ये फासले: इस फिल्म से फासला बनाए रखिए
कलाकार: अनुपम खेर, टीना देसाई
निर्देशक: योगेश मित्तल
संगीत: दीपक पंडित
रेटिंग: 2/5
विश्व कप क्रिकेट और बोर्ड की परीक्षाओं के चलते इस महीने और कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिलीज नहीं होनी वाली। इस शुक्रवार रिलीज हुई है योगेश मित्तल की 'ये फासले'। ये योगेश की पहली फिल्म है। बतौर निर्देशक पहली फिल्म के लिए योगेश ने विषय एक स्सपेंस थ्रिलर चुना मगर कहानी के साथ न्याय नहीं कर पाए। फिल्म एक पिता-पुत्री के रिश्तों की जटिलताओं को दिखती है।
कहानी: अरुणिमा (टीना देसाई) विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिता देवेंद्र देवीलाल दुआ (अनुपम खेर) के पास वापस लौटती है। पिता बेटी का रिश्ता बहुत मधुर है। पिता अपनी बेटी अरुणिमा को कभी ये महसूस नहीं होने देता कि उसकी मां नहीं है और अपनी बेटी की खुशियों की खातिर दूरी शादी भी नहीं करता।
सालों से पिता से दूर रहने के बाद बेटी जब घर लौटती है तो उसे अपनी मां कि कमी बहुत ज्यादा खली। अरुणिमा को सपने में अक्सर अपनी मां दिखाई पड़ती है। अभी तक अरुणिमा को ये पता था कि जब वो बहुत छोटी थी तो एक सड़क हादसे में उसकी मां की मौत हो गई थी। मगर जब धीरे धीरे कहानी की तहें खुलती हैं अरुणिमा को अपनी मां की मौत को लेकर शक होने लगता है।
दरअसल अरुणिमा की मां उसके नाम अपनी वसीयत करके जाती है। पर अरुणिमा को ये समझ नहीं आता है अगर उसकी मां की मौत सड़क हादसे में हुई तो उन्होंने पहले से अपनी बेटी के नाम वसीयत क्यों कर दी थी? और 28 साल की उम्र में ही उसकी मां को अपनी बेटी के नाम वसीयत करने की क्या जरुरत थी। इस दौरान अरुणिमा ऐसे कई लोगों से मिलती है जो उसे उसके माता पिता की शादी के बार में बताते हैं।
अरुणिमा को पता चलता है कि उसके माता पिता की शादी काफी मुश्किलों से हुई ती क्योंकि उसकी मां शादी खानदान से थी और पिता जाट थे। अपने मन की शंकाएं दूर करने के लिए अरुणिमा कई बार अपने पिता से अपनी मां की मौत के बारे में पूछती है मगर उसे हर बार अपने पिता से बेरुखी मिलती है। फिर अरुणिमा के सामने कुछ ऐसे राज खुलते हैं जिससे उसकी मां की मौत के लिए उसके पिता सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
अरुणिमा अपनी मां की मौत के लिए अपने पिता को जिम्मेदार मानती है और अपने पिता को अदालत में घसीटती है। अगर आपने देखना चाहते हैं कि आगे क्या होता तो देखिए ये फासले। अनुपम खेर हमेशा की तरह दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं। अरुणिमा के रोल में टीना देसाई कुछ खास नहीं कर पाई। फिल्म एक अच्छी सस्पेंस थ्रिलर बन सकती थी मगर कहानी पर ज्यादा मेहनत नहीं की गई। गीत संगीत औसत दर्जे का है।


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