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    मीठी कम खट्टी ज्यादा: खट्टा मीठा

    By नेहा नौटियाल
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    Khatta Meetha
    कलाकार: अक्षय कुमार, त्रिशा कृष्णन, राजपाल यादव, टीनू आनंद, कुल भूषण खरबंदा, जॉनी लीवर
    निर्माता :अक्षय कुमार
    निर्देशक: प्रियदर्शन
    रेटिंग 2.5/5

    प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी जहां साथ हो वहां आप हंसे बिना रह नहीं सकते। अगर अक्षय बॉलीवुड के कॉमेडी किंग हैं तो प्रियदर्शन कॉमेडी फिल्मों के मास्टर हैं। प्रियदर्शन और अक्षय की 'हेरा-फेरी' और 'भूल-भूलैया' जैसी बेहतरीन फिल्में दर्शकों को आज भी याद हैं।

    फिल्म का मुख्य किरदार सचिन टिच्कुले (अक्षय कुमार) एक ठेकेदार की भूमिका मे हैं। हर किसी की तरह टिच्कुले का सपना भी बड़ा आदमी बनना है। मगर वो जिस भी काम के लिए जाता है वहां उसे घूस देनी पड़ती है और टिच्कुले के पास घूस देने के पैसे नहीं हैं।

    फिल्म में (त्रिशा कृष्णन) ने गहना गणपुले की भूमिका निभाई है। जो टिच्कुले की एक्स गर्लफ्रेंड होती है और बाद में शहर की म्युनिस्पल कमिशनर बन जाती है। गहना ना सिर्फ अपने पुराने प्रेमी टिच्कुले से नफरत करती है बल्कि उसे घूस देने वालों से भी उतनी ही नफरत है।

    हंसी मजाक के जरिए फिल्म में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे पर चोट करने की कोशिश की गई है। दरअसल फिल्म सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर व्यंग करती है, जहां नीचे से लेकर ऊपर तक बिना घूस के कोई काम करवाना असंभव है।

    फिल्म में बदहाल सड़कों और गड्ढों को लेकर सरकार पर खूब व्यंग किए गए हैं। फिल्म में कई सारी समस्याओं को एक साथ दिखाने की कोशिश में प्रियदर्शन भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे पर फोकस करने में चूक गए हैं। अक्षय कुमार असली के कॉमेडी किंग हैं।

    वक्त के साथ अक्षय के अभिनय में और निखार आया है। दरअसल अब अक्षय जानते हैं कि वो किस तरह के किरदारों में फिट बैठते हैं। फिल्म में उनका अभिनय बेहतरीन है और लगभग पौने तीन घंटे की फिल्म में कहीं भी अक्षय खुद को दोहराते नहीं हैं। इसलिए फिल्म में कॉमेडी की ताजगी बरकरार रहती है।

    जब कॉमेडी बात हो तो राजपाल यादव का चेहरा खुद ब खुद आंखों के सामने आ जाता है। इसमें कोई शक नहीं राजपाल कमाल के अभिनेता हैं। राजपाल की लाजवाब एक्टिंग का कमाल ये है कि उनके डॉयलाग भी शुरु नहीं होते और सिर्फ उनके चेहरे के भाव देख कर हंसी आने लगती है।

    कुल मिला कर खट्टा मीठा एक औसत फिल्म है और हर औसत फिल्म की तरह इसकी कहानी पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देकर इसे और बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म का संगीत खास नहीं है और गाने दृश्यों के बीच जबरदस्ती ठूंसे हुए लगते हैं। प्रियदर्शन की इस फिल्म के एक बार दर्शन किए जा सकते हैं।

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