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REVIEW - संजय दत्त की दमदार परफॉर्मेंस लेकिन कहानी में चूक गई भूमि

By Shweta K
|
Bhoomi Public Review | Sanjay Dutt | Aditi Rao Hydari | Omung Kumar | FilmiBeat
Rating:
2.0/5
Star Cast: संजय दत्त, अदिती राव हैदरी, रिद्धि सेन, शरद केलकर, सिधांत गुप्ता
Director: ओमंग कुमार

शानदार पॉइंट -संजय दत्त
निगेटिव पॉइंट - डायरेक्शन,बैकग्राउंड स्कोर

संजय दत्त के कमबैक का इंतज़ार फैन्स को काफी समय से था लेकिन भूमि उनकी कमबैक फिल्म नहीं होनी चाहिए थी। भूमि की कहानी और पटकथा के स्तर पर इतनी पिछड़ी हुई है कि समझ नहीं आता किस सदी में जाकर फिल्म के बारे में बात की जाए। फिल्म एक गंभीर मुद्दे का मज़ाक बना कर रख देती है।

अपने लचर लेखन और ढीले संवाद के साथ। वहीं फिल्म में गाने इतनी अजीब जगह हैं कि आपको केवल फिल्म से अलग करने का काम करते हैं। 

प्लॉट

प्लॉट

फिल्म की शुरूआत एक सीन से होती है जहां एक यंग लड़की को घसीटा जाता है और वो कार में चिल्ला रही होती है और बैकग्राउंड म्यूजिक तेज होती जाती है।

फ्लैशबैक में एक महिला भूमि (अदिती राव हैदरी) को दिखाया जाता है जिसके पिता अरुण (संजय दत्त) का जूतों का आगरा में व्यापार है। इसके बाद एक शादी का गाना और कुछ मेलोड्रैमेटिक सीन आते हैं (पता नहीं क्यों)।

प्लॉट

प्लॉट

इसके बाद भूमि और अर्जुन की पूरी दुनिया पलट जाती है जब उनका एक दोस्त विशाल (पुरु छिब्बर) और उसका कजिव धौली (शरद केलकर) भूमि का गैंगरेप करते हैं।इसके बाद कुछ भी अनुमान लगाने की जरुरत नहीं है, चरित्र हनन के बाद कोर्ट रुम ड्रामा चलता है और न्याय नहीं मिलता। फिर एक पिता-बेटी मिलकर अपने दुश्मनों से बदला लेते हैं।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

बॉलीवुड को अचानक बलात्कार से जुड़ी फिल्में बनाने का चस्का लगा है। इस साल पहले से ही काबिल, मात्र और मॉम आ चुकी है और अब भूमि भी बिल्कुल उसी रास्ते पर निकल पड़ी है। उमंग कुमार ने फिल्म को पुराने अंदाज में बनाया है। भूमि असल जिंदगी की घटनाओं से प्रेरित फिल्म है लेकिन इसे काफी असंवेदनशील तरीके से दिखाया गया है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

संजय दत्त वापस अपने फॉर्म में आ चुके हैं लेकिन बदकिस्मती से ये फिल्म है जो उन्हें झुका देती है। फिल्म में इतने सारे cliche हैं जितने गड्ढे मुंबई की सड़कों पर नहीं हैं। संजय दत्त प्रभावशाली लग रहे हैं और उनकी आखें ही बता दे देती हैं कि बाबा ने शानदार वापसी की है। अदिति राव हैदरी भी रेप पीड़िता की भूमिका में कुछ सीन में काफी अच्छी लगी हैं।शरद केलकर फिल्म में बिल्कुल 90 के दशक के विलेन हैं।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

प्रोडक्शन डिजाइन को फिल्म में काफी अच्छे से रखा गया है और यही फिल्म के लिए अच्छी बात है। इस्माइल दरबार का म्यूजिक फिल्म को और बुरा बनाता है।

म्यूजिक

म्यूजिक

फिल्म में गाने भी अव्यवस्थित तरीके से रखे गए हैं। जैसे कोई अदिती राव हैदरी को बुलाता है और वो बोलती है कि उसका प्रेमी उसका इंतजार कर रहा है। अगले ही सीन में गाने की शुरूआत हो जाती है।

Verdict

Verdict

बेशक संजय दत्त को इससे भी दमदार कमबैक की जरुरत है। संजय दत्त को एक सही कहानी की जरुरत होती है और बस लोग उन्हें देखकर तालियां और सीटियां बजाते रह जाते हैं। लेकिन दुख की बात है कि भूमि संजय दत्त के लिए वो अवसर नहीं है।

English summary
Sanjay Dutt Bhoomi movie review story plot and rating.

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