'छत्रीवाली' ही नहीं, ये बॉलीवुड फिल्में भी बनी हैं कंडोम पर, दर्शकों को दे गईं अच्छा खासा सबक!

हाल ही में रकुल प्रीत सिंह की फिल्म 'छत्रीवाली' ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई हैं। ये फिल्म ना सिर्फ स्कूलों में दी जाने वाली सेक्स एजुकेशन पर बेस्ड है बल्कि कंडोम के इस्तेमाल और उसके फायदों के बारे में भी फिल्म में बताया गया है। फिल्म में दकियानूसी-रूढ़ीवादी बातों के बारे में भी बताया गया है जो सदियों से चली आ रही हैं। कंडोम का इस्तेमाल क्यों जरूरी है और उसके साथ ही बार-बार अबॉर्शन से महिलाओं की सेहत पर क्या असर होता है, यह सभी बातें फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है। साथ ही बच्चों को सही समय पर सेक्स एजुकेशन देने पर जोर दिया गया है। बहरहाल सेक्स एजुकेशन और कंडोम पर ये पहली फिल्म नहीं है, इससे पहले भी कई फिल्में आ चुकी है जो कि कंडोम के इस्तेमाल को लेकर और उसको खरीदने के दौरान मर्दों को होने वाली शर्म के बारे बात करती नजर आती है। चलिए जानते हैं कंडोम पर कौन-कौन सी फिल्में आई हैं।
'छत्रीवाली' -
20 जनवरी को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई 'छत्रीवाली'। फिल्म का निर्देशन किया है तेजस विजय ने और फिल्म के निर्माता है रोनी स्क्रूवाला। फिल्म में रकुल प्रीत सिंह के अलावा सुमित व्यास, सतीश कौशिक, डॉली आहलूवालिया, और राजेश है। फिल्म बेहद गंभीर मैसेज देती नजर आती है।
जनहित में जारी -
नुसरत भरूचा की फिल्म जनहित में जारी भी कंडोम पर आधारित थी, जो इंटरटेनमेंट के साथ-साथ दर्शकों को एक मैसेज देती नजर आई। निर्देशक राज शांडिल्य की फिल्म की कहानी भी 'छत्रीवाली' फिल्म की तरह ही है। शादी के बाद नुसरत भरूचा के प्रोफेशन के खिलाफ ससुराल वाले खिलाफ हो जाते हैं लेकिन इस फिल्म में जहां निर्देशक कंडोम पर ही फोकस कर रहे हैं वहीं छत्रीवाली में स्कूलों में सेक्स एजुकेशन पर अधिक जोर दिया गया है।
हेल्मेट -
हेल्मेट फिल्म में मर्दों का कंडोम को ना खरीद पाना, कंडोम खरीदने में शर्म होना, झिझक होना या फिर फार्मेसी की दुकान पर सीधे जाकर कंडोम ले आना, इस झिझक को खत्म करने के लिए हेलमेट फिल्म को बनाया गया है। किस तरह से कंडोम को आसानी से मुहैया कराया जाए और कैसे पुरुष इसे आसानी से खरीद पाएं, यही फिल्म में फोकस किया गया है।
बहरहाल, कंडोम पर तो ऐसी ही कुछ फिल्में बनी है, लेकिन सेक्स एजुकेशन पर ऐसी बहुत सी फिल्में बनी हैं। दरअसल, भारत में अभी भी सेक्स को लेकर, कंडोम के इस्तेमाल को लेकर और सेक्स एजुकेशन पर बात करने से लोग खुलेआम शर्माते हैं। आज भी भारत में सेक्स किसी टैबू से कम नहीं है। सेक्स से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ने के लिए ही बॉलीवुड अक्सर सेक्स से जुड़े विषयों पर एक्सपेरिमेंट करता रहता है। छत्रीवाली, जनहित में जारी और हेलमेट ऐसी ही फिल्मों का उदाहरण है।


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