हरियाणा ने पलकों पर बिठाया अपने सलमान को

यहां तक की प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा ने भी उसे 21 लाख रूपये की राशि बतौर इनाम देने की घोषणा कर डाली। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले सलमान अली की कामयाबी पर लोग उसके परिजनों को मुबारकबाद व सहयोग देने में तनिक भी पीछे नहीं है। हर चौक-चौराहे व गली-मोहल्ले में सलमान की कामयाबी की चर्चे है।
पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटे सलमान की कामयाबी के लिए वे भी अल्लाह से दुआ कर रहे है। सलमान के परिजनों ने कहा कि गरीबी की हालत ये है कि उनके घर टीवी भी नहीं था। सलमान का जब भी कार्यक्रम आता तो वो पड़ोसियों के घर जाकर अपने बेटे के कार्यक्रम को देखते थे। सारेगामापा में सलमान की कामयाबी से खुश होकर क्षेत्र के लोगों ने उसके परिवार को टीवी दिला दिया है।
सलमान का लिटिल चैंप्स तक का सफर
13 साल का सलमान पुन्हाना के मार्डन हाई स्कूल की पाचवीं कक्षा में पढ़ता है। यह पाच वर्ष की उम्र से ही अपने पिता के साथ गाने गाता था। दादा सकूर बताते है कि जब सलमान पांच साल का था तो वह गानों के साथ गुनगुनाता था। इससे उन्हें लगा कि सलमान की आवाज में जादू है और वह एक दिन कामयाबी की किसी बड़ी बुलंदी को छू सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होने बेटे कासिम अली के साथ उसे संगीत की तालीम देनी शुरू की। उसकी गायकी में कुछ दम देखकर साथी कलाकारों ने उसे प्रशिक्षण दिलाने की सलाह दी।
इस पर पिता कासिम अली ने दिल्ली के गायक उस्ताद इकबाल हुसैन के पास उसे गायकी के हुनर के बारे में बारीकिया सिखाई। अब सलमान ने भजन पार्टियों में गाकर पैसा कमाया। उसी से अपनी पढ़ाई का खर्च चलाया है। इसी दौरान उनकी एक भजन गायक कलाकार मनोज बंसल से मुलाकात हुई। उन्होने सलमान के हुनर को देखा तो उन्होने सलमान को दिल्ली में लिटिल चैंप्स ऑडीशन में दिलवाया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कस्बे के कुछ समाजसेवियों ने सहायता की।
इससे सलमान ऑडीशन के बाद मुंबई तक का सफर तय कर पाया। सलमान की कामयाबी ने साबित किया है कि मेवात में प्रतिभाओं की कमी नहीं है और जिसके हौसले बुलंद है मंजिल खुद चलकर ऐसे लोगों के कदम चूमती है। अपने यार सलमान की कामयाबी पर नौशाद, सलीम, इब्राहिम, अरशद, साजिद, वाजिद व आबिद का कहना है कि जब सल्लू फाइनल जीतकर आएगा तो उससे बड़ी पार्टी लेंगे।


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