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समीक्षा : भीगे एहसासों की कहानी है 'धोबी घाट'

By: अंकुर शर्मा
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dhobi-ghaat
बैनर: आमिर खान प्रोडक्शन्स
निर्माता: आमिर खान, किरण राव
निर्देशक: किरण राव
कलाकार: प्रतीक, मोनिका डोगरा, कीर्ति मल्होत्रा, आमिर खान

रेटिंग : 1.5/5

समीक्षा : सिल्वर स्क्रीन पर आज किरण राव निर्देशित फिल्म धोबी घाट प्रदर्शित हो गई है। जब फिल्म आमिर खान की हो तो उससे अपेक्षाएं बहुत ज्यादा होती है। आमिर प्रोडक्शन की पीपली लाइव की सफलता ने उम्मीद को और दूना कर दिया है। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है धोबी घाट आमिर की पत्नी किरण राव की फिल्म है , जिसमें आमिर ने एक किरदार निभाया है, कहना गलत ना होगा कि बखूबी निभाया है।

फिल्म में नये चेहरे हैं, जिनसे अभिनय करवाने की पूरी कोशिश की है किरण ने, हालांकि कि कहीं वो सफल है तो कही नाकामी हाथ लगी है। धोबी घाट की कहानी चार युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है जो अलग-अलग पृष्ठभूमि से हैं। इन सभी की दुनिया आपस में टकराती है, या यूं कहें कि किस्मत इन सभी को मिलाती है, तो उसके बाद सब कुछ हमेशा के लिए बदल जाता है।

इस फिल्म में इंसान को प्यार भी मिलता है तो उसे दर्द भी नसीब होता है, कहीं फटकार मिलती है तो कही सहारा भी। बस इंसानी जज्बात और भावनाओं की कहानी है धोबी घाट जिसे संजीदा बनाने की भरपूर कोशिश की है किरण ने। प्रतीक बब्बर ने साबित कर दिया है कि वो एक सशक्त कलाकार स्मिता पाटिल के पुत्र हैं। उन्होंने अपना किरदार बखूबी निभाया है।

मोनिका डोगरा औसत ही है, कीर्ति मल्होत्रा कोई उम्मीद नहीं जताती है जबकि आमिर हर बार की तरह बेहतरीन हैं। फिल्म में रियल लाइफ लोकेशन का इस्तेमाल हुआ है। फिल्म का संगीत बाबेल और ब्रोकबैक माउंटेन के लिए ऑस्कर जीत चुके अर्जेंटीना के संगीतकार गुस्तावो संताओला ने दिया है।

कहना गलत नहीं होगा कि धोबी-घाट एक मास फिल्म नहीं बल्कि एक क्लास फिल्म हैं। जाहिर है मु्न्नी और शीला को पसंद करने वालों को धोबी घाट नहीं सुहायेगी लेकिन इतना जरूर है कि हमेशा पुरस्कारों से वंचित रहने वाली आमिर खान की झोली इस फिल्म के बाद बहुत सारे अवार्डों से भर जायेगी।

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कहानी :  धोबी घाट में चारों युवाओं की कहानी है। फिल्म शुरू होती है एक ऐसे सीन से जहां टैक्सी के अंदर से एक वी‍डियो कैमरे के सहारे मुंबई शहर को शूट किया जा रहा है । कैमरे के पीछे है यास्मिन (कीर्ति मल्होत्रा), टैक्सी ड्राइवर से बात करते- करते मालूम चलता है कि वो भी उसी की तरह उत्तर प्रदेश का है और दोनों के शहर काफी करीब हैं।

शाई (मोनिका डोगरा) मुंबई के एक बैंक में काम करती है, उसकी मुलाकात अरुण (आमिर खान) से होती है जो एक पेंटर है, अरुण और शाई एक रात साथ गुजारते हैं. अरुण इस बारे में कुछ नहीं बोलना चाहता लेकिन शाई इस घटना को भूल नहीं पाती। अगली सुबह दोनों की राहें जुदा हो जाती हैं इस बात के साथ कि वे अब कभी नहीं मिलेंगे।

मुन्ना (प्रतीक बब्बर) धोबी है, जो शाई के घर भी कपड़े लेने जाता है, वो फिल्म अभिनेता बनना चाहता है, जब उसे पता चलता है कि शाई को फोटोग्राफी का शौक है तो वह एक शर्त पर 'रियल" मुंबई दिखाने उसे ले जाता है कि वह उसका पोर्टफोलियो तैयार करेगी। कैमरे की आंख से शाई को मुंबई एक अलग अंदाज में देखती है. अब वो मुन्ना को दोस्त मानने लगती है और मुन्ना उसे दिल दे बैठता है। इसी बीच अरुण एक नए अपार्टमेंट में शिफ्ट हो जाता है। लेकिन यहां एक ऐसा रहस्य सामने आ जाता जो उसके दिल को छू लेता है।

धोबी घाट फिल्म में चार युवाओं की उत्सुकता, अकेलेपन, अनुभव , दर्द और प्यार के जरिये मुबंई शहर को दर्शाया गया है।

English summary
Dhobi Ghat is an imposing and vibrant cinematic portrait, appending itself to the new wave of independent Indian cinema which I am extremely pleased to applaud. Kiran Rao's film is like fresh air, as elusive in Mumbai's leaky chawls as in its smoky drawing room.
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