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बिना 'किस' और 'इंटिमेट सीन' के सुचित्रा ने दिखाया रोमांस

Posted By: Staff
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आज बंगाली सिनेमा में देवी कही जाने वाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन ने दुनिया को अलविदा कहा दिया है। उनके जाने से पूरी सिने जगत दुखी हैं।सबकी गमगीन आंखे सु्चित्रा सेन को अपनी तरह से याद कर रही हैं। देश के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के घरों में सुचित्रा सेन के जाने से मातम पसरा है तो वहीं बांग्ला फिल्मोद्योग ने भी सुचित्रा सेन को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।

महान अदाकारा सुचित्रा सेन को याद करते हुए अभिनेत्री माधवी मुखर्जी ने कहा कि सुचित्रा जी ने अपने अभिनय से उन्होंने हर किसी के मन पर गहरा प्रभाव डाला। कहा जाता है कि वह सुर्खियों से दूर रहीं, लेकिन वह अपने फिल्मी कैरियर के चरम पर पहुंच चुकी थीं और इसलिए यह क्षेत्र छोड़कर उन्होंने अपनी आध्यात्मिक रुचियों को आगे बढ़ाया और उसके बाद वह कभी वापस नहीं आईं। उन्होंने कहा, "उन दिनों चुंबन या बिस्तर के दृश्य नहीं होते थे, लेकिन उन्होंने दिखाया कि कैसे बिना स्पष्ट दृश्य के कोई आसानी से प्यार और रूमानियत के दृश्य कर सकता है।"

मालूम हो कि टॉप की अभिनेत्री लेकिन पिछले 33 सालों से एकाकी जीवन जी रहीं सुचित्रा सेन पिछले काफी समय से बीमार थीं। सुचित्रा सेन के जाने से पूरे बंगाल समेत सिनेजगत गमगीन है। देश की सभी जानी मानी हस्तियों ने सुचित्रा सेन के निधन पर गहरा शोक जताया है और कहा है कि सेन के जाने से एक युग की समाप्ति हो गयी है।

गौरतलब है कि बड़े पर्दे पर उनकी पहली फिल्म 'शैरे छुत्तौर' (बंगाली) थी। उन्हें बंगाली की 'दीप ज्वाले जाय' और 'उत्तर फालगुनी' सरीखी फिल्मों के लिए जाना जाता है। वहीं, हिन्दी में वह 'देवदास', 'बंबई का बाबू' और 'ममता' और 'आंधी' सरीखी फिल्मों में अभिनय कर चुकी थीं। वर्ष 1978 में अपने सिनेमाई करियर को अलविदा कहने वाली यह अभिनेत्री 'सात पाके बंधा' के लिए वर्ष 1963 में मास्को फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीत चुकी थी। फिल्मों से संन्यास के बाद से वह एकांतपूर्ण जीवन जी रही थीं। वह सिर्फ अपनी अदाकारा बेटी मुनमुन सेन और नातिन रीमा और रिया सेन से ही मिलती थीं।

English summary
Without Kiss and Intimate Scenes Suchitra sen became Hot said Bengali film industry.She was a "power woman" who "ruled" the Bengali film industry and became the "undisputed Number 1.
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