बड़ी तीखी है 'मिर्च'

By अंकुर शर्मा

mirch
बैनर : रिलायंस बिग पिक्चर्स
निर्देशक : विनय शुक्ला
संगीत : मोंटी शर्मा
कलाकार : श्रेयस, कोंकणा सेन शर्मा, शहाना गोस्वामी, राइमा सेन, राजपाल यादव, बोमन ईरानी, प्रेम चोपड़ा, सौरभ शुक्ला, टिस्का चोपड़ा, इला अरुण, अरुणोदय सिंह
रेटिंग : 2/5

समीक्षा : प्यार, सेक्स और धोखा आज कल कि कहानियों के मुख्य हिस्से होते हैं। निर्देशक विनय शु्क्ला ने भी इसी बिंदुओं पर काम किया है लेकिन उनका अपने विचारों को व्यक्त करने का तरीका थोड़ा अलग है। फिल्म चार कहानियों में बंटी हुई है। निर्देशक ने पूरी कोशिश की है वो हर कहानी को अलग- अलग रखे, लेकिन, यह प्रयोग ज्यादा कामयाब होता नजर नहीं आया। हर कहानी को जोड़ने वाली कहानी एक कमजोर कड़ी साब‍ित होती है, जिस पर थोड़ी सी मेहनत की जा सकती थी। स्क्रिप्‍ट राइटर यहां चूक कर जाते हैं। यहां उनके पास आइडिया की कमी साफ़ नजर आती है। इस फिल्‍म को एक बोल्‍ड फिल्‍म के तौर पर

प्रचारित किया गया था। और, विषय और उसके ट्रीटमेंट को लेकर यह अपनी अपेक्षाओं पर खरी भी उतरती है। फिल्‍म में कई लव-मेकिंग सीन्‍स हैं, लेकिन ये सीन कहानी की मांग के अनुसार ही लगते हैं। ये कहीं से भी ठूंसे हुये नहीं लगते। जिसके लिए निर्देशक को धन्यवाद देना चाहिए। राइमा सेन पहली और तीसरी कहानी का हिस्सा है। लेकिन, अपनी भाव-भंगिमा के दम पर वो किसी तरह का प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही हैं। कोंकणा दूसरी और चौथी कहानी मे हैं। हमेशा की तरह उनका अभिनय शानदार रहा है। कोंकणा के साथ ईला अरुण का अभिनय अच्छा है।

प्रेम चोपड़ा बिल्कुल प्रभाव नहीं डालते हैं, वहीं एक बिज़नेसमैन के तौर पर बोमन इरानी का कोई जोड़ नहीं है। श्रेयस तीसरी कहानी में राइमा के पति के तौर पर नज़र आते हैं, उन्‍होंने भी अपनी भूमिका के साथ न्‍याय किया है। नौकर के रूप में अरुणोदय सिंह भी ठीक लगे हैं। फिल्म का निर्देशन अच्छा है। जब कि संगीत में कोई दम नहीं है।

कहानी : फिल्म में चार कहानियां है।

कहानी नं 1 : एक बढ़ई और उसकी पत्‍नी के बीच बेइंतहा मोहब्‍बत है। दोनों को एक दूसरे पर बहुत यकीन है। लेकिन, एक दिन बढई का दोस्‍त उसके कान भर देता है। वो उसे कहता है कि जिस पत्‍नी पर वो जान लुटाता है, वह चरित्रहीन है। इसके बाद वो अपनी पत्नी की वफादारी की परीक्षा लेता है। वो अपनी पत्नी से बोलता है कि वो एक महीने के लिए राजा के महल जा रहा है पर जाता नहीं और अपने ही घर में छुप कर रहता है। इस झूठ के जरिये वो अपनी पत्‍नी पर नजर रखना चाहता है।

कहानी नं. 2 :
दूसरी कहानी लेकर जाती है राजस्‍थान के एक महल में। यहां के एक राजा की उम्र तो 70 साल है, पर वो शादी करता है एक जवान लड़की से। शादी के बाद रानी का दिल राजमहल के ही एक शाही नौकर (अरुणोदय सिंह) पर आ जाता है। रानी उसे रिझाने के प्रयास करने लग जाती है। क्‍योंकि राजा औलाद पैदा नहीं कर सकता है, इसलिये रानी उस नौकर को हासिल करने में जुट जाती है। नौकर रानी की बात मानने के लिये तैयार हो जाता है, लेकिन इसके लिये वो तीन शर्तें रख देता है। पहली दो शर्तें तो रानी पूरी कर देती है, लेकिन तीसरी शर्त बेहद मुश्किल है। इसे पूरा कर पाना रानी के लिये आसान नहीं है। नौकर की शर्त है कि रानी राजा के सामने उससे शारीरिक संबंध बनायेगी।

कहानी नं.3 :
मुंबई में रहने वाले एक आदमी अपनी पत्नी पर सिर्फ इसलिए शक करने लगता है क्योंकि उसके एक दोस्त की पत्नी उसे धोखा दे देती है। यह बात उसके दिलो -दिमाग में घर कर गयी है। अपनी पत्‍नी की सच्‍चाई जानने के लिये वो किसी और का रूप धरकर उसके साथ फलर्ट करता है। लेकिन, इस परीक्षा में उसकी पत्‍नी पास हो जाती है। लेकिन, जब उसे इस बात का पता चलता है कि उसका पति ही उस पर शक कर रहा था और उसी ने यह सब किया, तो उसे बेहद दुख पहुंचता है। वो भावनात्‍मक रूप से टूट जाती है। इसी के चलते वो बाहर सहारा तलाशने लगती है। लेकिन, इस चक्‍कर में वो एक दिन उसका पति उसे रंगे हाथ किसी और के साथ पकड़ लेता है।

कहानी नं.4 : चौथी कहानी एक बिज़नेसमैन की है जिसे औरतों का बहुत शौक है। वो कई सेक्‍स वकर्स के साथ संबंध रखता है। लेकिन, उसके पैर के नीचे से ज़मीन उस दिन सरक जाती है जिस दिन उसकी पत्‍नी ही बतौर सेक्‍स वर्कर अपने पति के कमरे में पहुंच जाती है। फिल्‍म को चारों कहानियां आगे बढ़ाती हैं। कमाल की बात यह है कि सभी औरतें रंगे हाथ पकड़ी जाती हैं पर बड़ी ही आसानी से निकल भी आती हैं।

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