MSG फिल्म समीक्षा- हर किसी को इंसान बनाने आये मैसेंजर ऑफ गॉड

आये दिन बलात्कार, दंगा-फसाद, चोरी-चकारी, लूट-खसोट और अत्याचार की बढ़ती वारदातों को देख मैसेंजर ऑफ गॉड जमीन पर उतरा। उसका एक ही मकसद है- हर किसी को इंसान बनाने का। वेश्या को वेश्या मत को, वो भी बेटी है और उसे बहू बनाओ, दूसरे धर्म के लोग आपके भाई हैं, बहने हैं....

बर्फ से ढंकी पहाड़ियों की चोटी पर से अगर कोई अवतरित होकर धरती पर कदम रखे तो भला उसे आप क्या कहेंगे, इंसान या भगवान। जाहिर है इन ऊंची पहाड़‍ियों पर तो भगवान ही रहते हैं तो हमारे संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी भी इंसान नहीं भगवान ही हुए। कम से कम इनकी फिल्म एमएसजी के हिसाब से तो यही सच है। तो आइये हम भी जानते हैं कि क्या है आखिर ये एमएसजी और क्या मैसेज देने की कोशिश की है संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान ने इस फिल्म के जरिये।

एमएसजी को अगर संत गुरमीत जी का पब्लिसिटी स्टंट कहा जाए तो शायद गलत ना होगा। खुद को भगवान ना सही लेकिन उनसे कम भी नहीं जताया है संत जी ने एमएसजी फिल्म में। उनके हाथों में, उनकी आंखों में इतनी शक्ति है कि वो एक साथ एक ही बार में हजारों लोगों की जान बचा सकते हैं और साथ ही दुश्मनों को एक ही बार में खत्म भी कर सकते हैं। यहां तक कि दुश्मनों की सोच बदलकर उन्हें एक अच्छा सुधऱा हुआ इँसान भी बना सकते हैं।

लेकिन फिल्म देखने के बाद एक सवाल दिल में उठा कि आखिर अगर संत जी इतने ही पावरफुल थे तो भला उन्हें किसी बॉडीगार्ड या सुरक्षाकर्मियों की जरुरत ही क्यों है। इतना ही नहीं बल्कि अगर वो लोगों को देखकर वो सही और गलत का फैसला कर सकते हैं तो वो भला अपने खिलाफ साजिश रच रहे लोगों को क्यों नहीं पहचान पाते। खैर आइये बात करते हैं फिल्म के कुछ खास पहलुओं के बारे में।

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