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कहानी की Band: तो ऐश से शाहरूख कहते....'कहो न प्यार है'

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[नीति सुधा] साल 2000 में आई फिल्म 'कहो ना प्यार है' बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों में से एक है। ऋतिक रोशन ने इस फिल्म के जरिए डेब्यू के साथ ही पूरी इंडस्ट्री में अपना कब्जा जमा लिया था। वहीं, इस फिल्म ने सबसे ज्यादा एवार्डस पाने के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में भी अपना नाम दाखिल कराया था।  इस फिल्म को कुल 102 एवार्ड मिले थे।

लेकिन क्या आपको पता है कि राकेश रोशन के निर्देशन में बनी इस फिल्म के लिए ऋतिक रोशन और अमीषा पटेल पहले च्वाइस नहीं थे। जी हां, जहां ऋतिक की जगह डाइरेक्टर शाहरूख खान को लेना चाहते थे। वहीं, सोनिया के किरदार के लिए भी अमीषा से पहले दो और एक्ट्रेस को रोल ऑफर किया गया था। हालांकि, इस फिल्म ने कई एवार्ड्स जीते और फैंस ने इसे सिर आंखों पर चढ़ाया। लेकिन आज जब आप यह फिल्म देखेंगे, तो इसकी कहानी में कई ट्विस्ट हैं जो निर्देशक ने अगर नहीं डाली होती तो शायद फिल्म कुछ और ही होती।

बहरहाल, क्या आपने कभी सोचा है कि यदि शाहरूख होते रोहित तो फिल्म में क्या होता? नहीं न..तो फिर यहां पढ़िए कि ऐसा होता तो कैसी होती 'कहो ना प्यार है'?

 ऐश या करीना होती सोनिया

ऐश या करीना होती सोनिया

जी हां, कहो ना प्यार है जैसी सुपरहिट फिल्म से करियर की शुरूआत करने वाली अमीषा पटेल के खाते में यह फिल्म इन दोनों के ना करने के बाद गई। करीना ने इस फिल्म को ना कहा था, यह तो शायद लोगों को पता हो। लेकिन क्या आपको पता है, करीना से भी पहले डाइरेक्टर राकेश रोशन ने ऐश्वर्या को इस फिल्म के लिए चुना था। लेकिन ऐश के पास डेट्स की प्रोब्लम थीं, तो उन्होंने ना कहा दिया। लेकिन सोचिए यदि ऐश ने हां कह दिया होता तो, जोधा- अकबर में यह जोड़ी इतनी नई नहीं लगती। और अमीषा का नाम तो शायद किसी ने भी नहीं सुना होता।

शाहरूख होते राज/ रोहित

शाहरूख होते राज/ रोहित

जी हां, शाहरूख खान और कहो न प्यार है....इस फिल्म में ऋतिक को छोड़ आज कोई भी सूट करता नहीं दिखता है। खासकर किंग खान को तो हम सोच भी नहीं सकते। सोचिए यदि इस फिल्म के लिए राकेश रोशन ने शाहरूख को साइन कर लिया होता तो....तो एक पल का जीना..शायद इतनी हिट नहीं होती..क्योंकि उसमें ऋतिक का डांस नहीं होता। और तो और डुप्लिकेट के बाद एक और फिल्म में शाहरूख का डबल रोल देखने को मिलता। जो दर्शकों को बिल्कुल नहीं पसंद। मतलब , कहो ना प्यार है कि तो बज जाती बैंड..Tongue out

सोनिया का होता बॉयफ्रैंड

सोनिया का होता बॉयफ्रैंड

फिल्म में रोहित और सोनिया की मुलाकात काफी फिल्मी होती है। उसके बाद किस्मत की बदौलत दोनों की मुलाकात बढ़ती है और हो जाता है प्यार। लेकिन सोचिए, यदि सोनिया, जो कि इतनी खुली विचार और दोस्तों से घिरी रहने वाली लड़की है। उसका बॉयफ्रैंड होता तो.... तो रोहित चाहे कितनी भी डॉयलोग मार लेता.. सादगी में खूबसूरती है। या कितने भी गाने गा लेता,,,चांद-सितारे, फूल और खूशबू.. सोनिया और वो साथ नहीं होते। लेकिन कहानी बिल्कुल बोरिंग हो जाती है। है न....

रोहित बन जाता रॉकस्टार

रोहित बन जाता रॉकस्टार

रोहित एक सिंगिंग स्टार बनना चाहता है। लेकिन कुछ होने से पहले ही उसे मार दिया जाता है। लेकिन सोचिए यदि, रोहित उस दिन पुलिस कमिश्नर की हत्या होते नहीं देखता तो..तो वह सुपरस्टार बन चुका होता। और तीन घंटे की फिल्म की डेढ़ घंटे में खत्म हैप्पी एंडिग हो जाती। क्योंकि रोहित के सुपरस्टार बनते ही सोनिया और रोहित की हो जाती शादी..and they lived happily ever after.

रोहित को नहीं देखते सर-जी

रोहित को नहीं देखते सर-जी

फिर उसी सीन की बात, जो फिल्म की टर्निंग प्वाइंट है। रोहित कमिश्नर की हत्या होते तो देख लेता है। लेकिन गड़बड़ उस वक्त होती है, जब सोनिया के पापा मिस्टर सक्सेना(अनुपम खेर) भी रोहित को देख लेते हैं। उसके बाद रोहित को मार दिया जाता है। खैर, सोचिए यदि इस सीन को थोड़ा बदल दिया जाता तो..तो रोहित कमिश्नर की हत्या की बात जाकर सबको बता देता। सोनिया को भी अपने पापा के असली चेहरे के बारे में पता चल जाता। और फिल्म हो जाती एकदम बॉलीवुड मसाला। लेकिन फिल्म की असली कहानी की बज जाती बैंड। Tongue out

रोहित के भाई ने नहीं देखा होता एक्सिडेंट

रोहित के भाई ने नहीं देखा होता एक्सिडेंट

रोहित ने देखा कमिश्नर का खून होते, और रोहित के भाई ने देखा रोहित का खून होते। ऊफ्फफ..काफी ट्विस्ट डाल दी डाइरेक्टर ने। लेकिन सोचिए, यदि रोहित के भाई ने यह सब देखा हीं नहीं होता तो.. तो शायद राज के लिए रोहित के हत्यारों को ढूंढ़ना काफी मुश्किल हो जाता। और फिर शायद उसे वापस न्यूजीलैंड की टिकट कटानी पड़ती।

नीता और राज नहीं होते दोस्त

नीता और राज नहीं होते दोस्त

न्यूजीलैंड में राज और सोनिया इसीलिए मिल पाते हैं क्योंकि सोनिया की कजिन नीता राज की फैंड होती है। लेकिन सोचिए, यदि राज और नीता की कोई कहानी नहीं होती तो..तो सोनिया न राज से मिल पाती, न उसे जान पाती,, न राज को होता सोनिया से प्यार, न राज आता इंडिया..और न सामने आते रोहित के हत्यारे.... हम्ममम.... यानि की सबसे इंर्पोटेंट को नीता हुई....है कि नहीं।

राज नहीं आता इंडिया

राज नहीं आता इंडिया

राज सोनिया से प्यार तो बहुत करता था, लेकिन सोनिया उसे हमेशा इग्नोर करती रही। अंत में भी अपने पिता के कहने पर ही राज, सोनिया के साथ इंडिया आने को राजी होता है। लेकिन सोचिए, यदि राज इंडिया आता ही नहीं तो.... तो सोनिया को कभी नहीं पता चल पाता कि उसके पिता ने ही रोहित की हत्या की है। और शायग कुछ सालों के बाद उसकी कहीं शादी भी हो जाती। हम्ममम.. बैड एडिंग।

राज नहीं होता 'सिंगर'

राज नहीं होता 'सिंगर'

राज और रोहित में चेहरे को छोड़कर जो एक बात कॉमन होती है। वह है सिंगिंग। रोहित भी सिंगर होता और राज भी। लेकिन सोचिए, यदि राज सिंगर नहीं होता तो.. तो फिल्म का अंत कुछ और ही सोचना पड़ता। और शायद फिर फिल्म से 'सितारों की महफिल' गाने को भी हटा लिया जाता। तो फिर आखिर राज कैसे पकड़ता रोहित के हत्यारों को..हम्मम.. मतलब, सिंगर होना भी इंर्पोटेंट था। Cool

राज और रोहित की शक्ल नहीं होती एक

राज और रोहित की शक्ल नहीं होती एक

फिल्म की कहानी ही इसीलिए खत्म हो पाती है। क्योंकि रोहित और राज की शक्ल एक जैसी होती है। हालांकि असल जीवन में ऐसा कम ही होता है। लेकिन बॉलीवुज फिल्मों में तो कुछ भी पॉसिबल है। तो फिर एक जैसे शक्ल के दो लोग क्यों नहीं, और दोनों ही सिंगर.. गुड..वैसे अगर रोहित और राज की शक्ल इतनी सेम टू सेम नहीं होती,, तो न राज सोनिया से मिल पाता, न इंडिया आता,,और न रोहित के हत्यारों को पकड़ पाता। यानि की, फेस भी इंर्पोटेंट....

English summary
Do you know, Hritik Roshan and Ameesha Patel was not the first chioce for superhit movie Kaho Na Pyar Hai. Instead Shahrukh Khan was considered first for Rohit/Raj in movie.
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