'रश्मि रॉकेट' रिव्यू: दमदार विषय और परफॉर्मेंस के साथ सही ट्रैक पर दौड़ती है तापसी पन्नू की फिल्म
निर्देशक- आकर्ष खुराना
कलाकार- तापसी पन्नू, प्रियांशु पेन्युलि, अभिषेक बनर्जी, सुप्रिया पाठक, सुप्रिया पिलगांवकर, मनोज जोशी आदि
कहानी- नंदा पेरियासामी
प्लेटफॉर्म- ज़ी 5
कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिस पर बनी फिल्म देखने का इंतजार होता है। यह देखने की दिलचस्पी होती है कि निर्देशक ने विषय को किस तरह पटकथा में पिरोया होगा। 'रश्मि रॉकेट' भी एक ऐसी ही फिल्म है, जो स्पोर्ट्स में होने वाले 'जेंडर टेस्टिंग' प्रक्रिया के मुद्दे पर बनी है। बता दें, दुनियाभर में महिला एथलीटों को नियमित रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ता है, और उनका लिंग परीक्षण किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप ज्यादातर मौकों पर समाज में उनकी बेइज़्ज़ती होती है, साथ ही उनका करियर बर्बाद हो जाता है।
तापसी पन्नू अभिनीत यह फिल्म जेंडर टेस्टिंग की प्रक्रिया के माध्यम से समाज के बनाए ढ़ांचे में फिट होने वाली 'स्त्रीत्व' की परिभाषा पर सवाल उठाती है। क्या निर्देशक सही सवाल उठाने में सफल रहे हैं? हां, बिल्कुल! खास बात है कि फिल्म शुरु से अंत तक कहीं भी अपने विषय से भटकती नहीं है। साथ ही रश्मि रॉकेट अपने विषय के माध्यम से हर उस महिला को सलाम करती है जो रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने दिल की आवाज सुनने की हिम्मत करती हैं।

"हार जीत तो परिणाम है, कोशिश हमारा काम है.." छत पर पतंग उड़ाती रश्मि (तापसी पन्नू) से उसके पिता कहते हैं। और रश्मि इन शब्दों को जिंदगी भर के लिए गांठ मार लेती है। यही शब्द उसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ने का हौसला देते हैं.. जो है उसके पहचान की लड़ाई, उसकी प्रतिष्ठा की लड़ाई।


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