पुराने दिनों की याद दिलाती है: स्ट्राइकर

By Neha Nautiyal

Striker
स्ट्राइकर एक ऐसे समय में आई फिल्म है जब कि लोग कैरम और सिद्धार्थ को दोनों को भूल गए लगते हैं। सिद्धार्थ इससे पहले साल 2006 में आई फिल्म 'रंग दे बसंती' में दिखाई पड़े थे। अपने अच्छे चेहरे-मोहरे और बेहतरीन अदाकारी से सिद्धार्थ ने कुछ फैन भी जोड़ लिए थे। 'रंग दे बसंती' के ठीक चार साल बाद उन्होंने स्ट्राइकर से बॉलीवुड में वापसी की है।

सिद्धार्थ का अभिनय हमेशा से बढ़िया रहा है। वो दक्षिण के सुपस्टार अभिनेता हैं जिनकी पिछले दस सालों में दस फिल्में रिलीज हुई हैं। जिनमें से 9 सुपरहिट रही हैं। इसलिए ये बात तो पक्की समझिए की एक्टिंग करना वो बखूबी जानते हैं। स्ट्राइकर में भी उन्होंने बढ़िया अभिनय किया है। लेकिन वो ऐसे कलाकार नहीं हैं जो अपने दम पर एक पूरी फिल्म खींच लें। एक बढ़िया फिल्म बनाने में कहानी, निर्देशन, फोटोग्राफी, संवाद हर चीज पर बहुत मेहनत लगती है। बढ़िया फिल्म हलुवा नहीं हो सकती जिसे आप एक बार में पका डालें। वो बिरयानी की तरह होती है जिसे जितनी मेहनत और जतन से पकाएंगे वो खाने में उतनी लजीज़ लगेगी।

फिल्म के निर्देशक हैं चंदन अरोड़ा। चंदन अरोड़ा इससे पहले 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' और 'पति-पत्नि और वो' फिल्में बना चुके हैं। स्ट्राइकर की कहानी के लिए उन्होंने एक ऐसे खेल को चुना है जो 1970-80 औऱ 90 के शुरुआती सालों में घऱ-घर में खेला जाता था। लेकिन 90 के दशक में ये खेल लगभग गायब हो गया। अब इसकी जगह पूल ने ले ली है। स्ट्राइकर तब की कहानी है जब मुंबई 'बॉम्बे' था। भाई लोग यानी जो अब मुंबई के डॉन हैं उनका धंधा रफ्तार पकड़ रहा था।

इन्हीं सब के बीच फिल्म का हीरो सूर्या बेहतर भविष्य की तलाश में दुबई जाना चाहता है। वहां जाने के लिए इक्टठे किए गए पैसों को धोखा-धड़ी से एक दलाल लूट लेता है। तब फिल्म की कहानी में एक नया मोड़ आता है और पैसा कमाने के लिए सूर्या अपने पुराने प्यार कैरम की तरफ लौटता है। सू्र्या 12 साल की उम्र में कैरम का चैंपियन होता है। उसका ये शौक उसे प्रसिद्धि तो देता है लेकिन भविष्य को सिर्फ उसके हवाले नहीं किया जा सकता ये सोचकर सूर्या विदेश जाने की सोचता है। और यहीं से उसकी जिंदगी में एक नया मोड़ आता है।

फिल्म की कहानी अच्छी है। फिल्म देखकर बचपने की यादें ताजा हो जाती हैं। पूरा माहौल ऐसा बनाया गया है कि आपको वो कुछ अजनबी सा लगकर भी सुहाता है। फिल्म का संगीत कोई खास असर नहीं छोड़ता। सिनेमैटोग्राफी बढि़या है। दक्षिण की नवोदित अभिनेत्री पद्नप्रिया के हिस्से कुछ ही दृश्य आए हैं। कई कोणों में घुमाने के बावजूद पूरी कहानी सूर्या के किरदार के इर्द-गिर्द ही घूमती। लंबे समय बाद पर्दे पर दिखे आदित्य पंचोली ने अच्छा अभिनय किया है।

फिल्म देखने जाएं- अगर आप सिद्धार्थ के फैन हैं। निराशा हाथ नहीं लगेगी ये मसाला फिल्मों से हटकर फिल्म है।
फिल्म देखने क्यों ना जाएं- कहानी में नयापन होने के बावजूद ज्यादा देर बांधे नहीं रखती।

More from Filmibeat

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X