घर की मुर्गी रिव्यू: महिला दाल नहीं पकवान है, 19 मिनट की छोटी लेकिन वजनदार फिल्म

Rating:
3.0/5

शॅार्ट फिल्म- घर की मुर्गी
निर्देशक- अश्विनी अय्यर तिवारी, कथा- नितेश तिवारी
कलाकार-साक्षी तंवर,अनुराग अरोड़ा
ओटीटी- सोनी लिव

घर की मुर्गी दाल बराबर। इसी कहावत को गलत साबित करती हुई एक सटीक संदेश देती है, निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी की ये छोटी मगर मोटी फिल्म। दंगल फेम नितेश तिवारी ने इसका लेखन किया है। महिला दिवस पर इसे विशेष तौर पर टेलीविज़न पर दिखाया गया। आपकी नजर इस शार्ट फ़िल्म पर अभी पड़ी नहीं है तो जाइए देख लीजिए। ठीक वैसे ही जैसा रिमोट घुमाते हुए मेरी नजर इस पर पड़ी।

आपके जीवन के 20 मिनट के लिए ये बेहद जरूरी होने के साथ कीमती भी है। वो इस वजह से कि महिला दिवस हर साल आता है, लेकिन उसका महत्व कितना है, इससे कई लोग अनजान हैं। इसी की परख करती है ये लघु फिल्म। दूरदर्शन पर लघु फिल्मों का एक दौर सा चला था, जहां पर समाज से जुड़ी जरूरी सीख को छोटी सी कहानी के जरिए दिखाया जाता था।

Sakshi Tanwar

टीवी पर फिर से वो वक्त धीमी गति से ही सही, लौट रहा है। बहरहाल, कहानी घर घर की कि लोकप्रिय किरदार पार्वती ( साक्षी तंवर) यहां पर सीमा बन गयी हैं। सीमा ने अपने लिए कोई सीमा नहीं रखी है। वो ब्यूटी पार्लर भी चलाती है और बच्चों से लेकर बीमार ससुर और नागिन टीवी शो देखने वाली सास को प्रेम भाव से संभालती है।

सीमा कभी इस बात से बोझिल नहीं महसूस नहीं करती कि उसकी जिंदगी कुकर की सीटी से लेकर रात को सिर पर बाम के सहारे खत्म होती है। वो अपनी बाई का दर्द भी समझती है। क्योंकि वो भी पूरा दिन बेटी, बेटा पति और परिवार के लिए नौकरी करती है।

sakshi tanwar

हालांकि ब्यूटी पार्लर चलाकर सीमा को गर्व भी महसूस होता है जिसका अहसास उसे अपने पति के हंसी के सिरहाने मिलता है। पति को पार्लर चलना केवल टाइम पास लगता है। बेटी के लिए दोस्तों के सामने मां का डांस करना शर्मिंदगी है। कुल मिलाकार ये फिल्म एक महिला की खोई हुई अहमियत को अंत में उस बल के साथ पेश करती है,जिसकी चाह हर उस महिला को होती है जो घर को बुनती है। संजोती हैं।

ये शार्ट फ़िल्म बताती है कि घर की मुर्गी दाल नहीं पकवान है। नितेश तिवारी की बंधी हुई स्क्रिप्ट, अश्विनी अय्यर तिवारी का सटिक निर्देशन और साक्षी तंवर की अदायगी के साथ गुड फील करने और अपने परिवार की महिलाओं को गुड फील करवाने के लिए इसे जरूर देखना चाहिए। कहानी में नयापन नहीं है। फिर भी 19 मिनट में इसे सजावट के साथ पेश किया गया है जो संदेश देने के साथ चेहरे पर सुकून की मुस्कान ले आती है।

फिल्मीबीट की तरफ से इस स्वादिष्ट फिल्म को 3 स्टार। आप इसे सोनी लिव पर देख सकते हैं।

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