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    दंगल गर्ल ज़ायरा वसीम ने छोड़ा बॉलीवुड - कहा, अल्लाह ने मुझे सही रास्ता दिखा दिया है

    By Staff
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    बॉलीवुड के लिए आज का दिन काफी चौंकाने वाला था। दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार एक्ट्रेस ज़ायरा वसीम ने एक पोस्ट लिखकर कहा कि वो इस इंडस्ट्री में पांच साल काम कर चुकी हैं लेकिन अब वो यहां से अलविदा लेना चाहती हैं। ज़ायरा ने बॉलीवुड छोड़ने का एलान करते हुए साथ ही यह भी लिखा कि यहां काम करने से उनका सुकून छिन रहा था।

    ज़ायरा ने फेसबुक पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट डाला और अपने दिल की बात फैन्स के सामने रखी। एक तरफ ज़ायरा ने कई इंटरव्यू में खुद कहा कि ये पोस्ट उन्होंने लिखा है वहीं उनके मैनेजर ने यह कहकर लोगों को भ्रम में डाला कि उनका अकाउंट हैक हो चुका है और ये पोस्ट ज़ायरा ने नहीं लिखा है। पढ़िए उनका पूरा पोस्ट -

    5 साल का सफर

    5 साल का सफर

    5 साल पहले मैंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने मेरी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। मैंने बॉलीवुड में कदम रखा। और इस फैसले का साथ ही मेरे लिए शोहरत और कामयाबी के दरवाज़े खुल गए। मुझे हर जगह तवज्जो दी जाने लगी। और मुझे युवाओं का रोल मॉडल कहा जाने लगा। लेकिन मैं ये सब बनने कभी निकली ही नहीं थी। खासतौर से कामयाबी और नाकामयाबी के मायने मेरे लिए काफी अलग थे और ये सब कुछ अभी समझने की कोशिश में ही थी।

    खुशी नहीं मिलती है

    खुशी नहीं मिलती है

    आज जब मैं बॉलीवुड में अपने 5 साल पूरे करती हूं, मैं ये कहना चाहती हूं कि मैं अपनी इस नई पहचान से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं। यानि कि जो मेरा काम है मैं उससे राबता नहीं रखती हूं। मैं काफी समय से कुछ और बनने की कोशिश कर रही हूं और मैं वो नहीं हूं। जब मैंने काम शुरू किया तो एक अलग ज़िंदगी मेरे सामने आई और मुझे लगा कि मैं इसे अपना लूंगी और खुश रहूंगी। लेकिन मैं इस जगह के लिए नहीं बनी हूं।

    ईमान पर असर

    ईमान पर असर

    इस जगह मुझे काफी प्यार, अपनापन, सहयोग और तारीफें मिलीं लेकिन मैं जिस रास्ते पर आगे बढ़ रही थी वहां मैं धीरे धीरे मगरूर होती जा रही थी और अपने ईमान से दूर होती जा रही थी। ये कब हुआ मुझे पता भी नहीं चला। हालांकि मैं लगातार काम कर रही थी लेकिन जिस माहौल में मैं काम कर रही थी उसका असर मेरे दीन और ईमान पर पड़ रहा था।

    खोखली होती जा रही थी

    खोखली होती जा रही थी

    मैं खुद को समझाने की कोशिश करती रही कि मैं जो काम कर रही हूं वो अच्छा है और उसका मुझ पर कोई असर नहीं पड़ रहा है लेकिन मैंने धीरे धीरे अपनी बरकत खो दी। बरकत एक ऐसा शब्द है जो केवल खुशी या नेमत नहीं बयान करता है ये इंसान के अंदर की मज़बूती की भी गवाही देता है और मेरे अंदर वो मज़बूती खोखली होती जा रही थी।

    खुद से लड़ रही थी

    खुद से लड़ रही थी

    मैं लगातार अपनी सोच से लड़ रही थी और चाहती थी कि मेरी रूह और मेरी सोच में किसी तरह से एकजुटता आए। मैं चाहती थी कि मेरा ईमान मुझे साफ नज़र आए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने कई बार, लगातार कोशिश की लेकिन मुझसे नहीं हुआ। मैं अपने फैसले पर टिकी रहना चाहती थी। मैं रोज़ खुद से वादा करती थी कि मैं खुद को बदल लूंगी।

    ये दुनिया भ्रम है

    ये दुनिया भ्रम है

    मैं किसी भ्रम में जीने लगी थी। मैं रोज़ खुद को ये यकीन दिलाने में जुट जाती थी कि मैं जो कर रही हूं वो अच्छा काम है और मैं ये तब खत्म कर दूंगी जब मुझे इसमें कोई कमी दिखेगी। मैंने खुद को ऐसी जगह रख दिया कि रोज़ मैं अपने आपको ही अपने ईमान के प्रति दिलासे दिलाती थी। मैं अपना सुकून, अपनी शांति, अल्लाह के साथ अपना रिश्ता सब खराब कर दिया।

    झूठी ज़िंदगी में फंस गई थी

    झूठी ज़िंदगी में फंस गई थी

    मैं रोज़ चीज़े देखती थी, समझती थी लेकिन उसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से मोड़ लेती थी। लेकिन जो सच है वो देखना मैंने छोड़ दिया था। मैं रोज़ चीज़ें इग्नोर करती थी लेकिन घूम फिर कर मैं वापस वहीं आ जाती थी और मुझे अंदर ही अंदर कुछ खाए जा रहा था। मैं एक घुटन में जीने लगी थी। मैं खुद को संतुष्ट नहीं कर पाती थीं।

    अल्लाह के रास्ते पर खुशी

    अल्लाह के रास्ते पर खुशी

    फिर मैंने अपनी इस कमी का सामना करने की ठान ली। मैंने अपने ज्ञान की कमी को दूर किया और अल्लाह से करीबी बनाती। उनकी बातों पर अमल करने की कोशिश की। क़ुरान पढ़कर मुझे शांति मिली और सही रास्ता भी दिखा। मुझे सुकून मिला। हमें बनाने वाले की बातों में ही दिल को सुकून मिला पाता। उनकी राह, उनके उसूल और उनकी तामीलें।

    मेरी कमी, मेरी नासमझी

    मेरी कमी, मेरी नासमझी

    इसके बाद मैं अल्लाह के ही कहे पर अमल करने लगी और सही गलत जानने के लिए भी खुद से ज़्यादा अल्लाह पर भरोसा करने लगी। मुझे समझ में आया कि मेरे धर्म को लेकर मेरी सोच की कमी, मेरी नासमझी से थी। मैं अल्लाह के बताए उसूलों को समाज की झूठी खुशियों में ढूंढने की कोशिश करते करते कहीं खो गई थी और फंस गई थी।

    मैं भटक गई थी

    मैं भटक गई थी

    दिल को दो तरह की बीमारी होती है - पहली होती है शक और शुबहा और दूसरी होती है ख्वाहिशें और चाहतें। दोनों का ही ज़िक्र क़ुरान में है। अल्लाह कहते हैं कि लोगों के दिल में शुबहा की बीमारी होती है और इसे बढ़ा दिया जाता है। इसका अलाज केवल अल्लाह की बताई राह पर चलकर मिलता है। अल्लाह ने मुझे तब रास्ता दिखाया जब मैं भटक गई थी।

    आमीन!

    आमीन!

    इसके बाद ज़ायरा ने अपने खत में कुरान शरीफ के बारे में काफी बातें लिखते हुए कहा कि मैं दुआ करूंगी कि अल्लाह हर किसी की कश्ती पार लगा दे। और हर किसी के ईमान को सही और गलत पहचानने की मज़बूती दे। आमीन - ज़ायरा वसीम

    गौरतलब है कि ज़ायरा वसीम कुछ समय पहले तक प्रियंका चोपड़ा और फरहान अख्तर के साथ द स्काई इज़ पिंक की शूटिंग कर रही थीं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल थीं जिन्हें देखकर ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि वो अपने काम से खुश नहीं थीं।

    ज़ायरा वसीम कश्मीर की रहने वाली हैं और उन्होंने आमिर खान की दंगल के साथ बॉलीवुड में एंट्री की थी। उनके काम को काफी सराहना मिली थी जिसके बाद ज़ायरा, आमिर खान के साथ सीक्रेट सुपरस्टार में भी दिखाई दीं। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड भी दिया गया था।

    English summary
    Zaira Wasim quits working in Bollywood films and stated the reason being her inner peace detroyed and her consciousness dint allow to work in such an environment which distances her from her Allah.
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