दिल को छू लेने वाली 'खेलें हम जी जान से'

By Ajay Mohan

निर्देशक: आशुतोष गोवारिकर
निर्माता: सुनीता गोवारिकर, अजय बिजली, संजीव के बिजली
संगीत: सोहेल सेन
कलाकार: अभिषेक बच्‍चन, दीपिका पादुकोण, विशाखा, सिकंदर खेर, श्रेयस पंडित, अमीम गाजी
रेटिंग: 4/5

समीक्षा: लगान, जोधा अकबर जैसी हिट फिल्‍मों में निर्देशक अशुतोष गोवारिकर ने लोगों को इतिहास के पन्‍ने पर्दे पर ऐसे दिखाए कि आज भी एक-एक सीन लोगों के जहन में बसा हुआ है। ठीक उसी प्रकार के प्रयास आशुतोष ने 'खेलें हम जी जान से' में किया। सच पूछिए तो आशुतोष और उनकी टीम ने इस फिल्‍म में जी जान से मेहनत की है और वो मेहनत रंग लायी भी है।

'खेलें हम जी जान से' फिल्‍म मनीनी चटर्जी के नॉवेल 'डू एंड डाई: दि चित्‍तगोंग अपराइजिंग 1930-34' पर आधारित है। इस फिल्‍म के माध्‍यम से आशुतोष आपको एक बार फिर इतिहास में वापस ले जाने के प्रयास किए हैं। सही मायने में मॉडर्न जमाने में पुराने जमाने का सेट, वेशभूषा, आदि प्रस्‍तुत करना आसान नहीं था। उस हिसाब से डायलॉग और फिल्‍म का चित्रण इन सभी पर आशुतोष ने सफलता हांसिल की है।

किताब के पन्‍नों पर भी यह कहानी लिखी है, लेकिन पर्दे पर आने के बाद उस जमाने के मुद्दों की गंभीरता समझ में आती है। हालांकि आशुतोष ने कहानी को आज के परिवेश में दिखाने के लिए नॉवेल के कुछ अंशों में परिवर्तन किया है। फिल्‍म के नाम से भले ही लोग इसे हलके में लेंगे, लेकिन फिल्‍म देखने के बाद आप तारीफ किए बिना नहीं रहेंगे।

क्लिक करें- 'खेलें हम जी जान से' की तस्‍वीरें

इस फिल्‍म में दीपिका पादुकोण ने एक बंगाली युवती की भूमिका निभाई है। कहानी ब्रिटिश काल की है, जिसमें चित्‍तगोंग (जो अब बांग्‍लादेश में है) की क्रांति ने पूरे देश पर असर दिखाया। चित्‍तगोंग के 64 लोगों के एक दल ने इतिहास रच दिया। इस दल का नेतृत्‍व किया है सूर्या सेन (अभिषेक बच्‍चन) ने, जो पहले एक शिक्षक था। सूर्या वो हीरो है, जो इतिहास की मुख्‍यधारा में आपको शायद नहीं मिलेगा। फिल्‍म की शूटिंग गोवा में हुई है। फिल्‍म में चित्‍तगोंग के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जीत हांसिल की।

फिल्‍म में कल्‍पना दास की भूमिका निभाई है दीपिका पादुकोण ने। मॉडर्न गर्ल होते हुए भी दीपिका ने अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है। क्रांति की लड़ाई में वो जिस तरह आगे दिखी हैं, उससे यह साफ हो गया कि दीपिका अब हर प्रकार के रोल में फिट बैठ सकती हैं। फिल्‍म में अन्‍य लोगों ने भी अपने किरदारों के साथ इंसाफ किया है। फिल्‍म का संगीत लोगों के अंदर देश भक्ति की भावना भरने में सफल हुआ है।

कुल मिलाकर यदि आप लगान को आज भी भूल नहीं पाए हैं, तो 'खेलें हम जी जान से' जरूर देखने जाईये। यह फिल्‍म इतिहास के उन रमतवीरों को सलाम करती है, जिन्‍होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी लेकिन इतिहास की मुख्‍यधारा से नहीं जुड़ पाए।

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