निराशा भरी 'आशाएं'

प्रोड्यूसर:परसेप्ट पिक्चर लिमिटेड
म्यूजिक:मोहित चौहान,प्रीतम चक्रवर्ती और शिराज़ उप्पल
कलाकार:जॉन अब्राहिम,श्रेयस तलपड़े,अनायता नायर,प्रतीक्षा लोंकर
रेटिंग : 2/5
समीक्षा : पिछले दो सालों से प्रदर्शन को तरस रही डारयेक्टर नागेश कुकुनर की फिल्म 'आशाएं' आखिर कार आज पर्दे पर आ ही गई। जैसा कि उम्मीद की जा रही थी कि फिल्म एक मैसेज पब्लिक को पहुंचायेंगी तो वैसा बिल्कुल भी नहीं है। 'आशाएं' देख कर आप निराश ही होंगें, फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं जो याद रखा जाये। हालांकि कहानी बहुत अच्छी है लेकिन फिल्मांकन कमजोर हैं। फिल्म को और अच्छा और फिल्माया जा सकता था लेकिन अफसोस फिल्म लचर पटकथा की शिकार बनीं है।
नागेश के डायरेक्शन में कमी झलकती है जिसका असर फिल्म में दिखायी पड़ता है, फिल्म के कुछ सींस ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि जबरजस्ती भरा गया है, जॉन और सोनल के इंटिमेट दृश्य उन जबरदस्ती सींस का उदाहरण है जिनकी फिल्म की कहानी से कोई लेना-देना नहीं हैं। जहां तक अभिनय की बात है तो जॉन को छोड़कर हर कोई निराश ही करता है चाहे वो सोनल सहगल हो या फिर श्रेयस तलपड़े। हां अनिता नायर में जरूर गुंजाईश दिखती है। फिल्म का संगीत कमजोर है, कोई आशा नहीं जगाता है।
जॉन ने साबित किया है, वो एक अच्छे अभिनेता है लेकिन वो भी लचर पटकथा और कमजोर डायरेक्शन का शिकार है। जिस तरह अकेला चना खेत नहीं जोत सकता है ठीक उसी तरह जॉन अपने दम पर बॉक्स आफिस पर भीड़ नहीं जुटा सकते हैं। कुल मिलाकर आशाएं को आशा नहीं जगाती है। कहना गलत न होगा 'आशाएं' से आशा नहीं हैं।
देखें : आशाएं की तस्वीरें
कहानी : राहुल(जॉन अब्राहिम)से जो अपनी गर्लफ्रेंड नफीसा(सोनल)के साथ अपनी अमीरी का जश्न मनाता है। राहुल जो कि पेशे से एक जुआरी है जुएं में बहुत बड़ी रकम जीत जाता है। इतनी बड़ी रकम मिल जाने के बाद राहुल नफीसा को शादी करने का प्रस्ताव देता है और दोनों सगाई करने का फैसला कर लेते हैं, मगर दुर्भाग्यवश सगाई की पार्टी के दौरान राहुल अचानक से बेहोश होकर गिर जाता है, उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाया जाता है जहां पता चलता है उसे लंग कैंसर है, डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादा सिगरेट की लत की वजह से राहुल लंग कैंसर का शिकार हो चुका है, और वो चंद दिनों का मेहमान है।
लंग कैंसर होने की बात जानकर राहुल बहुत निराश तो हो जाता है। राहुल की गर्लफ्रेंड नफीसा उसे लंग कैंसर होने की बात जानने के बावजूद उससे शादी करना चाहती है मगर राहुल इस बात से इनकार कर देता है, और उससे दूर चला जाता है ताकि उसकी गर्लफ्रेंड उसे भूलकर अपना भविष्य बना सके।
एक नए शहर में जाकर उसकी मुलाक़ात कई लोगों से होती है जिसमें से एक पद्मा(अनिता नायर)होती है, अनीता को भी लंग कैंसर होता है, यहाँ राहुल की मुलाक़ात जितने भी लोगों से होती है उन्हें कोई न कोई बीमारी होती है और सब अपनी आखिरी सांसें गिन रहे होते हैं लेकिन सभी आशावादी हैं कोई निराश नहीं है।
यही उसकी मुलाक़ात होती है मधु(फरीदा जलाल)से जो कि एड्स की मरीज है, जैसा की समाज में भ्रान्ति है कि लोग एड्स मरीज से बात करना,मिलना जुलना बिलकुल पसंद नहीं करते, मगर राहुल मधु उसकी तकलीफ को समझकर उसके साथ दोस्ती कर लेता है, वहीं कैंसर कि मरीज पद्मा राहुल को बहुत पसंद करने लग जाती है और दोंबों बहुत अच्छे दोस्त बन जाते है। यहां राहुल को जिंदगी के बारे में एक नया फलसफा मिलता है जितनी मिली है उसे खुशी-खुशी सार्थक ठंग से जीयो।


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