हवा हवाई फिल्म रिव्यू- सपने भी सच होते हैं, कोशिश दिल से होनी चाहिए
स्टार- 4
निर्माता-
निर्देशक- अमोल गुप्ते
कलाकार- पार्थो गुप्ते, साकिब सलीम
संगीत- हितेश सोनिक
"कौन है जो सपने नहीं देखता, सपनों को पूरा नहीं करना चाहता, कोई तो ऐसा सपना होगा तुम लोगों का।" कितना इत्तेफाक रखते हैं आप इस बात से। अगर आप भी सपने देखते हैं और उन्हें सच करने की इच्छा में आपकी रातों की नींदे उड़ जाती हैं तो अमोल गुप्ते की इस हफ्ते रिलीज फिल्म हवा हवाई आपके लिए एक बेहतरीन मौका है एक ऐसा अनुभव लेने के लिए जो कि आपके सपने देखने और उन्हें सच करने की उम्मीद देगा। जो आपको महसूस कराएगा कि सपने देखिये भी और उन्हें पूरा करने की कोशिश भी करिये क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
हवा हवाई फिल्म की कहानी शुरु होती है अर्जुन (पार्थो गुप्ता) से जो कि एक दुकान में चाय बांटने वाले का काम करता है। इस काम से उसे जो भी पैसे मिलते हैं वो उनसे अपनी मां और अपने भाई की देखभाल करता है। इस काम के दौरान ही अर्जुन के स्केटिंग क्लासेस के बारे में पता चलता है। अर्जुन जब भी बच्चों के पैरों में स्केट्स बांधकर फिसलते हुए देखता है वो काफी उत्साहित हो उठता है और धीरे धीरे उसके मन में भी स्केटिंग सीखने की चाह उत्पन्न होती है।वो अनिकेत (साकिब सलीम) के पास जाता है जो कि बच्चों को स्केट सिखाते हैं। अर्जुन के उत्साह और उसके सपने को देखकर अनिकेत अर्जुन को स्केट कॉंपटीशन का चैंपियन बनाने का फैसला करते हैं।
लेकिन अनिकेत जो सोचते हैं वैसा नहीं होता। कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं कि ये सपना टूटता सा नज़र आता है। आखिर ऐसा क्या होता है ये जानने के लिए आपको हवा हवाई देखने अपने नजदीकी सिनेमाहॉल जाना होगा।


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