#OnPoinrt: "...सलमान और बूढ़ा...सुनकर ही लोग हंस देते!"
उड़ान और लुटेरा के बाद विक्रमादित्य मोटवानी एक और अनोखी फिल्म लेकर आ रहे हैं ट्रैप्ड। इस दौरान उन्होंने हाल ही में बॉलीवुड में सलमान - आमिर के बदले हुए रंग ढ़ंग पर भी बात की।
इस हफ्ते बॉलीवुड में छोटी फिल्नों का समय होगा। छोटी यानि कि वो फिल्मों जिन पर दर्शक 250 - 300 रूपये खर्च नहीं करना चाहेंगे। यानि कि विक्रमादित्य मोटवानी की फिल्म ट्रैप्ड। फिल्म ट्रेलर से शानदार लग रही है और राजकुमार राव ने फिल्म के लिए काफी मेहनत की है।
इतना ही नहीं, ट्रैप्ड की शूटिंग केवल 20 दिन में पूरी की गई है। विक्रमादित्य मोटवानी ने हाल ही में फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि ये शाहरूख - सलमान स्टाईल पैसा वसूल सिनेमा नहीं है। उन सबके लिए सलमान भाई हैं।

लेकिन हां, बीते कुछ दिनों में सिनेमा काफी बदल चुका है। आज से पांच साल पहले अगर किसी को कहा जाता कि सलमान किसी फिल्म में बूढ़ा पहलवान बना है, तो लोग हंस देते।
या फिर कहा जाता कि आमिर खान एकदम सफेद बाल में तीन बेटियों का पिता बने नज़र आएंगे, तो कोई यकीन नहीं करता। लेकिन सुलतान और दंगल ने बॉलीवुड में फिल्मों के मायने बदल दिए हैं।
["बिना मेहनत के लोग 400 करोड़ कमाते हैं...घटिया सी फिल्म 300 करोड़ कमा लेती है!"]
कॉमर्शियल और इंडिपेंडेंट सिनेमा का अंतर लोगों को पता तो है पर वो अंतर कम हो चुका है। मेरे लिए तो कॉमर्शियल सिनेमा एक ही आदमी बनाता है - राजकुमार हिरानी। और मैं ज़रूर उनके जैसा बनना चाहूंगा।
वैसे हाल ही में स्टू़डियो सिस्टम और प्रोड्यूसर ने खुलकर कुछ बातें सामने रखी हैं -


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