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    पानीपत फिल्म रिव्यू: मराठों की अद्भुत वीरता की कहानी, बोर नहीं करेगा इतिहास का यह चैप्टर

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    Rating:
    2.5/5

    निर्देशक- आशुतोष गोवारिकर

    कलाकार- अर्जुन कपूर, कृति सैनन, संजय दत्त, मोहनीश बहल, पद्मिनी कोल्हापुरी

    पानीपत के तीसरे युद्ध पर आधारित आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'पानीपत' वीर मराठाओं को पूरी तरह से सम्मानित करती है। मराठों और अफगानों के बीच लड़ी गई यह लड़ाई ऐतिहासिक है और निर्देशक ने इसे बखूबी उतारा है। अर्जुन कपूर, कृति सैनन और संजय दत्त अभिनीत यह फिल्म मराठों की वीरता दिखाने में सफल रही है, लेकिन भावनाओं की कमी खली है।

    फिल्म की कहानी

    फिल्म की कहानी

    मराठा और अफगानों के बीच हुई पानीपत की यह लड़ाई जीत की कहानी नहीं है। लेकिन इतिहास में इसे मराठों की अद्भुत वीरता के लिए जाना जाता है। सदाशिवराव भाऊ (अर्जुन कपूर) के नेतृत्व में मराठों ने उदगिरी किला पर फतेह हासिल कर लिया और वहां से निज़ामशाही की हुकुमत खत्म की। 18वीं सदी में हिंदुस्तान में मराठा साम्राज्य का बोलबाला था। नाना साहेब पेशवा (मोहनीश बहल) बढ़ते साम्राज्य और लगातार मिलती जीत पर खुश थे। लेकिन उनकी खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिकी क्योंकि अफगानिस्तान का शासक अहमद शाह अब्दाली (संजय दत्त) हिंदुस्तान अब देहली पर अपनी कब्जा जमाना चाहता है। मुगल शासक नाज़िब- उद-दौला हिंदुस्तान से मराठों का साम्राज्य खत्म करने की साजिश में अहमद शाह अब्दाली की मदद करता है और यहीं से बदलता है इतिहास।

    अफगानों को हिंदुस्तान से खदेड़ने के लिए मराठा सेना देहली की ओर रुख करती है। पुणे से देहली के सफर में सदाशिव राव के साथ उनकी पत्नी पार्वती बाई (कृति सैनन), शमशेर बहादुर (बाजीराव- मस्तानी के बेटे) और विश्वास राव (नाना साहेब पेशवा के बेटे) भी हैं। अब्दाली के लाख सेना के मुकाबले मराठों के पास महज 45 हजार की सेना है। ऐसे में वो उत्तर भारत के दूसरे राजाओं को अपने साथ इस युद्ध में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि अब्दाली से हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सके। ऐसे में कुछ राजाओं से उन्हें मदद मिलती है और कुछ से मिलता है विश्वासघात। तमाम चुनौतियों को पार करते हुए पानीपत के मैदान में अफगानी सेना और मराठा आमने सामने आते हैं। 14 जनवरी 1761 को लड़ी गई इस लड़ाई में मराठा योद्धाओं ने अपना ऐसा कौशल दिखाया था कि युद्ध के बाद अहमद शाह अब्दाली ने भी उनके हिम्मत और दृढ़ता की दाद दी थी। मराठा यह युद्ध हारकर भी जीत गए थे।

    अभिनय

    अभिनय

    सदाशिव राव के किरदार में अर्जुन कपूर की मेहनत और सच्चाई दिखती है। निर्देशक ने उन्हें अपने कंफर्टेबल ज़ोन से निकलकर चमकने का अच्छा मौका दिया है और अर्जुन ने न्याय किया है। वहीं, पार्वती बाई बनीं कृति सैनन दमदार लगी हैं। गंभीर दृश्यों से लेकर युद्ध कला और संवाद में ठहराव के साथ कृति ने सराहनीय काम किया है। फिल्म के सबसे कमज़ोर पक्ष संजय दत्त लगे हैं। अहमद शाह अब्दाली के किरदार में उन्हें क्रूर और हिंसक दिखाने की कोशिश की गई। लेकिन संजय दत्त अपने व्यक्तित्व से निकलकर अब्दाली में तब्दील होने असफल रहे हैं। सहायक भूमिकाओं में मोहनीश बहल, पद्मिनी कोल्हापुरी, साहिल सलाठिया, कुणाल कपूर, नवाब शाह, अभिषेक निगम ने अच्छा काम किया है।

    निर्देशन

    निर्देशन

    लगान, स्वदेस, जोधा अकबर जैसी बेहतरीन फिल्में देने वाले निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने एक बार फिर इतिहास के एक महत्वपूर्ण चैप्टर को दिखाने की कोशिश की है और सफल रहे हैं। फिल्म का फर्स्ट हॉफ कुछ धीमा चलता है, लेकिन सेकेंड हॉफ में फिल्म जोर पकड़ती है और क्लाईमैक्स में प्रभावित कर जाती है। खासकर युद्ध सीन्स काफी अलग दिखाई पड़ते हैं क्योंकि निर्देशक ने कम से कम वीएफएक्स (VFX) का इस्तेमाल किया है। लिहाजा, यह कुछ raw लगता है और शायद यही बात इसे इतिहास पर बनी फिल्मों से अलग करती है। पानीपत के मैदार में बिखरे खून से लथपथ सैनिकों को देखकर आपको भी उस जंग में होने का अहसास होगा। हालांकि किरदारों के भाषा पर थोड़ा और काम किया जा सकता था।

    तकनीकि पक्ष

    तकनीकि पक्ष

    सी के मुरलीधरन ने निर्देशक के इस भव्य प्रोजेक्ट को बेहतरीन शूट किया है। पानीपत के मैदान में आमने सामने खड़ी मराठा और अफगानी सेना को देखना एक अनुभव देता है। Steven Bernard की एडिटिंग कुछ हिस्सों को बेहतरीन बना गई है। हालांकि 2 घंटे 53 मिनट लंबी इस फिल्म को थोड़ा छांटा जा सकता था।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म का संगीत अजय- अतुल ने दिया है। यह औसत है। फिल्म में महज तीन गाने ही हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं। मर्द मराठा कुछ वक्त के लिए आपके दिमाग में जगह बनाता है, लेकिन लंबे समय तक गाने ध्यान आकर्षित नहीं करते।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    आशुतोष गोवारिकर ने अपनी फिल्म में पानीपत के तीसरे युद्ध को जिस प्रकार दिखाया है, यह फिल्म पूरे परिवार के साथ एक बार जरूर देखी जा सकती है। इतिहास के इस अहम पन्ने को देखना दिलचस्प अनुभव होगा। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 2.5 स्टार।

    English summary
    Arjun Kapoor, Kriti Sanon and Sanjay Dutt starring film Panipat salutes bravery of Marathas, but lacks emotion. Film directed by Ashutosh Gowariker.
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