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    'लव हॉस्टल' फिल्म रिव्यू- इस फीकी थ्रिलर कहानी को संभालते हैं विक्रांत मैसी और सान्या मल्होत्रा

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    Rating:
    2.5/5

    निर्देशक- शंकर रमन
    कलाकार- सान्या मल्होत्रा, विक्रांत मैसी, बॉबी देओल
    प्लेटफार्म- ज़ी 5

    "पता नहीं क्या महसूस कर रही हूं, खुश भी हूं और गुस्सा भी, खुश हूं क्योंकि प्यार मिल गया और गुस्सा क्योंकि परिवार छुट गया", घर से भागकर शादी करने के बाद 'लव हॉस्टल' में आई ज्योति कहती है। निर्देशक शंकर रमन ने इस फिल्म के साथ फिर 'हॉनर किलिंग' का मुद्दा उठाया है और पहले दृश्य से ही वे जाहिर कर देते हैं ये कहानी खून खराबे से भरपूर होने वाली है। फिल्म हत्या से ही शुरु होती है और हत्या पर ही खत्म। आज के समय में भी खाप पंचायतें और परिवार ऑनर किलिंग को लेकर क्या सोच रखती हैं और क्या फैसला लेती हैं, इसी के इर्द गिर्द घूमती है फिल्म।

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    अहमद (विक्रांत मैसी) और ज्योति (सान्या मल्होत्रा) यह जानते हुए भी कि उनके परिवार उनके अंतर-धार्मिक संबंधों को स्वीकार नहीं करेंगे, घर से भाग जाते हैं और अदालत में शादी कर लेते हैं। निर्देशक ने दोनों मुख्य किरदारों की दुनिया के बीच का अंतर स्पष्ट दिखाया है। ज्योति एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और राजनेता के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वहीं, अहमद का परिवार कसाईखाना चलाता है और उसके पिता को आतंकवादी बताकर झूठे केस में जेल में डाल दिया गया है। लेकिन दोनों बेइंतहा प्यार में हैं। यह जानते हुए कि ज्योति के परिवार वाले उन दोनों के खिलाफ कोई भी कदम उठा सकते हैं, दोनों सरकार द्वारा बनाए गए रिफ्यूजी होम में शरण लेते हैं। जिसे वहां की पुलिस कहती है- 'लव हॉस्टल'। एक झड़झड़ी सी इमारत, जिसमें घर से भागे जोड़े अपने परिवार वालों से बचने के लिए छिपकर रहते हैं।

    कहानी में दूसरी ओर खाप परंपरा की दुहाई देने वाली ज्योति की दादी एक कॉन्ट्रक्ट किलर डागर (बॉबी) इस जोड़ी की सुपारी देती है। डागर खुद को समाज सुधारक बताता है। एक दृश्य में एक पुलिसकर्मी डागर की तुलना यमराज से करता दिखता है। ज्योति और आशु इस यमराज का शिकार बन पाते हैं या नहीं, यह कहानी का बाकी हिस्सा है।

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    अभिनय की बात करें तो सान्या, विक्रांत और बॉबी अपने किरदारों के प्रति ईमानदार रहे हैं। निर्देशक ने सभी किरदारों के पीछे एक कहानी रखी है, जो आपको जोड़े रखती है। सान्या और विक्रांत की जोड़ी प्यारी लगी है। दोनों ने किरदारों की सभी भावनाओं को जड़ से पकड़ा है, चाहे वो डर का हो, या प्यार, आघात, दुविधा और बेबसी का हो।

    लेकिन फिल्म जहां कमजोर पड़ती है वो है लेखन और निर्देशन। ऑनर किलिंग जैसे विषय पर कई हिंदी फिल्में बन चुकी हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को मजबूती से पकड़ा है। 'लव हॉस्टर' उन फिल्मों से आगे नहीं बढ़ पाती है। यह अंतर जार्तीय और अंतर धार्मिक विवाह के साथ साथ समलैंगिक संबंधों के मुद्दे को भी छूती है। लेकिन क्या प्रभावित कर पाती है? नहीं। पहले हॉफ में फिल्म अच्छी गति में चल रही होती है, किरदार और क्रूरता आपको बाधें रखते हैं, कहानी में एक टेंशन महसूस होता है। लेकिन धीरे धीरे फिल्म आपको इमोशंस से पकड़ खोने लगती है। बॉबी देओल का किरदार जिस तरह यहां- वहां लोगों को मारते फिरते दिखता है, वह कुछ मौकों पर हास्यास्पद लगा है। नितिन बैद की एडिटिंग और विवेक शाह की सिनेमेटोग्राफी फिल्म को थोड़ा बेहतर बनाती है।

    मजबूत स्टारकास्ट और विषय होने के बावजूद 'लव हॉस्टल' कनेक्ट होने से चूकती है। कमजोर लेखन और निर्देशन निराश करती है। फिल्मीबीट की ओर से 'लव हॉस्टल' को 2.5 स्टार।

    English summary
    Love Hostel Movie Review: Sanya Malhotra, Vikrant Massey and Bobby Deol starrer this film is streaming on Zee5. Directed by Shanker Raman this film is weak in writing.
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