यादें: बांहों में चले आओ है लता दीदी का फेवरिट, आर डी बर्मन के 10 अलग मूड
आरडी बर्मन ने संगीत प्रेमियों को जितना दिया, उससे कहीं ज़्यादा वो दे सकते थे। 4 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि है। संगीत जगत को उनसे जो मिला वो तो उनके ख़ज़ाने का छोटा सा हिस्सा था। अगर आज वो होते तो उनके इस संगीत के ख़ज़ाने से और भी बहुत कुछ मिलता। उन्हें याद करते हुए लता मंगेशकर ने कुछ भावुक यादें अपने फैन्स के साथ बांटीं। उनके दो फेवरिट आर डी बर्मन गीत हैं बांहों में चले आओ और तेरे बिना जिया ना।
'सीता और गीता', 'मेरे जीवन साथी', बॉम्बे टू गोआ', 'परिचय' और 'जवानी दीवानी' जैसी कई फिल्मों में उनका संगीत छाया रहा। वर्ष 1975 में रमेश सिप्पी की सुपरहिट फिल्म 'शोले' के गाने महबूबा महबूबा गाकर पंचम दा ने अपना एक अलग समां बांधा जबकि 'आंधी', 'दीवार', 'खूशबू' जैसी कई फिल्मों में उनके संगीत का जादू श्रोताओं के सर चढ़कर बोला। आप की प्लेलिस्ट में भी ज़रूर होंगे RD BURMAN के ये 10 सुपरहिट गीत -
#ये शाम मस्तानी
किशोर कुमार की आवाज़ और वो यूडलिंग कोई नहीं भूल सकता। कटी पतंग का ये गाना आपको ना चाहते हुए भी एक रोमांटिक फेस में खींच ले जाएगा।
#गुलाबी आंखें
युवाओं का फेवरिट गाना। या यूं कहिए एंथम है ये गाना। कोई भी कॉलेज फंक्शन हो लड़के के पास गिटार हो और ये गाना ना गाया जाए ऐसा तो हो ही नहीं सकता।
#चुरा लिया है तुमने जो दिल को
एक ऐसा गाना जो धीरे धीरे माहौल बना देता है। शांत और दिल में उतर जाने वाला। गिटार स्ट्रिंग्स, आर डी बर्मन और ज़ीनत अमान और बस ये गाना।
#कुछ ना कहो
आर डी बर्मन की आखिरी फिल्म थी 1942 अ लव स्टोरी। जिसका एक एक गाना उन्होंने शायद बेहद प्यार से तराशा है। रिमझिम रिमझिम हो या एक लड़की को देखा। कुछ ना कहो के बारे में वाकई कुछ कहा नहीं जाता बस ईयरफोन लगाकर सुना जाता है।
#प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया
एक शैतानी भरा और बिल्कुल हल्का फुल्का गीत। जो आपकी हर रोड ट्रिप पर, हर आउटिंग पर या ऐसे ही यूं ही हर गेट टुगेदर पर आपके साथ ज़रूर रहा है। तो बत्तियां बुझा दो कि नींद नहीं आती है...
#समुंदर में नहा के
इस गाने को गाकर अगर किसी को छेड़ा नहीं तो फिर क्या खाक आप RD BURMAN फैन हैं।
#तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी
एक ऐसा नगमा जो बस यूं ही बिना किसी वजह दिल में उतर जाएगा। दर्द देगा पर फिर भी दिल से जाएगा नहीं। जीने के लिए सोचा ही नहीं दर्द संभालने होंगे...
#दम मारो दम
अगर पार्टी में इस पर नहीं नाचे तो फिर शायद अभी ही पार्टी शुरू हुई है। क्योंकि इस गाने के बिना पार्टियां अक्सर खत्म नहीं होती। बेफिक्री और खुदगर्ज़ी इस गाने ने ही तो सिखाई। हम सबकी परवाह करें क्यों...सबने हमारा किया क्या!
#तेरे बिना ज़िंदगी से कोई
आंधी का ये गाना आपको शायद फ्लैशबैक में ले जाता हो, बहुत कुछ ऐसा याद दिलाता हो जो आप याद करना नहीं चाहते पर फिर भी ये गाना ज़रूर आपकी प्लेलिस्ट में होगा!
#रात कली एक ख्वाब में आई
एक खुशनुमा सा तराना जो आपको बिल्कुल फ्रेश कर देगा। हंसते खेलते इस गाने के साथ कभी दिन की शुरूआत कीजिए मज़ा आ जाएगा!
#महबूबा महबूबा
इस गाने को आर डी बर्मन की पहचान माना जाता है। ऐसा गीत ना फिर कभी दोबारा बन पाया ना ही बन पाएगा!


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