अभिमन्यू सिंह मुख्य भूमिकाओं में हैं.

    कैसा अनुभव रहा इस फ़िल्म को करने का तो वो जवाब देते हैं, “बुनियादी तौर पर कोई भी कलाकार तीन चीज़ें देखता है जैसे स्क्रिप्ट क्या है,उसमें उसका किरदार क्या है और उसको बनाने वाला निर्देशक कौन है,और अगर ये तीन बातें आपको अच्छी लगती हैं तो फिर चाहे वो किसी भी तरह की फिल्म हो उसे करने का अनुभव अच्छा ही रहता है."

    अपनी इस दूसरी पारी में आखिर किसी भी फिल्म या किरदार को चुनने का क्या मापदंड है फारुक शेख का. वो जवाब देते हुए कहते हैं, “एक तो ये कि मैं काम काम करता हूं क्योंकि मैं काफी सुस्त किस्म का आदमी हूं और उसी आधार पर फिल्में चुनता हूं जो अभी मैने आपसे कहीं हैं."

    तो आखिर कोई ऐसा भी किरदार है जिसे वो रुपहले पर्दे पर निभाने की तमन्ना रखते हों.फारुक शेख़ जवाब देते हैं, “देखिए अब ऐसी कोई तमन्ना नहीं है कि मैं फलां किरदार निभा लूं ,हां ये ज़रुर है कि किरदार दिलचस्प होना चाहिए. उस फिल्म में कोई ऐसी बात नहीं होनी चाहिए कि मुझे लगे कि इसे पर्दे पर दिखाना सही नहीं होगा या भोंडा लगेगा और साथ ही फ़िल्म बनाने वाला भी सही होना चाहिए."

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