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    Review कोटा: द रिजर्वेशन- जातिवाद के मुद्दे पर बेस्ड दलित छात्राओं की दर्दनाक हकीकत

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    Rating:
    2.0/5

    फिल्म- कोटा: द रिजर्वेशन
    निर्देशक, लेखक- संजीव जायसवाल
    कलाकार- अनिरुद्ध दवे,आदित्य ओम, गरिमा कपूर
    कहां देखें- बाबा प्ले Baba Play

    Quota The Reservation

    लोग बोलते हैं कॉलेज के दिन यादगार होते हैं, कोई हम दलित छात्रों से पूछे? इसी सवाल को पूरा करती हुई दिखाई देती है, कोटा: द रिजर्वेशन फिल्म। जाति भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी और कठोर होती है ,इसका दर्द उस समाज को पता है जो जन्म से लेकर मरण तक ऊंच-नीच की घिनौनी सोच की लपटें खाता है। संजीव जायसवाल द्वारा निर्मित, निर्देशित और लिखित कोटा इसी आग को दिखाती है। यह कहानी है सौरभ रावत की। जो डॉक्टर बनने का सपना लेकर माता-पिता से दूर शहर के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला पाता है।

    कॉलेज के पहले दिन वह अपने होस्टल के कमरे से पूजा-पाठ कर घर के कैंपस में पहुंचता है। जहां ऊंचे समाज के विद्यार्थियों को इस बात से तकलीफ है कि रिजर्वेशन के बलबूते उनकी जगह छीन कर दलित विद्यार्थियों को दे दी जाती है। सौरभ रावत को पहले दिन यह अहसास करवा दिया जाता है कि उस पर दलित होने का दाग है। जब सौरभ इसका विरोध करता है तो उसे हर कदम दलित, ऊंच- नीच, राजनीति के साथ अपने डॉक्टर बनने के सपने के टूटने का जख्म मिलता है। इसी दर्दनाक कहानी को यह फिल्म दिखाती है। संजीव जायसवाल ने अपने लेखन में उन्हीं तथ्यों को रखा है जिससे समाज परिचित है।

    Quota The Reservation

    समाज के ठेकेदारों की कहानी जाति व्यवस्था की घिनौनी सच्चाई अखबारों में सिंगल कॉलम की खबर के तौर पर आए दिन छपती रहती हैं। ऐसे में फिल्म देखते वक्त कुछ नया महसूस नहीं होता। पूरी कहानी एक नुक्कड़ नाटक की तरह दिखाई पड़ती है। स्क्रिप्ट में क्रांति,गुस्सा, आक्रोश, विरोध, प्यार, दर्द, एक्शन, दर्दनाक क्लाइमैक्स जैसे कई सारे मसाले मौजूद तो हैं, लेकिन उसका स्वाद आपके गले तक नहीं पहुंचता। आरक्षण की आग की आंच भी आप तक नहीं पहुंच पाती है। अनिरुद्ध दवे ने सौरभ रावत की भूमिका के साथ इंसाफ किया है। उनके अलावा बाकी के सभी सह कलाकार अदायगी में कच्चे दिखाई देते हैं। यह फिल्म गंभीर होने के बावजूद माथे पर बल नहीं पड़ने देती है। स्क्रिप्ट पूरी तरह से बैठी हुुई नजर आती है। निर्देशन में अनुभव की कमी झलकती है। डायलॉग भी कहानी को मजबूती देने में असहाय नजर आते हैं। फिल्म के आखिरी में केवल एक गीत है।

    क्यों देखें- जाति भेदभाव के हकीकत का प्रभाव कैसे एक विद्यार्थी के जीवन को तोड़ देता है, इसे समझने के लिए आप यह फिल्म देख सकते हैंं। कोटा जातिवाद के मुद्दे को संबोधित करता है और बाबा साहब के विचारों को फैलाने के लिए समर्पित है।

    English summary
    Here read Review of Quota The Reservation starting Anirudh Dave directed by Sanjiv Jaiswal
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