For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    भंसाली का मास्टरपीस है 'गुजारिश'

    By जया निगम
    |

    Guzaarish Poster
    निर्देशक - संजय लीला भंसाली
    म्यूजिक - संजय लीला भंसाली
    कलाकार - रितिक रोशन, ऐश्वर्या राय, मोनिकांगना दत्ता, शेरनाज, आदित्य राय कपूर

    देखें - गुजारिश की स्पेशल स्क्रीनिंग

    समीक्षा - संजय लीला भंसाली ने 'गुजारिश' में अपनी क्षमता की नई बुलंदियों को छुआ है। गुजारिश में उनका काम देखकर उनके फैंस भी चौंक जाएंगे। इससे पहले भी भंसाली अपनी फिल्मों में एक जादुई टच देने के लिए जाने जाते हैं। 'गुजारिश' भी दिल को ठू लेने वाली ऐसी ही फिल्म है।

    रितिक रोशन और ऐश्वर्या राय के संवेदनशील अभिनय से सजी और खुद भंसाली के गीतों में ढली यह फिल्म भारतीय परिवेश पर नहीं बुनी गई है। एक हद तक इसका विषय भी विदेशी महसूस होता है। इसके बावजूद फिल्म की संवेदनशीलता और कलाकारों के अभिनय की गहराई आपके दिल में अपनी जगह बना लेगी।

    गुजारिश की गैलरी देखें

    गुजारिश में रितिक रोशन एक जादूगर बने हैं जिनका एक जादू गलत होने से उनके शरीर के निचले हिस्से को लकवा मार जाता है। लेकिन रितिक इतनी गंभीर बीमारी का शिकार होने के बावजूद भी ऐसे जादुई व्यक्तित्व के मालिक हैं जिसका कोई भी फैन हो जाए। उनकी जीवनी शक्ति और संघर्ष का रहस्य ऐश्वर्या का साथ है।

    ऐश्वर्या इस फिल्म में रितिक की नर्स की भूमिका में हैं। नर्स और प्रमिका का ये किरदार ऐश्वर्या के अब तक की गई भूमिकाओं में सबसे उम्दा साबित हो सकता है। ऐश्वर्या खूबसूरत तो हैं ही और उनका हाव-भाव सब कुछ फिल्म की आत्मा के हिसाब से गढ़ा गया है। ऐश्वर्या ने भी भंसाली की फिल्म की मांग के मुताबिक अपने अभिनय में इन खूबियों को पूरी तरह आत्मसात किया है। फलस्वरूप, उनका और रितिक का ताल-मेल इस फिल्म की विशेषता है।

    गुजारिश की खबरें पढ़ें

    फिल्म बीमारी पर आधारित जरूर है उसके बाद भी इस फिल्म में संवेदनशीलता आपको बोर नहीं करेगी बल्कि आपके अंदर उतर जाएगी। भंसाली ने इस फिल्म में म्यूजिक दिया है। फिल्म का म्यूजिक सिचुएशनल है इसलिए उतना पॉपुलर नहीं है लेकिन फिल्म के एक-एक सीन के साथ म्यूजिक की पूरी केमिस्ट्री है।

    भंसाली की 'मास्टरपीस' साबित होने वाली है 'गुजारिश'। वैसे 'गुजारिश' रितिक द्वारा मांगी गई इच्छामृत्यु की गुजाऱिश है लेकिन इस बारे में ज्यादा बता कर फिल्म का रोमांच खत्म करना सही नहीं है। इसलिए ये फिल्म देख कर आपको खुद तय करना होगा कि भंसाली की कलात्मकता कहीं फिल्म के विषय पर हावी तो नहीं हुई। मेरे हिसाब से भंसाली ने फिल्म के कला पक्ष और भाव पक्ष को ज्यादा बेहतर ढंग से उकेरा है।

    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X