फिल्म समीक्षा- सिर्फ आंखों के लिए बनी है जिस्म 2
मुंबई। अगर 'जिस्म 2' को कोई बहरा भी देखने जाए तो शायद वो भी पूरी फिल्म का मजा ले सकता है क्योंकि फिल्म में सन्नी लियोन के जिस्म की नुमाईश के अलावा और कोई भी प्लस प्वाइंट नहीं है। फिल्म देखते समय बस आपकी आंखें खुली होनी चाहिए बाकी कान और दिमाग बंद हो तो कोई बात नहीं। ना कहानी का कोई पता ना ही एक्टिंग की समझ सिर्फ और सिर्फ सन्नी के जिस्म के बल पर ही फिल्म चल सकती है।
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कहानी- फिल्म की कहानी की शुरुआत ही होती है इज्मा (सन्नी लियोन) के जिस्म के साथ होटल के बेड पर पूरी रात बिताने के बाद सुबह सन्नी की आंख खुलती है। कुछ समय बाद फिल्म की कहानी में इंटैलिजेंस ऑफिसर अयान (अरुणोदय सिंह) की एंट्री होती है वो और उसका बॉस (आरिफ जकारिया) इज्मा को कबीर (रणदीप हुड्डा) जो कि एक मुजरिम और खूनी है के करीब जाकर उसे अपने प्यार के जाल में फंसा कर पुलिस के हवाले करने के लिए हायर करते हैं। इस काम के लिए सन्नी को 10करोड़ रुपये देने को कहा जाता है।
दूसरी तरफ इज्मा और कबीर पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं। इज्मा को अपनी पुरानी जिंदगी याद आती है जब वो और कबीर एक दूसरे के साथ थे और खुश भी लेकिन कबीर उसे छोड़ के चला गया था। उस पुराने ज़ख्म का बदला लेने के लिए इज्मा कबीर के पास जाने को तैयार हो जाती है। इज्मा और अयान एक दूसरे के मंगेतर के रुप में श्रीलंका में जाकर कबीर के सामने वाले घर में रहने लगते है। पहले तो कबीर इज्मा को पहचानने से भी इंकार कर देता है लेकिन फिर बार बार इज्मा के पास आने से वो अपने आप को रोक नहीं पाता।
ऑफिसर्स बताते हैं कि कबीर पहले उन्हीं के साथ काम करता था लेकिन बाद में मसीहा बनने के चक्कर में वो बाकी पुलिस ऑफिसर्स और मिनिस्टरों के खिलाफ हो जाता है। ऑफिसर्स सिर्फ कबीर को मारना ही नहीं चाहते हैं बल्कि वो उसके लैपटॉप में मौजूद खुफिया जानकारी भी हासिल करना चाहते हैं। कबीर इज्मा के करीब जाने से खुद को रोक तो नहीं पाता था लेकिन साथ ही उसे इज्मा पर शक भी रहता है। फिल्म का रुख तब बदलता है जब कबीर इज्मा से उससे शादी करने के लिए कहता है। इज्मा जो कि अभी तक कबीर को अपने जाल में फंसाने में नाकामयाब रहती है साथ ही कहीं ना कहीं कबीर को आज भी प्यार करती है बहुत सोचने के बाद कबीर से शादी के लिए हां कर देती है।
फिल्म की कहानी में कुछ खास प्रयोग नहीं किया गया है अगर फिल्म का कोई भी अलग पहलू है तो वो है सन्नी का जिस्म। कहानी में कई ऐसे दृष्य फिल्माए गए हैं जिनका कोई सिरपैर नहीं है जैसे कि श्रीलंका में कइयों का खून कर चुके कबीर पर श्रीलंका की सरकार कोई कदम नहीं उठाती है। कबीर का एक बॉडीगार्ड होता है जो कि हमेशा उसके साथ ही रहता है लेकिन जब अयान उसके घर से उसका लैपटॉप चुराता है तब वो बॉडीगार्ड कहां गायब हो जाता है किसी को नहीं पता।
फिल्म में खासतौर पर मेल ऑ़डियंस के लिए काफी कुछ है जैसे की सन्नी और रणदीप के किसिंग सीन्स, ऑयल मसाज सीन, सनी और अरुणोदय के बीच के इंटिमेट सीन्स।
अभिनय में कौन पास कौन फेल- कलाकारों के अभिनय की बात की जाए तो सन्नी ने जिस्म दिखाने के अलावा कुछ नहीं किया है। एक्टिंग के नाम पर उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है। अरुणोदय सिंह की एक्टिंग एक कड़क ऑफिसर के तौर पर काफी निराश करती है। कबीर के किरदार में रणदीप हुड्डा ने काफी बेहतरीन एक्टिंग की है। आरिफ जकारिया अरुणोदय के बॉस के रुप में बिल्कुल एक मजाक किया गया है।
गाने- फिल्म के गानो को लेकर काफी अच्छा काम किया गया है। मौला, ये जिस्म, अभी अभी जैसे गाने काफी पसंद किये जा रहे हैं। आर्को प्रावो मुखर्जी और मिथुन शर्मा का संगीत काफी बेहतरीन है।
'जो दिखता है वो बिकता है' की तर्ज पर पूजा भट्ट ने जिस्म 2 बनाई है। खैर बिकने की बात है तो सन्नी के जिस्म की बदौलत फिल्म बिक तो जाएगी लेकिन जहां तक इंडियन सिनेमा और उसके कल्चर की बात है वहां इस फिल्म से काफी कुछ बदल जाएगा। शायद इसके बाद एक और दौर चल पड़े।


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