नेत्रहीन भी ले पाएंगे ‘वीर’ का आनंद

By Jaya Nigam
नेत्रहीन भी ले पाएंगे ‘वीर’ का आनंद

सलमान ख़ान की फ़िल्म ‘वीर’ का मज़ा अब नेत्रहीन लोग भी ले सकते हैं. ‘वीर’ पहली हिंदी फ़िल्म होगी जिसके डीवीडी रिलीज़ में ‘ऑडियो डिस्क्रिप्शन’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसी तकनीक के सहारे ये फ़िल्म नेत्रहीन लोगों तक पहुंच पाएगी.

हांलाकि इससे पहले ‘माइ नेम इज़ ख़ान’ में भी इस तकनीक का प्रयोग किया गया था लेकिन वो सिर्फ़ सिनेमा घरों तक ही सीमित था. किसी हिंदी फ़िल्म के डीवीडी रिलीज़ में ऐसी तकनीक के इस्तेमाल का तो ये पहला ही मौक़ा है.

'ऑडियो डिस्क्रिप्शन' तकनीक में एक लगातार चलने वाली कमेंटरी नेत्रहीन लोगों को फ़िल्म के दृश्यों का विवरण सुनाती रहती है. इस तकनीक में फ़िल्म के दौरान कलाकारों के हाव-भाव, कपड़े, मार-धाड़ और दृश्यों का ब्यौरा एक कमेंटरी के तौर पर दिया जाता. इस विवरण का मकसद नेत्रहीन लोगों को स्क्रीन पर होने वाली तमाम घटनाओं को विस्तार से समझाना होता है.

कमेंटरी

वीर के डीवीडी में ऑडियो डिस्क्रिप्शन जोड़ने के लिए ब्रिटेन के रॉयल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ब्लाइंड पीपल और फ़िल्म की निर्माता कंपनी इरोस के साथ मिलकर काम किया.

रॉयल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ब्लाइंड पीपल से सोनाली राय ने बीबीसी को बताया कि ऑडियो डिस्क्रिप्शन किस तरह से काम करता है, “ ये किसी फ़िल्म या टीवी शो की एक अतिरिक्त कमेंटरी है जिसमें कमेंटेटर दृश्यों का वर्णन करता रहता है. ये वर्णन कलाकारों की वेश-भूषा, हाव-भाव वग़ैरह की जानकारी प्रदान करता है. उदाहरण के तौर अगर आपको टीवी देखते अचानक दूसरे कमरे में जाना पड़े और आपका कोई दोस्त टीवी पर चल रहे कार्यक्रम के बारे में लगातार जानकारी देता रहे तो ये ऑडियो डिस्क्रिप्शन होगा. नेत्रहीन लोगों के लिए ये तकनीक बेहद कारगर है.”

वीर

सोनाली कहती हैं कि उनकी संस्था ने ब्रिटेन में रिलीज़ होने वाली क़रीब 90 फ़ीसदी हॉलीवुड फ़िल्मों में इस तरह की कंमेंटरी का इस्तेमाल करके उन्हें नेत्रहीन लोगों को उपलब्ध करवाया है. उनके मुताबिक हिंदी फ़िल्म इसके लिए इसलिए चुनी गई क्योंकि ब्रिटेन में अब हिंदी फ़िल्में काफ़ी देखी जा रही हैं.

फ़िल्म वीर को चुनने की वजह बताते हुए सोनाली ने कहा, “ फ़िल्म के निर्माता इसको लेकर काफ़ी उत्साहित थे. साथ ही इसमें सलमान ख़ान है और ये अच्छी फ़िल्म भी है.”

वीर के निर्माता विजय गालानी ने बीबीसी को बताया कि जब उन्होंने फ़िल्म के डीवीडी को रिलीज़ करने की तैयारियों शुरु कीं तो उनकी मार्केटिंग टीम ने इस कंसेप्ट के बारे में बताया. गालानी ने बीबीसी को बताया, “हमने सोचा कि हिंदी में तो ऐसा डीवीडी अभी तक आया नहीं है तो क्यों ना हम ही शुरुआत कर दें. और अगर इससे डीवीडी की बिक्री में बढ़ौतरी होती है क्यों नहीं?”

विजय गालानी कहते हैं कि ख़ुद सलमान ख़ान भी ऑडियो डिस्क्रिप्शन को लेकर काफ़ी उत्हासित थे. गालानी के मुताबिक सलमान ख़ान अपनी आने वाली फ़िल्मों में भी इस तकनीक के प्रयोग के पक्षधर हैं.

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