बर्लिन फिल्म महोत्सव में 'विहिर' हाउसफुल

कुलकर्णी कहते हैं, "मेरे लिए बर्लिन में होना बहुत बड़े सम्मान की बात है। यह फिल्म एक आत्मकथात्मक घटना पर आधारित है। जब मैं 14 वर्ष का था उस समय कुएं में गिरकर मेरे चचेरे भाई की मृत्यु हो गई थी और तब मुझे महसूस हुआ कि इंसान का एक पल का भरोसा नहीं। जो आज यहां है वो कल यहां से जा सकता है।'' उन्होंने कहा ''यह बहुत पेचीदा विचार था। इससे कई सवाल खड़े हुए और मैंने इस फिल्म के माध्यम से उन्हीं सवालों के जवाब देने की कोशिश की है।"
कुलकर्णी की लघु फिल्म 'थ्री ऑफ अस' भी वर्ष 2008 में बर्लिन में प्रदर्शित हुई थी। 'विहिर' का मतलब होता है कुआं। यह फिल्म महोत्सव में रविवार को दिखाई गई थी। कुलकर्णी 10 लोगों के समूह के साथ वहां उपस्थित थे। इसमें फिल्म के अभिनेता मदन देवधर, आलोक रजवाडे़, अभिनेता-लेखक गिरीश कुलकर्णी और मोहन आगाशे शामिल थे। यह फिल्म दो किशोर लड़कों समीर और नचिकेत की दोस्ती और उनकी मौत के साथ जद्दोजहद और जीवन-मृत्यु जैसे जटिल और बड़े दार्शनिक प्रश्नों की कहानी है। विहिर पांच मार्च को बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होगी।


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