समीक्षाः गली गली चोर है

veena malik
कलाकार : अक्षय खन्ना , श्रेया सरन , मुग्धा गोडसे , सतीश कौशिक , मुरली शर्मा , अनु कपूर , विजय राज
निर्माता : विनय जैन , नितिन मनमोहन
निर्देशक : रूमी जाफरी
संगीत : अनु मलिक
सेंसर सर्टिफिकेट : यू
अवधि : 125 मिनट
रेटिंग : 2/5

गली गली चोर है की कहानी शुरू होती है भोपाल में रहने वाले भारत यानि अक्षय खन्ना से जो रामलीला में हनुमान का रोल करने के साथ-साथ पार्ट टाइम कैशियर का काम भी करता है। भारत स्कूटर पर अपनी पत्नी निशा यानि श्रेया सरन को स्कूल छोड़ने जाता है जो की टीचर है। वहीं, भारत की फैमिली में मेहमान बनकर खूबसूरत अमिता, मुग्धा गोडसे को हर वक्त इस बात का इंतजार रहता है कि भारत उसे स्कूटर पर कब ऑफिस छोड़ने जाएगा। निशा एक आदर्श पत्नी है और भारत की हर जरूरत का ध्यान रखती है लेकिन, उस पर शक भी करती है।

निशा को ऐतराज है कि उसके घर आखिर कब तक अमिता रहेगी। कई साल से गली में हो रही रामलीला में हनुमान की भूमिका करने के बाद भारत अब राम का रोल करना चाहता है लेकिन , राम का रोल लोकल एमएलए का भाई करता है जो चाहे कितनी घटिया ऐक्टिंग करे , उसे इस रोल से हटाना आसान नहीं है। ऐसे में जब चुनाव के वक्त भारत अपने खाली कमरे को लोकल एमएलए के विरोधी उम्मीदवार को चुनाव कार्यालय खोलने के लिए देता है , तो उनके बीच की खटास और बढ़ जाती है।

कहानी में मोड़ उस वक्त आता है जब भारत को हवलदार परशुराम, अनु कपूर बताता है कि उसके घर से चोरी हुआ पंखा मिल गया है और उसे पंखे की रिकवरी के लिए अदालत में आकर कुछ कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। बस यहीं से भारत का कोर्ट, पुलिस, वकील सरकारी ऑफिसों के चक्रव्यूह में फंसने और सेवा-पानी करने का ऐसा सिलसिला शुरू होता है, जो खत्म होने का नाम ही नहीं लेता। भारत को हर छोटे से छोटे काम के लिए रिश्वत देनी पड़ती है तो बाद में इस पंखे से छुटकारा पाने के लिए उसे क्या कुछ नहीं करना पड़ता।

कलाकारों की बात करें तो अक्षय खन्ना भारत के रोल में ठीक ठाक रहे। खासकर रामलीला और कोर्ट के सीन्स में अक्षय कुछ जमे हैं। फिल्म में दो हीरोइनें हैं, शक्की पत्नी के रोल में श्रेया थोड़ा प्रभावित करती हैं, लेकिन मुग्धा को इस फिल्म में बेवजह ही लिया गया। अनु कपूर, विजय राज और सतीश कौशिक ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।

रूमी ने करप्शन जैसे गंभीर मुद्दे को ऐसे ढंग से पेश किया कि सिनेमा हॉल से निकलने के बाद समझ नहीं आता कि उन्होंने कॉमिडी फिल्म बनाई है या फिर करप्शन पर। हालांकि रामलीला, पुलिस थाने और कोर्ट के कुछ सीन्स थोड़ा असर जरूर डालते हैं।

वीना मलिक का आयटम सॉन्ग फिल्म में बस मसाला डालने के लिए ही रखा गया है। अगर आप फैमिली के साथ बस टाइम पास करने और साफ सुथरी फिल्म देखने की चाहत में हैं तो यह फिल्म एकबार देख सकते हैं।

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