यादें: सुरों के सागर मन्ना डे से नहीं भरता दिल
प्यार हुआ इकरार हुआ सुनते ही अगर आप आंखे बंद करके कहीं खो जाते हैं तो आप भी सुरों के उस शहंशाह के दीवाने हैं जो पिछले साल सात सुरों में से एक अपने साथ चुरा ले गए। मन्ना डे की आवाज़ और उनके सुर संगीत जगत में बहते हैं।

तू प्यार का सागर है कि सादगी हो या ए भाई ज़रा देख के चलो की शरारत मन्ना की आवाज़ में सब सध जाते थे। उनके कुछ किस्से तो ऐसे हैं जो उनके हर गीत के पीछे की कहानी बता जाते हैं।
कल्याणजी की यादों से
मन्ना डे की खासियत थी कि हर गाना गाने से पहले वो उसके माहौल को समझते थे। कल्याणजी आनंदजी की मानें तो यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी मन्ना की मेहनत का नमूना थी। मन्नाडे के स्वरों में यह गीत हर जगह गूंज रहा था। गीत संगीत की तैयारी ऐसी कि सचमुच पठानी माहौल सा बन गया। तब मन्ना को पता चला कि रबाब बजाने वाले को भी काबुल से बुलाया गया था। मन्ना डे ने उससे कई तरह की जानकारी लेते रहे। वहां के मिजाज को समझते रहे। उन्होंने गीत का एक एक शब्द का सही उच्चारण समझने की कोशिश की थी। रबाब ढोल और तीन वायलेन के साथ सजा था यह गीत जिसे मन्नाडे ने पूरे रंग में गाया।
तो आज मन्ना डे की याद में अगर आप सुनना चाहते हैं उनके बेहतरीन नगमे तो ये रही लिस्ट -
- ये रात भीगी भीगी, , चोरी चोरी
- ऐ मेरी ज़ोहराजबीं, वक्त
- प्यार हुआ इकरार हुआ है, लता मंगेशकर, श्री 420
- ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, किशोर कुमार, शोले
- लागा चुनरी में दाग, दिल ही तो है
- ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय, आनंद
- ए भाई ज़रा देख के चलो, मेरा नाम जोकर
- एक चतुर नार, किशोर कुमार, पड़ोसन
- झनक झनक तोरी बाजे पायलिया, मेरे हुज़ूर
- चलत मुसाफिर मोह लियो रे, तीसरी कसम
- अंखियां न चुराओ बलमा, आमने सामने
- लेके पहला पहला प्यार, आशा भोसले, सीआईडी


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