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    केबीसी 4: राहत की जीत कहीं फिक्सिंग तो नहीं

    By Jaya Nigam
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    झारखंड के गिरडीह कस्बे की सिलाईवाली राहत तस्लीम का केबीसी 4 की पहली महिला करोड़पति बनना अब कई विवादों का जन्म दे रहा है। राहत दो बच्चों की मम्मी और निम्न मध्यम वर्गीय महिला है। वह अपने घर पर एक सिलाई सेंटर चलाती हैं और महीने मे 3 हजार के लगभग कमाती हैं। उनके पति भी 6 हजार प्रति माह की तनख्वाह पर एक कंपनी में काम करते हैं।

    केबीसी में राहत की जीत पर विवाद इसलिए उठ रहा है क्योंकि राहत से पूछे गए सवाल इतने टफ थे जिनका सही जवाब देने के लिए राहत द्वारा पाई गई तालीम अपर्याप्त नजर आती है। हालांकि राहत का कहना है कि वह पढ़ने-लिखने में बेहद रुचि रखती हैं। राहत की मम्मी और दादी वगैरह का भी यही कहना है कि राहत पढ़ने में होनहार थीं और डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन आर्थिक हालात इतने दयनीय थे कि घरवालों ने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। राहत की शादी बहुत उम्र में कर दी गई थी।

    राहत की जीत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कहीं अन्य रियल्टी शो की तरह ये गेम शो भी फिक्स तो नहीं था। मतलब कहीं कौन बनेगा करोड़पति ने निम्न वर्ग और मुसलमान महिला को जिता कर ये दिखाने की कोशिश तो नहीं कि की इस तरह के गेम शो में ऐसे लोगों को करड़पति बनाने की भी क्षमता है।
    जो भी हो, सवाल तो ये है कि ये सारे सवाल राहत की जीत पर ही क्यों उठ रहे हैं। ये सवाल तो तब भी उठने चाहिए थे जब उच्च मध्यमवर्गीय लोगों ने ये शो जती था। आप इस विषय पर क्या सोचते हैं, हमें जरूर बताएं। नीचे बने कमेंट बॉक्स में अपनी प्रति क्रिया दर्ज करें।

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