दूध..जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जायेंगे.. को पूरा नहीं कर पाये किशोर कुमार

13 अक्टूबर 1987 को महान गायक किशोर कुमार ने दुनिया को अलविदा कह दिया था लेकिन वह आज भी लोगों के दिलों में धड़कते हैं। सिंगर, एक्टर, डायरेक्टर होने के अलावा बहुत कम लोग जानते होंगे कि किशोर कुमार एक बहुत अच्छे कवि भी थे।

जिस तरह से वह कॉमिक रोल करने में माहिर थे उसी तरह से वह मजेदार तुकबंदी करने में भी उस्ताद थे।चार अगस्त 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में पैदा हुए किशोर ने पान की महिमा पर मजेदार कविता लिखी थी, जो उनके ज्यादातर प्रशंसकों की नजरों में नहीं आ पायी। कहा जाता है कि यह कविता उन्होंने खंडवा छोड़कर मुंबई जाने से पहले लिखी थी।
दुर्लभ कविता की पंक्तियों में किशोर की जिंदादिली और खिलंदड़ प्रकृति की छाप साफ दिखाई पड़ती है, जो कुछ यूं हैं... पान सो पदारथ, सब जहान को सुधारत, गायन को बढ़ावत जामें चूना चौकसाई है। सुपारिन के साथ..साथ मसाल मिले भांत..भांत, जामें कत्थे की रत्तीभर थोड़ी..सी ललाई है। बैठे हैं सभा मांहि बात करें भांत..भांत, थूकन जात बार..बार जाने का बड़ाई है। कहें कवि किसोरदास चतुरन की चतुराई साथ, पान में तमाखू किसी मूरख ने चलाई है।

अपनी रील लाइफ के अलावा रीयल लाइफ को लेकर बेहद चर्चित रहने वाले किशोर कुमार ने चार बार शादी रचायी थी। उनकी चौथी पत्नी अभिनेत्री लीना चंद्रावरकर की नजर में वह बेहतरीन व्यक्ति थे, जिनकी कमी वह अपनी जिंदगी में हर पल महसूस करती हैं।

लीना ने एक साक्षत्कार में कहा था कि आभास कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार मायानगरी में बस तो गये, लेकिन उनका मन आखिरी सांस तक खंडवा की ठेठ कस्बाई संस्कृति में रमा रहा। वह अक्सर कहा करते थे, दूध..जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जायेंगे। लेकिन अफसोस हम लोग उनकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाये।

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