कांची फिल्म रिव्यू- तराशे हुए नगीने मगर माला में दम नहीं!
कांची फिल्म की कहानी शुरु होती है उत्तरांचल के एक गांव कोशम्पा से। कोशम्पा में कुछ रिटायर्ड फोजियों के बच्चे और उनका परिवार रहता है। कांची (मिष्ठी) के पिता एक वॉर में मारे जाते हैं और उसकी मां, छोटी बहन कोशम्पा में रहते हैं। वहीं कार्तिक उस गांव में एक मिलिट्री कैंप चलाता है और कांची से प्यार भी करता है। उस गांव की जमीन को हथियाने के लिए शहर से एक बडे़ राजनीतिज्ञ का पूरा परिवार वहां शिफ्ट होता है जिसमें ऋृषि कपूर, मिथुन चक्रवर्ती और मिथुन का बेटा यानी रिषभ शामिल है। रिषभ को कांची से प्यार हो जाता है और वो उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। लेकिन कांची की शादी कार्तिक से तय होती है।
रिषभ का परिवार कांची को भूल जाने की सलाह देता है लेकिन रिषभ कांची को नहीं भूल पाता। फिर आता हैं काची की सीधी साधी जिंदगी में एक ऐसा तूफान जो उसे गांव की जमीं से निकालकर मुंबई पहुंचा देता है और वो अकेले ही इस राजनीतिक परिवार को टक्कर देती है। आखिर क्या हुआ कांची की जिंदगी में और वो कैसे पहुंच गयी मुंबई। क्या वो अपना बदला ले सकी। क्या पुलिस कांची को पकड़ सकी। इन सभी रहस्यों से परदा उठाने के लिए आपको फिल्म ही देखनी होगी।
देखें या नहीं
कांची फिल्म ऐसे फिल्म नहीं है जिसे देखने के लिए लोग बेहद उत्सुक हैं। लेकिन सच तो ये है कि भले ही फिल्म बनाने में भले ही कहीं कहीं कुछ ऐसी गलतियां हुई हैं जिनकी वजह से फिल्म कहीं कहीं ज्यादा खिंची हुई और थोड़ी बिना किसी सिर पैर के नज़र आती है। लेकिन फिल्म में परफॉर्मेंस गजब की है। खासतौर पर ऋृषि कपूर ने इतनी जबरदस्त एक्टिंग की है कि कांची फिल्म देखते समय बार बार उन्हीं को देखने की इच्छा जाग रही थी। ऋषि कपूर और मिथुन की जोडी़ कमाल की लगी है। तो कुल मिलाकर फिल्म भले ही कुछ खास ना हो लेकिन फिल्म की लोकेशन और अदाकारी फिल्म को वन टाइम जरुर बनाती है।
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